ओरण दिवस मनाया , वृक्षों को बांधे रक्षासूत्र
बाड़मेर। 
जहां एक ओर हर किसी को आधुनिकता की भागमभाग लगी हुई है वहीं दुसरी ओर ग्राम्य क्षेत्रों में फैली पसरी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत ओरण - गोचर को सहेजने एवं बचाने को लेकर होने वाले आयोजन बेहद ही अनुकरणीय है । तथा हमारी सांस्कृतिक धरोहर ओरण को बचाने के लिए हमें आगे आना होगा व आमजन में जागृति लाना हमारा दायित्व बनता है । यह बात ओरण दिवस के अवसर पर ओरण बचाओ आन्दोलन से जुड़े कार्यकर्ता मुकेष बोहरा ने उपस्थित ओरण प्रेमियों से कही 
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 26 अप्रैल को ओरण दिवस के रूप में मनाया गया । जिला मुख्यालय से लगभग 20 कि.मी. दूर स्थित राणीगांव में वर्ष 2002 में हुए ऐतिहासिक ओरण बचाओ आन्दोलन की चिरस्मृति में प्रतिवर्ष 26 अप्रैल को धर्मपूरी महाराज की ओरण में ओरण दिवस का आयोजन किया गया। 
महावीर जैन व बाबुलाल वादी ने बताया कि आज से ठीक 12 वर्ष पूर्व राणीगांव में चैहटन रोड़ फांटा पर विस्तृत भू भाग में फैली धर्मपूरी जी महाराज की ओरण को भूमाफियों एवं स्वार्थी तत्वों के चुंगल से बड़ी जदोजहद के बाद मुक्त करवाई गई थी । ओरण बचाओ आन्दोलन की 13वीं वर्षगांठ के अवसर पर 26 अप्रैल को धर्मपूरी की ओरण में पूजा अर्चना की तथा ओरण में स्थित वृक्षों को रक्षासूत्र बांधे गये ।
दौरान आन्दोलन से जुडे डालूराम सेजू, अनोपाराम, सवाईलाल जैन, महेन्द्र सिहं , चुतराराम, ़गेनाराम, केवलाराम जितेन्द्र कुमार , धर्मेन्द्र कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे । 

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