आतंकी शहजाद को मिली उम्रकैद 
नई दिल्ली। 
राजधानी की एक निचली अदालत ने 2008 में बटला हाऊस मुठभेड़ में शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या के दोषी इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध शहजाद अहमद को मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेन्दर कुमार शास्त्री ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में शहजाद के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 95 हजार रूपए का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की इस राशि में से 40 हजार रूपए शहीद के परिजनों को और 20 हजार रूपए इसमें घायल हुए पुलिसकर्मी बलवंत को दी जाएगी। सत्र न्यायाधीश ने सजा की अवधि पर सोमवार को अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सजा सुनाने के लिए मंगलवार की तारीख मुकर्रर की थी।
दिल्ली पुलिस ने जहां शहजाद के लिए मृत्युदंड का अनुरोध किया था वहीं बचाव पक्ष ने इसका यह कहते हुए विरोध किया था कि शहजाद को सुधरने का एक मौका दिया जाना चाहिए। विशेष सरकारी वकील सतविंदर कौर ने खालिस्तानी आतंकवादी देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर और मुंबई हमले के दोषी अजमल आमिर कसाब के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि बटला हाऊस कांड ने भी सामूहिक तौर पर समाज के दिलो-दिमाग को झकझोर दिया था।
उन्होंने दलील दी थी कि शहजाद के सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं है और यदि उसे छोड़ दिया गया तो वह समाज के लिए खतरा बना रहेगा। अदालत ने लगभग पांच साल तक राजनीतिक विवाद का कारण रही मुठभेड़ में जीवित पकड़े गए एक मात्र संदिग्ध शहजाद को हत्या,हत्या के प्रयास, सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य पालन में व्यवधान पहुंचाने और हमला करने का दोषी पाया। 
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 70 गवाह पेश हुए थे जिनमें छह चश्मदीद गवाह शामिल हैं। ये चश्मदीद दिल्ली पुलिस के विशेष्ा प्रकोष्ठ के सदस्य थे जो बटला हाऊस पर छापेमारी में शामिल थे। गौरतलब है कि जामिया नगर के बटला हाऊस में 19 सितंबर 2008 को हुई मुठभेड़ में दो संदिग्ध आतंकवादी मारे गए थे। ये सभी संदिग्ध उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले थे।
राजधानी दिल्ली में 13 सितंबर 2008 को हुए सिरीयल बम विस्फोटों में 26 लोगों के मारे जाने और 100 से अधिक के घायल होने की घटना के छह दिन बाद ही दिल्ली पुलिस के विशेष दस्ते ने बटला हाऊस में संदिग्ध गतिविधियों की खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी की थी। इस दौरान मुठभेड़ विशेषज्ञ इंस्पेक्टर शर्मा की गोली लगने से मौत हो गई थी। 
बाद में इस मुठभेड़ पर राजनीति शरू हो गई थी। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव सहित अनेक राजनीतिज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया था। इन लोगों का कहना था कि शर्मा की हत्या पुलिस के भीतर दुश्मनी के कारण हुई थी। वष्ाü 2009 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह कहते हुए दिल्लीपुलिस को क्लीन चिट दी थी कि पुलिस ने किसी भी अधिकार का उल्लंघन नहीं किया था।

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