बजरी खनन नीति में आवश्यक संशोधन होंगे- संसदीय कार्य मंत्री
जयपुर, 27 जनवरी।
संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार राज्य की वर्तमान बजरी खनन नीति में आवश्यक संशोधन करेगी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण और राज्य सरकार के नीति पत्र में भी इस सम्बन्ध में उल्लेख किया गया है।
राठौड़ प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस सम्बन्ध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 से 2012 तक कोई भी रॉयल्टी के आधार पर बजरी खनन कर सकता था। उच्चतम न्यायालय ने एक एसएलपी में निर्णय दिया कि लीज पट्टा खुली नीलामी के आधार पर जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि 19 जुलाई, 2012 तक तत्कालीन सरकार ने 128 खनन पट्टे जारी किए थे, जिनमें से 99 में खुली नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
राठौड़ ने कहा कि बजरी खनन पट्टों की खुली नीलामी सम्बन्धित सभी निर्णय पूर्ववर्ती सरकार के थे। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार ने 4 जनवरी, 2014 को तत्कालीन खान मंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की, जिसमें बजरी की दरें कम करने के उपायों पर चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि खनन प्रतिबन्धित आदिवासी क्षेत्र में आरएसएमएमएल द्वारा बजरी खनन करवाए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इसके अलावा यदि काश्तकार के खेत में बजरी मिलती है, तो उसे हटाने के लिए अल्पावधि अनुमति पत्र जारी किया जाना प्रस्तावित है।
इससे पहले विधायक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के मूल प्रश्न के जवाब में राठौड़ ने कहा कि सरकार ने बजरी खनन हेतु 82 लीज धारकों को स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा एस.एल.पी. 34134/13 में पारित निर्णय दिनांक 25 नवम्बर, 2013 की अनुपालना में 80 खनन पट्टा आवेदकों को उनके आवेदित खनन पट्टा क्षेत्र में खनिज बजरी का खनन कार्य 28 फरवरी, 2014 तक करने की कार्यानुमति दी गई है। राठौड़ ने उक्त सूची के साथ सरकार एवं लीज धारकों के बीच समझौता पत्र की प्रतियां भी सदन के पटल पर रखीं।
राठौड़ ने कहा कि सवाईमाधोपुर स्थित बनास नदी के बजरी खनन पर लीज धारकों ने समझौते के उल्लंघन की कोई शिकायत सरकार को प्राप्त नहीं हुई हैं।
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