राजस्थान कांग्रेस को सोनिया और राहुल से आसरा
जयपुर।
लोकसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस के पास ऎसे राज्य स्तरीय नेताओं की कमी दिख रही है जो पूरे प्रदेश में रैलियां कर पार्टी के पक्ष में माहौल बना सकें। इसके चलते कांग्रेस को मुख्यत: राष्ट्रीय नेताओं पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। यही वजह है कि चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ज्यादा सभाओं की योजना बनाई जा रही है।
पिछले लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश कांग्रेस की कमान सी.पी.जोशी के पास थी। हालांकि जोशी खुद चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन प्रचार की कमान तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संभाल रखी थी। उन्होंने उस समय पूरे प्रदेश में सभाएं की थीं और प्रदेश में सरकार होने व प्रदेशाध्यक्ष होने के कारण जोशी को भी अपने क्षेत्र में ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ी थी।
इस बार हालात लगभग उलटे हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार है और चूंकि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चुनाव नहीं लड़ रही हैं, इसलिए वे पूरे प्रदेश में जाकर प्रचार कर रही हैं। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट खुद चुनाव लड़ रहे हैं। मुकाबला पहले से कुछ कड़ा भी है। यही कारण है कि अभी वे खुद अजमेर से बाहर नहीं निकल पाए हैं। बताया जाता है कि वे फिलहाल दो-तीन दिन अजमेर पर ही ध्यान केन्द्रित करेंगे और बीच के समय में प्रदेश के दौरे पर निकलेंगे। उन्हें केन्द्रीय नेताओं के साथ भी जाना होगा। अन्य बड़े नेताओं में सी.पी.जोशी भी चुनाव लड़ रहे हैं।
इन दो नेताओं के अलावा सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का है। वे प्रदेश मे सबसे ज्यादा भीड़ खींचने वाले नेता भी माने जाते हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि इस बार टिकट वितरण में पार्टी ने उन्हें जिस तरह से नाराज किया है। उसे देखते हुए वे बहुत सक्रिय भूमिका निभाएंगे इसमें पार्टी के लोगों को शक है। हालांकि अभी दो दिन उनका टोंक व अजमेर का दौरा बना है।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश स्तर पर बड़े नेताओं की व्यस्तता के चलते इस बार सोनिया, राहुल गांधी तथा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित अन्य केन्द्रीय नेताओं के दौरे ज्यादा कराने की पार्टी की योजना है। विधानसभा चुनाव में जहां राहुल ने चार-पांच और सोनिया ने दो सभाएं की थीं, वहीं इस बार इन नेताओं की औसतन आठ से दस सभाएं कराने की योजना है। इनका कार्यक्रम एक-दो दिन में आने की सम्भावना है।
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