जैसलमेर में अन्तर्राष्ट्रीय मनो स्वास्थ्य दिवस पर सेमीनार में विविध पहलुओं पर हुई चर्चा 

जैसलमेर, 10 अक्टूम्बर/ जिला एवं सेशन न्यायाधीश छगनलाल गुप्ता ने कहा कि मानसिक रोगी को संरक्षण देने के लिए समाज में जनजागृति पैदा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगी को भी समाज में सामान्य व्यक्ति की तरह जीने का पूरा अधिकार है एवं उसके लिए न्याय पालिका द्वारा विधिक प्रावधान लागू किए गए है। 

जिला एवं सेशन न्यायाधीश गुप्ता बुधवार को विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में विश्व मानसिक दिवस पर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। सेमीनार में मुख्यन्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार सोनी, न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, बार एशोसियेसन जैसलमेर के अध्यक्ष मूल्तानाराम बारूपाल के साथ ही शिक्षाविद, अधिवक्तागण, मीडिया प्रतिनिधि, अधिकारीगण उपस्थित थे। 

सेशन न्यायाधीश गुप्ता ने कहा की मानसिक रोगी जन्म से या किसी परिस्थितिवंश हो जाता है एवं उसका उपचार भी विभिन्न स्तरों पर संभव है। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगी का उपचार कराने के लिए हमें समाज में हमे एक नई चेतना जगानी होगी एवं जिस परिवार में मनोरोगी है उसे भी यह सीख देनी है कि वे उस मनोरोगी का उपचार आवश्यक करावे। उन्होंने कहा कि मनोरोगी को संरक्षण प्रदान करने के लिए विधिक सेवा में भी पूरा प्रावधान किया गया है, उसे भी हमें अमल में लाना है ताकि मानसिक रोगी को समाज में पूरा संरक्षण मिल सके। 

मुख्यन्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार सोनी ने सेमीनार में मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के कानूनी प्रावधानों की जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि मानसिक रोगी को भी समाज में जीने का अधिकार है एवं उसके लिए कानूनी प्रावधान भी है। उन्होंने सेमीनार के उदेश्यों पर प्रकाश डाला एवं कानून में मानसिक रोगी के संरक्षण के संबंध में जो प्रावधान किए गए है उसके बारे में विस्तार संभागियों को जानकारी दी। 

बार एसोशियेसन के अध्यक्ष मुल्तानारम बारूपाल ने कहा की ईश्वरीय प्रकोप के कारण जन्म से मानसिक रोगी हो सकता है लेकिन समाज में व्याप्त वैचारिक एवं आर्थिक असमानताओं से भी व्यक्ति मानसिक रोग से पीडित हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमें समाज में वैचारिक धारणाओं में बदलाव लाना है ताकि मानसिक रोग की स्थिति कम से कम पैदा हो। उन्होंने मानसिक रोग के उपचार के संबंध में विशेष प्रयास करने की आवश्यकता प्रतिपादित की। 

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दीनदयाल ओझा ने प्राचीन प्रासंगिक उदाहरणों को प्रस्तूत करते हुए कहा कि मन के उपर काबू पाने पर ही हम मनोरोग से बच सकते है। उन्होंने कहा कि आज के इस वैज्ञानिक युग में खेल, संगीत एवं शारीरिक श्रम से भी मनोरोग जैसी बीमारी में कमी ला सकते है। सेमीनार में अधिवक्ता सवाई सिंह देवडा ने भी मानसिक रोगी को संरक्षण देने के लिए समाज में एक अच्छा संदेश देने की आवश्यकता जताई। 

सहायक निदेशक हिम्मत सिंह कविया ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विशेष योग्य जन के संरक्षण के लिए निदेशालय गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि जोधपुर में मानसिक रोगियों के संरक्षण के लिए विद्यालय का संचालन भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विशेष योग्य जनो के संरक्षण के लिए भरपूर प्रयास कर रही है 

सेमीनार में डॉ. नरेन्द्र सोलकी ने प्रोजेक्टर के माध्यम से मानसिक रोगियों के प्रकार, उनके उपचार की विधि एवं अन्य पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। सेमीनार में श्योर संस्था के सत्यनारायण ने मानसिक रोगियों के जैसलमेर में उपचार करने की आवश्यकता जताई। सेमीनार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आनन्द गोपाल पुरोहित के साथ ही अधिवक्तागण उपस्थित थे।

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