सरहद पर फहरा शिक्षा का परचम
भारत की पश्चिमी सीमा पर मीलों तक पसरे रेगिस्तान के बीच बाड़मेर जिला शैक्षिक विकास की गतिविधियों में अपनी अलग ही अनूठी एवं अग्रणी पहचान बना रहा है। सरकार की कई योजनाओं व कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के फलस्वरुप यह सीमावर्ती जिला अपनी पुरानी पहचान को ध्वस्त करता हुए शैक्षिक विकास की डगर पर रफ्तार पा चुका है। शिक्षा से सम्बद्ध विभागों की समन्वित भागीदारी के चलते अब सरहद पर तालीम के तराने सुनाई देने लगे हैं।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी,
बाड़मेर
भारत की पश्चिमी सीमा पर मीलों तक पसरे रेगिस्तान के बीच बाड़मेर जिला शैक्षिक विकास की गतिविधियों में अपनी अलग ही अनूठी एवं अग्रणी पहचान बना रहा है। सरकार की कई योजनाओं व कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के फलस्वरुप यह सीमावर्ती जिला अपनी पुरानी पहचान को ध्वस्त करता हुए शैक्षिक विकास की डगर पर रफ्तार पा चुका है। शिक्षा से सम्बद्ध विभागों की समन्वित भागीदारी के चलते अब सरहद पर तालीम के तराने सुनाई देने लगे हैं।
गांव-गांव गूंजा पढ़वा को हैलो
बाड़मेर जिले में सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत अधिकतम जैण्डर गैप वाले ब्लॉक में कला जत्थों के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में गतिविधि का आयोजन किया गया। इस गतिविधि का उद्देश्य बालिका शिक्षा के महत्त्व एवं उपयोगिता के संदेश को वृहद स्तर पर फैलाना, अभिभावक, समुदाय व जनप्रतिनिधियों को बालिकाओं को स्कूल भेजने हेतु प्रेरित करना, बालिकाओं की शिक्षा निरंतर एवं विद्यालय का माहौल बालिकाओं के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करना रहा है।
इस गतिविधि में कला जत्थे द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर अभिभावकों को बालिकाआें को विद्यालय भेजने का संदेश गीत, नृत्य एवं नाटकों के माध्यम से दिया जाता है। बाड़मेर में शिव एवं चौहटन ब्लॉक में इस वर्ष जुलाई में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अभिभावकों द्वारा मौके पर ही बालिकाओं केा विद्यालय में प्रवेश दिलवाया गया। दोनों ब्लॉकाें में 19 हजार 567 अभिभावकों व17 हजार 679 बालिकाओं ने इस कार्यक्रम में भागीदारी की तथा कुल 1 हजार 977 बालिकाआें को विद्यालयों में नामांकित किया गया।
बालिकाओं के लिए छात्रावास सुविधा
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत शैतिक दृष्टि से बाड़मेर जिले के 6 पिछड़े ब्लॉको में बालिका छात्रावास का निर्माण करवाया जा रहा है उनमें से बालिका छात्रावास मायलावास (सिवाना) एवं बालिका छात्रावास हरसानी(शिव) में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। शेष बाड़मेर-बालोतरा-बायतू- चौहटन में निर्माण कार्य प्रक्रियाधीन है। इन छात्रावासों मेंं कस्तूरबा बालिका छात्रावास से 8 वीं उत्तीर्ण छात्राओं को आगे नियमित अध्ययन करने के लिए प्रवेश दिया जा रहा है। प्रत्येक छात्रावास में 50 बालिकाओं को प्रवेश दिया गया।
मॉडल स्कूल
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत नवोदय विद्यालय की तर्ज पर शैतिक दृष्टि से पिछडे6 ब्लॉकों में मॉडल स्कूल का निर्माण करवाया जा रहा है। ब्लॉक शिव में ग्राम देताणी में मॉडल स्कूल निर्माण कार्य छत स्तर तक का पूर्ण हो चुका है तथा ब्लॉक बाड़मेर, चौहटन, बालोतरा एवं सिवाना में निर्माण कार्य प्रारम्भ हो गया है। सत्र 2013-2014 से इनमें प्रवेश प्रारम्भ हो जाएगा। इस मॉडल स्कूल में संबंधित ब्लॉक से कक्षा 5वीं उत्तीर्ण बालक-बालिकाआें को कक्षा 6 में प्रवेश दिया जाएगा। यह विद्यालय कक्षा 6 से 12 तक होगा तथा इसमें शिक्षण का माध्यम अंगर््रेजी भाषा होगी। इन पूर्णतया आवासीय विद्यालयों में आवास, भोजन आदि व्यवस्था निःशुल्क होगी।
साईकिल वितरण योजना
बाड़मेर जिले में वर्ष 2011-12 में बजट घोषणा के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाआें को घर से विद्यालय आने के लिए बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन हेतु साईकिल वितरण योजना चलाई जा रही है। कक्षा 8 वी उत्तीर्ण बालिका (जो कक्षा 9 में ग्रामीण क्षेत्र मे स्थित राजकीय विद्यालयों मे अध्ययनरत है) को मात्र 100 रुपए राज्यांश प्रति छात्रा प्राप्त कर साईकिल वितरित करने का प्रावधान है। देवनारायण छात्रा साईकिल योजना के अन्तर्गत विशेष पिछड़ा वर्ग की छात्रा से 100 रु. का अंशदान भी नहीं लिया जाता है। सत्र 2012-13 में लगभग 5 हजार 674 छात्राआें के आवेदन पर कार्यवाही जारी है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय
निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार 6 से 14 आयु वर्ग के सभी बालक-बालिकाओं को निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा प्रदान की जानी है। इस अधिनियम की पालना के लिए शिक्षा से वंचित बालक-बालिकाओं को चिह्नित कर उन्हें आवासीय विद्यालयों में पढ़ाया जाकर कालान्तर में नियमित विद्यालयों से जोड़ा जाता है। वर्ष 2010 में 88000 हजार तथा वर्ष 2011में 59000 शिक्षा से वंचित ऎसे बच्चों को कस्तुरबा आवासीय विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा से जोड़ा गया है।
मिड-डे-मील कार्यक्रम
बाड़मेर जिले में कक्षा 1 से 8 तक 452215 छात्राओं का नामांकन है जिनको प्रतिदिन पोषाहार उपलब्ध करवाया जा रहा है। पोषाहार की सुविधा प्राप्त विद्यालय की संख्या 5143 है जिनमें प्राथमिक,उच्च प्राथमिक माध्यमिक व मदरसे शामिल हैं। यह एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसके कारण बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है तथा विद्यालयों में नामांंकन की संख्या में अभिवृद्धि हुई है। बच्चों को पौष्टिक आहार एक साथ खिलाये जाने से उन में आपसी जुड़ाव व भाई चारे की भावना का विस्तार हुआ है।
बाड़मेर जिले में शिक्षा से संबंधित तमाम विभागों के समन्वित प्रयासों से शैक्षिक विकास की गतिविधियां रफ्तार पर हैं।


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