नई दिल्ली.
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के नाम एक और सम्मान जुड़ गया है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री जूलिया गिलार्ड ने तेंडुलकर को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया की मानद सदस्यता देने का ऐलान किया है। इस सम्मान से क्रिकेट प्रशंसक तो गदगद हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों के बीच इस घोषणा को लेकर रोष है।
सचिन यह सम्मान पाने वाले तीसरे गैर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और दूसरे भारतीय नागरिक हैं। लेकिन गेरार्ड के ऐलान का ट्विटर पर जम कर विरोध हो रहा है। ऑस्ट्रेलियाई लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि एंड्रयू सायमंड्स और हरभजन सिंह के बीच हुए मंकीगेट विवाद में सचिन तेंडुलकर का नाम भी शामिल था। ऐसे में उन्हें इतना बड़ा सम्मान क्यों दिया जा रहा है।
कहां किया ऐलान?
ऑस्ट्रेलिया की प्राइम मिनिस्टर जूलिया गिलार्ड ने राजधानी में आयोजित एक क्रिकेट क्लीनिक के दौरान सचिन तेंडुलकर को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया की मानद सदस्यता देने का ऐलान किया। जूलिया इस समय भारत दौरे पर हैं। उन्होंने दिल्ली में वंचित वर्ग के युवाओं के क्रिकेट क्लीनिक में हिस्सा लिया।
भड़के कंगारू
जूलिया के इस फैसले पर ऑस्ट्रेलियन्स भड़क गए हैं। ट्विटर पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए एक ऑस्ट्रेलियाई यूजर ने लिखा है, "पीएम जूलिया सचिन तेंडुलकर को यह अवार्ड कैसे दे सकती हैं। मंकीगेट नस्लीय विवाद में सचिन तेंडुलकर की अहम भूमिका थी। ऐसे में उन्हें इतना बड़ा सम्मान देना गले नहीं उतर रहा।"
पीटर चैम्बर्स नाम के यूजर ने लिखा, "गिलार्ड का यह फैसला क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का अपमान है। सचिन तेंडुलकर ऑस्ट्रेलियाई साइमंड्स पर हुए नस्लीय हमले में शामिल थे।"
मिंडी पॉसी ने लिखा, "अगर तेंडुलकर बतौर ऑस्ट्रेलियन सिटिजन यह अवार्ड लेने के काबिल हैं तो मुझे लगता है कि उन्हें टैक्स में भी छूट दी जाए।"
एविल रॉय स्लेड ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा, "गिलार्ड यदि सचिन को ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता दे सकती हैं तो उन्हें लांस आर्मस्ट्रॉन्ग को भी यह अवार्ड देना चाहिए।"
कौन-कौन पा चुका है यह सम्मान?
ऑस्ट्रेलिया में इस अवार्ड के जरिए खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया जाता है। सचिन यह सम्मान पाने वाले तीसरे गैर-ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर हैं। उनसे पहले वेस्ट इंडीज के क्लाइव लॉयड (1985) और ब्रायन लारा (2009) को यह सम्मान मिल चुका है। सर गैरी सोबर्स को 2003 में यह अवार्ड मिला था, लेकिन यह उन्हें बतौर ऑस्ट्रेलियाई नागरिक मिला था।
दूसरे भारतीय नागरिक
ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया का अवार्ड सचिन से पहले ज्यूरिस्ट सोली सोराबजी को मिला था। सोराबजी को मार्च 2006 में यह सम्मान भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य लीगल रिलेशन्स में योगदान के लिए मिला था। उनके अलावा नेल्सन मंडेला, मदर टेरेसा और जैक कॉस्ट्यू को इस अवार्ड से सम्मानित हुए हैं।
क्या है ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया?
ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया की स्थापना इंग्लैंड की महारानी ने 14 फरवरी 1975 को की थी। यह सोसाइटी ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों और अन्य हस्तियों के सम्मान के लिए बनाई गई थी।
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