गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्र से 
हम है सुरक्षित क्यूंकि मुश्तैद हैं बीएसए 

बाड़मेर 

वो दिन अब शायद नहीं आये कि इस तरीके की खबरें प्रमुखता से अखबारों के मुख्य समाचारों में या चैनलों की ब्रेकिंग में शुमार हो जैसे सीमा के उसपार से हरामीनाला से चार पाकिस्तानी कच्छ में घुस आए हैं या देश के किसी शहर में जो बम विसोट हुआ, उसके लिए मौत का सामान कच्छ की सीमा से ही भारत में आया था, ऐसी खबरें अब बीते समय की बात हो जाएंगी, क्योंकि बीएसए ने इस खतरनाक सरहद को अब पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया है। वैसे तो सेना पिछले काी समय से इस बॉर्डर की सुरक्षा के इंतजामों में लगी हुई थीए जो काम अब लगभग पूरा हो चुका है। यानी अब इस समुद्री सीमा से भारत में घुसपैठ की संभावना शून्य हो गई है। 

बीएसए के उच्च अधिकारियों की यह बात मानने का कारण भी है। बीते दिनों सीमा सुरक्षा बल यानी देश के सबसे मजबूत अर्ध सैनिक दल ने गुजरात और राजस्थान के पत्रकारों को इस बॉर्डर की सैर करवाई। इसके साथ ही गांधीनगर स्थित डीआईजी यू.के. नयाल तथा भुज स्थित डीआईजी वीरेंद्र कुमार ने पत्रकारों को यह भी दिखाया कि हमारे जवान किस तरह चौबीसों घंटे इस सरहद की सुरक्षा के लिए चौकस रहते हैं। यही वजह है कि अब यहां से घुसपैठ की समस्या पूरी तरह खत्म हो गई है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों ने बताया कि हरामी नाले की भौगोलिक स्थिति ही कुछ ऐसी है, जिसे पूरी तरह से कंट्रोल में लेना बहुत मुश्किल है। लेकिन भारतीय जवानों ने अपने कंधों पर बोट रखकर मीलों का सर तय करते हुए उन इलाकों में भी चौकियां स्थापित कर दीं, जहां पहुंचने की बात सोचना भी आसान नहीं था। याद रहे कि त्र्कीक में घुसना बीएसए के लिये बहुत ही मुश्किल है, कारण कि हरामी नाले का पानी भारत की तर सीमा में फैला हुआ है जो मारसी और कीचड़ से भरा रहता है और तकरीबन 500 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र को घेरता है। साथ ही इस क्षेत्र में पैदल तो क्या गाड़ी या पेट्रोल बोट से भी जाना नामुमकिन है। साथ ही साथ हरामी नाला भारत के क्षेत्र वियानवरी त्र्कीक की तर से पाकिस्तान के जी-पिलर 29 की तर जाता है उसके पश्चात यह बॉर्डर पिलर न.1171 के पास वापस भारत की सीमा की ओर बढ़ता है। पाकिस्तान सरकार ने इस विवादित त्र्कीक क्षेत्र को अपने इलाके में तकरीबन 2 किलोमीटर लम्बी और 50 मीटर चौड़ी एक कृत्रिम चैनल खोद कर मिला लिया है। अब तो सरत्र्कीक इलाके में हरामीनाला के तहत लखपत से अंतिम बॉर्डर आउट पोस्ट 1175 तक सड़क का निर्माण किया जा रहा है। जो लम्बे समय से इस इलाके कि ख़ास जरूरतों में भी शुमार रही हैं । 

