दामिनी के लिए हो रही दुआ 
जयपुर।
शक्ति की आराधना का पर्व और डांडिया की खनक में खोई राजधानी.... इन सबके बीच जेएलएन मार्ग स्थित एक निजी अस्पताल में शक्ति की वास्तविक पूजा चल रही है। कहानी है भरतपुर के रिक्शा चालक बबलू की। एक माह पहले सरकारी अस्पताल में पांच दिन की बच्ची को छोड़ उसकी मां शांति चल बसी थी। तब से बबलू बेटी दामिनी को गले में लटका कर रिक्शा चला रहा था और उसे पाल रहा था।
बेटी की तबीयत की बिगड़ी तो बबलू ने उसे सरकारी अस्पताल में दिखाया। वहां इलाज ठीक से नहीं हुआ। मीडिया में खबरें आई तो भरतपुर के एक निजी अस्पताल ने इलाज का जिम्मा उठाया। राजस्थान पत्रिका ने भी बबलू की पीड़ा उजागर की। मीडिया में खबरें चलने के बाद जिला प्रशासन भी जागा। भरतपुर कलक्टर जी.पी. शुक्ला ने बच्ची को इलाज के लिए जयपुर के फोर्टिस अस्पताल भेजा और पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की बात कही। बच्ची के साथ डॉक्टरों की टीम और एक एसडीएम भी भेजा। शुक्ला ने बबलू को खर्च के लिए 1700 रूपए दिए गए हैं। 
बबलू ने बताया, 1999 में शादी के बाद 2000 में उसे एक बच्ची हुई थी जो कुछ ही दिनों में चल बसी थी। अब तो दामिनी ही उसकी आखिरी उम्मीद है। बबलू के पिता जीवन ने कहा, बच्ची बच जाए चाहे भगवान मेरे प्राण ले ले। भरी आंखों से बबलू ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी की मौत अस्पताल वालों की लापरवाही से हुई थी। 

वेंटीलेटर पर है बच्ची -
भरतपुर से रात 9.45 पर अस्पताल पहुंचते ही बच्ची को एनआईसीयू में रखा गया। फिलहाल वह वेंटीलेटर पर है। अस्पताल के निदेशक डॉ. प्रतिम तम्बोली ने बताया, बच्ची का वजन मात्र 1400 ग्राम है और उसकी हालत गंभीर है। कुपोषण के कारण स्थिति बिगड़ती गई। भरतपुर के बच्ची का इलाज चाइल्ड वेलफेयर हॉस्पिटल में चल रहा था।

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