मनमोहन पर भारी पड़े राहुल, विवादित अध्यादेश वापस
नई दिल्ली। 
आखिरकार वही हुआ जो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चाहते थे। उनके दबाव के कारण सरकार को दागियों को बचाने वाला विवादित अध्यादेश वापस लेने का फैसला करना पड़ा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में आम सहमति से अध्यादेश वापस लेने का फैसला हुआ है। इसी के साथ सरकार दागियों को बचाने वाले बिल को भी वापस लेगी। 
मनमोहन पर भारी पड़े राहुल, विवादित अध्यादेश वापसइस बिल में प्रावधान है कि दोषी करार दिए गए सांसदों को वेतन और भत्ते तो मिलेंगे लेकिन सदन में वोट देने का अधिकार नहीं होगा। इन फैसलों से साफ है कि अब पार्टी और सरकार उसी दिशा में चलेगी, जिधर राहुल लेकर जाएंगे। 
राहुल गांधी ने अध्यादेश को बकवास करार देते हुए कहा था कि इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए। राहुल ने यह बयान उस वक्त दिया था जब प्रधानमंत्री विदेश दौरे पर थे। कांग्रेस उपाध्यक्ष के बयान को प्रधानमंत्री का अपमान बताया गया था और उनके इस्तीफे की मांग भी की गई थी। हालांकि विदेश दौरे से लौटते वक्त प्रधानमंत्री ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था। 

दिन भर चला बैठकों का दौर 
अध्यादेश को लेकर दिन भर बैठकों का दौरा जारी रहा। मनमोनह सिंह ने बुधवार सुबह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री से मिले। बाद में कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हुई। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अध्यादेश वापस लेने का फैसला हुआ। 

बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने सहयोगी दलों को बताया कि कोर ग्रुप ने अध्यादेश वापस लेने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह से बात की। मनमोहन सिंह ने महाधिवक्ता जीई वाहनवती से कानूनी राय ली। 

अजित ने बताया दागियों को रोकने का फॉर्मूला 
अजित सिंह ने अध्यादेश वापस लेने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हमने सर्वदलीय बैठक में अध्यादेश लाने का विरोध किया था। सिंह ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि उसने सर्वदलीय बैठक में समर्थन किया था। लोकसभा में भी बिल का सपोर्ट किया था लेकिन राज्यसभा में रूख बदल लिया। अगर भाजपा अपना मन बदल सकती है तो कांग्रेस क्यों नहीं? सिंह ने कहा कि अपराधियों को राजनीति में आने से रोकने के लिए सबसे अच्छा तरीका फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करना है। इन अदालतों को छह महीने की समय सीमा के भीतर नेताओं के मामलों का निपटारना करना चाहिए। इससे अपराधी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। 

मेरा इरादा आपका अपमान करना नहीं था : राहुल

राहुल गांधी ने अध्यादेश के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अलग से मुलाकात कर अपना रूख स्पष्ट किया। प्रधानमंत्री आवास पर लगभग 25 मिनट तक चली बातचीत के दौरान गांधी ने डॉ.सिंह से कहा कि उन्होंने अध्यादेश के मुद्दे पर आम जनता की भावनाओं का इजहार कि या है। उनका डॉ. सिंह का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। राहुल ने पीएम को स्पष्ट किया कि वे अध्यादेश के खिलाफ हैं। 

अध्यादेश पर ऎसे मचा बवाल

24 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरूद्ध दागी नेताओं को बचाने वाला अध्यादेश मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा।


25 सितंबर: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पांच दिवसीय अमरीका यात्रा पर रवाना।


27 सितंबर : राहुल गांधी अचानक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे और केबिनेट द्वारा पास अध्यादेश को बकवास और फाड़कर फेंकने के काबिल बताया।

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