हालांकि त्र्कीक इलाके में सीमा को लेकर भारत का पाकिस्तान के साथ लंबे समय से विवाद रहा है और दोनों देशों की बातचीत के एजेंडे में यह मुद्दा है। क्षेत्र में सर त्र्कीक, पीर सनाई त्र्कीक, पाबेवरी त्र्कीक, वियांबारी त्र्कीक, कूरी त्र्कीक और देवेरी त्र्कीक जैसी संकरी खाड़ियों के साथ.साथ कई नाले हैं, जिनमें हरामी नाला घुसपैठ के लिहाज से काी संवेदनशील है। पिछले कुछ वषों में यह इलाका पाकिस्तानी मछुआरों द्वारा जल सीमा के उल्लंघन का गवाह रहा है। दलदली भूमि होने की वजह से सैनिकों को इस इलाके से होने वाली तस्करी और घुसपैठ के खिला कारर्वाई करने में कठिनाई आती है। 



जम्मू कश्मीर में सेना की सख्ती के बाद अब आतंकवादी घुसपैठ के लिए गुजरात और राजस्थान बॉर्डर को चुन सकते है, यह बात बार सामने आ रही ही और पिछले कुछ समय से पाक की खुयि ऐजन्सी आईएसआई गुजरात और राजस्थान बॉर्डर से घुसपैठ की बार बार कोशिशि भी कर रही है , लेकिन अब हिंदुस्तान बॉर्डर पर आतकवादियो को करार जबाब देने के लिए तैयार हो गया है । अब पाकिस्तान संभल जाए शायद इसी का ऐलान हुआ हैं, इस सुरक्षा की नई दीवार को भांपने के बाद पाकिस्तान और दहशत पसंद लोगो के होश ाख्ता हो गए हैं । आतंकवादियों के इस इलाके से होकर घुसपैठ करने के सपने चकनाचूर हो जाएगे हिंदुस्तान ने अपने बॉर्डर पर अब अपने जवानों को आधुनिक उपकरण और हथियारों के साथ तैनात कर दिया है । अब गुजरात और राजस्थान बॉर्डर पर परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा अगर किसी ने इस बॉर्डर से आतकवादियो ने घुसपैठ की हिमाकत भी की तो सीमा सुरक्षा बल के जवानो की तेज़ तरार्र नज़रों से वो बच पाएंगे। क्यूंकि अब सीमा सुरक्षा बल और भी ही ज्यादा हाई टेक हो गया है । 

याद रहे कि गुजरात में पाकिस्तान सीमा से सटे सरत्र्कीक क्षेत्र में अब और कड़ी निगरानी हो सकेगी। बीएसए क्षेत्र की निगरानी के लिए कई उपाय कर रहा है। इनमें त्र्कीक सीमा तक सड़क निर्माण के साथ-साथ नए सुविधायुक्त वाहनों होवरत्र्काफ्ट, ऑल टेरेन ह्विकल (एटीवी) और तेजी से हमला करने वाले यान ास्ट की खरीद भी शामिल है। ऑल टेरेन ह्विकल (एटीवी) पूर्व में ही सीमा सुरक्षा बल के पास चार उपलब्ध हैं जो कारगर भी साबित हुए हैं । 

बीएसए के गुजरात इलाके में सरत्र्कीक इलाके में हरामीनाला के तहत लखपत से अंतिम बॉर्डर आउट पोस्ट 1175 तक सड़क का निर्माण किया जा रहा है। 26 किमी लम्बी इस सड़क पर अब सिर चार किमी का निर्माण ही शेष है। इसके अलावा त्र्कीक की दूसरी अंतिम सीमा पर स्थित जी- पिलर तक भी सड़क के निर्माण का प्रस्ताव है। इन सड़कों के निर्माण के बाद त्र्कीक के अंतरराष्ट्रीय सीमा तक नजर रखी जा सकेगी। 

सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी डीआईजी यूके न्याल के अनुसार एटीवी इटली से मंगाए जा रहे हैं। इसके अलावा चार ास्ट अटैक त्र्काफ्ट की भी खरीद की जाएगी, बताया जा रहा हैं कि इनकी कीमत करीब सवा 62 करोड़ रुपए है।

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