आईएएस को जान से मारने की धमकी
नई दिल्ली।
नई दिल्ली।
रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी और डीएलएफ के बीच जमीन सौदे के मामले की जांच का आदेश देने वाले हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की जान को खतरा है। खेमका के करीबी दोस्त और वकील अनुपम गुप्ता ने यह दावा किया है। गुप्ता ने कहा कि उनके मित्र को हतोत्साहित किया जा रहा है। पहली बार खेमका को जान से मारने की गंभीर किस्म की धमकियां मिली है। गुप्ता ने कहा कि वह हर हाल में अपने मित्र की मदद करेंगे। अगर मामला कोर्ट में जाता है तो वह वहां भी खेमका का साथ देंगे।
8 को आदेश 11 को ट्रांसफर
वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका ने हरियाणा के चार जिलों गुड़गांव,फरीदाबाद,पलवल और मेवात में वाड्रा या उनकी कंपनी के नाम से रजिस्टर प्रॉपर्टी की जांच के आदेश दिए थे। खेमका को शक था कि इन सौदों में कम कीमत दिखाकर स्टैम्प ड्यूटी की चोरी की गई है। खेमका ने 8 अक्टूबर को जांच का आदेश दिया और 11 अक्टूबर को उनका तबादला कर किया। जांच का आदेश देते वक्त खेमका लैण्ड रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंड में तैनात थे। अब उन्हें बीज विकास निगम में डीजी पद पर लगाया गया है। गौरतलब है कि दो दशक के कार्यकाल में खेमका का 40 बार तबादला हो चुका है।
8 करोड़ की जमीन 58 करोड़ में बेची
खेमका ने ही वाड्रा के मानेसर के प्लॉट का म्यूटेशन रद्द कर दिया था। म्यूटेशन का मतलब सरकारी रिकॉर्ड में संपत्ति के मालिक से टैक्स वसूलने से है यानी जिसके नाम से संपत्ति होती है म्यूटेशन के बाद वही आदमी संपत्ति का टैक्स भरता है। मानेसर का ये प्लॉट वाड्रा की कंपनी स्काई लाईट होस्पेटिलिटी प्राईवेट लिमिटेड ने 7.5 करोड़ में खरीद कर डीएलएफ को 58 करोड़ में बेचा था। यहां चौंकाने वाली बात ये है कि 28 मार्च 2008 को हरियाणा सरकार ने वाड्रा को इस प्लॉट पर हाउसिंग कॉलोनी बनाने की इजाजत दी थी। सिर्फ 65 दिन बाद ही वाड्रा ने इसे बेचने का करार डीएलएफ के साथ कर लिया। खेमका ने 15 अक्टूबर को वाड्रा के प्लॉट का म्यूटेशन रद्द कर दिया।
खेमका ने मांगी सरकार से सुरक्षा
खेमका ने कुछ दिन पहले हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने जमीन घोटाल का जिक्र किया था। उन्होंने मामले की जांच की मांग की थी। साथ ही उन्होंने अपने और परिवार की सुरक्षा की मांग की थी। हरियाणा सरकार ने मामले की जांच कराने की बजाय उनका ही ट्रांसफर कर दिया।
अरविंद केजरीवाल ने खेमका के तबादले की निंदा की है। केजरीवाल का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है कि खेमका ईमानदार अफसर है। उनके तबादले से जाहिर होता है कि किसी को बचान की कोशिश की जा रही है। वह जानना चाहते हैं कि हरियाणा सरकार की तबादले की नीति क्या है? क्या एक परिवार को बचाने के लिए कानून को दरकिनार कर किसी अफसर का तबादला किया गया है?
8 को आदेश 11 को ट्रांसफर
वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका ने हरियाणा के चार जिलों गुड़गांव,फरीदाबाद,पलवल और मेवात में वाड्रा या उनकी कंपनी के नाम से रजिस्टर प्रॉपर्टी की जांच के आदेश दिए थे। खेमका को शक था कि इन सौदों में कम कीमत दिखाकर स्टैम्प ड्यूटी की चोरी की गई है। खेमका ने 8 अक्टूबर को जांच का आदेश दिया और 11 अक्टूबर को उनका तबादला कर किया। जांच का आदेश देते वक्त खेमका लैण्ड रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंड में तैनात थे। अब उन्हें बीज विकास निगम में डीजी पद पर लगाया गया है। गौरतलब है कि दो दशक के कार्यकाल में खेमका का 40 बार तबादला हो चुका है।
8 करोड़ की जमीन 58 करोड़ में बेची
खेमका ने ही वाड्रा के मानेसर के प्लॉट का म्यूटेशन रद्द कर दिया था। म्यूटेशन का मतलब सरकारी रिकॉर्ड में संपत्ति के मालिक से टैक्स वसूलने से है यानी जिसके नाम से संपत्ति होती है म्यूटेशन के बाद वही आदमी संपत्ति का टैक्स भरता है। मानेसर का ये प्लॉट वाड्रा की कंपनी स्काई लाईट होस्पेटिलिटी प्राईवेट लिमिटेड ने 7.5 करोड़ में खरीद कर डीएलएफ को 58 करोड़ में बेचा था। यहां चौंकाने वाली बात ये है कि 28 मार्च 2008 को हरियाणा सरकार ने वाड्रा को इस प्लॉट पर हाउसिंग कॉलोनी बनाने की इजाजत दी थी। सिर्फ 65 दिन बाद ही वाड्रा ने इसे बेचने का करार डीएलएफ के साथ कर लिया। खेमका ने 15 अक्टूबर को वाड्रा के प्लॉट का म्यूटेशन रद्द कर दिया।
खेमका ने मांगी सरकार से सुरक्षा
खेमका ने कुछ दिन पहले हरियाणा के मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने जमीन घोटाल का जिक्र किया था। उन्होंने मामले की जांच की मांग की थी। साथ ही उन्होंने अपने और परिवार की सुरक्षा की मांग की थी। हरियाणा सरकार ने मामले की जांच कराने की बजाय उनका ही ट्रांसफर कर दिया।
अरविंद केजरीवाल ने खेमका के तबादले की निंदा की है। केजरीवाल का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है कि खेमका ईमानदार अफसर है। उनके तबादले से जाहिर होता है कि किसी को बचान की कोशिश की जा रही है। वह जानना चाहते हैं कि हरियाणा सरकार की तबादले की नीति क्या है? क्या एक परिवार को बचाने के लिए कानून को दरकिनार कर किसी अफसर का तबादला किया गया है?
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