नहीं रहे भारत में श्वेत क्रांति के जनक
नई दिल्ली।
भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉक्टर वर्गीज कुरियन का रविवार सुबह निधन हो गया। केरल में जन्मे कुरियन को गुजरात के आणंद शहर में सहकारी डेरी विकास के सफल मॉडल की स्थापना करने और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए जाना जाता है। वर्ष 1973 में उन्होंने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएएफ)की स्थापना की। वे 34 साल तक इसके अध्यक्ष रहे।
जीसीएमएमएफ वो संस्था है जो अमूल के नाम से डेयरी उत्पाद बनाती है। 11 हजार से अधिक गांवों के 20 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली इस संस्था ने सहकारिता के क्षेत्र में दूध और अन्य उत्पादों के लिए एक इतिहास रचा है। कुरियन के जीवनकाल में भारत सरकार ने उन्हें पk श्री,पk भूषण और पk विभूषण से सम्मानित किया। वर्ष 1965 में उन्हें रेमन मैगसायसाय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
भारत रत्न नहीं मिलने पर नाराजगी
कुरियन आणंद के इंस्टिट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट (आईआरएमए) के अध्यक्ष भी रहे हैं। इसी हफ्ते मुंबई में इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति ने कुरियन के जीवन पर आधारित एक ऑडियो बुक का अनावरण किया था। ये ऑडियो बुक साल 2005 में छपी उनकी जीवनीए आई टू हैड ए ड्रीम पर आधारित है। इसका अनावरण करते हुए नारायण मूर्ति ने कहा था कि एक सभ्य समाज वही है जो किसी के महत्वपूर्ण योगदान का आभार व्यक्त करे। अगर हमारा देश कुरियन को भारत रत्न से सम्मानित नहीं करता तो मुझे नहीं समझ आता कि और कौन इस सम्मान के योग्य है।

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