करूणा की साक्षात् मूर्ति थे परमात्मा नेमिनाथ- साध्वी प्रियरंजनाश्री
बाड़मेर।
मुमुक्षु सीमा छाजेड़ की दीक्षा आगामी 8 दिसम्बर को पालीताणा में उपाध्याय प्रवर मरूधर मणि मणिप्रभसागरजी म.सा. की पावन निश्रा में होगी। दीक्षा के अनुमोदनार्थ पंचान्हिका महोत्सव के आज पांचवे दिन स्थानीय जिनकुशल नगर (गोलेच्छा ग्राउण्ड) में पूज्य साध्वीवर्या प्रियरंजनाश्री, साध्वी नंदीक्षेणाश्री, साध्वी विनीतयशाश्री आदि ठाणा के पावन सानिध्य में आज संयम अनुमोदना के पंच दिवसीय कार्यक्रम में गिरनार भाव यात्रा का आयोजन किया गया। प्राचीन तीर्थ गिरनार की भाव यात्रा मुम्बई से पधारे संजय भाई ने करवाई। गिरनार परमात्मा नेमिनाथ की दीक्षा केवलज्ञान और निर्वाण भूमि है। विश्व भर में प्राचीनतम प्रतिमा जो कि अरबों-खरबों वर्षों से भी अधिक पुरानी है, ऐसी परमात्मा नेमिनाथ की प्रतिमा यहां पर विराजित है। करूणा की साक्षात् मूर्ति परमात्मा नेमिनाथ थे। जिन्होनें पशुओं के करूण क्रंदन को सुनकर अपना रथ रोक लिया। तब आज पशु परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि आज आपके विवाह महोत्सव के भोज में हमारे जैसे हजारों निर्दोष पशुओं की हत्या होने वाली है। अतः आप हमें बचाइये। तब दयाद्र्र हृदय से प्रभु ने विचार किया कि यदि विवाह में इतनी भयंकर हिंसा हो तो मुझे विवाह ही नहीं करना और यह सोचकर सारथी को रथ मोड़ने का आदेश दिया। संसार से विरक्त प्रभु तब इसी गिरनार पर्वत पर आकर दीक्षा अंगीकार करते हैं और साधना में लीन बन जाते हैं। भाव यात्रा में संजय भाई ने इन्हीं सब घटनाओं के महात्म्य पर प्रकाश डाला।
संयम की अनुमोदना करते हुए साध्वी प्रियरंजनाश्री ने कहा कि प्राज्ञ रागादि के स्वामित्व में महिमा का दर्शन करते हैं। अज्ञ रागादि की गुलामी में महिमा का निरूपण करते हैं। लाखों रूपयों की सम्पत्ति का स्वामी सबको महिमावंत लगता है। रूपवती स्त्री का पति सबको भाग्यवंत दिखाई देता है। चार-चार एम.डी. डाॅक्टरों से पूरे शरीर की जांच करवाने वाला व्यक्ति सबको बुद्धिमान लगता है। विविध खाद्य और पेय पदार्थों के स्वाद और रीत रस्मों को जानने वाली महिला सबको आदरणीय लगती है।
परन्तु लाखों की सम्पत्ति का मालिक क्या परिग्रह की वासना का गुलाम नहीं? क्या रूप सुंदरी का पति वैषयिक वासाना का गुलाम नहीं? चार एम.डी. डाॅक्टरों के पास जांच करवाने वाला व्यक्ति क्या शरीर का गुलाम नहीं? विविध रसों को जानने वाली महिला क्या रसना की गुलाम नहीं? अतः बाहृ जगत् का स्वामित्व यानि अंदर की गुलामी। पर जिसने बाहृ जगत् का स्वामित्व छोड़ा वह ही अंदर की गुलामी से मुक्त होकर सच्चा सुख पा सकता है और इस सुख को प्राप्त करने के लिए संयम् जीवन श्रेष्ठ है।
आयोजक परिवार के शांतिलाल छाजेड़ ने बताया कि आज के पंचान्हिका महोत्सव का आयोजन डामरचन्द चतुर्भुज छाजेड़ परिवार द्वारा किया गया था। इस अवसर पर उक्त महोत्सव एवं स्वामी वात्सल्य के आयोजन में जैन समाज की समस्त संस्थाओं का आयोजक परिवार द्वारा बहुमान किया गया।
आज पूज्य साध्वीवर्या प्रियरंजनाश्री की प्रेरणा से आचार्य श्री जिनकांतिसागर की 28वीं पुण्य तिथि के निमित्त भगवन् तेरी आराधना पुस्तक का विमोचन मुमुक्षु सीमा छाजेड़ एवं मोहन मनोज गोलेच्छा एवं खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष मांगीलाल मालू द्वारा किया गया।
इससे पूर्व रात्रि में कुशल नगर में भव्य भक्ति संध्या का आयोजन भी किया गया।
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