गणेश दर्शनों के लिए उमड़े श्रद्धालु
जयपुर।
देश भर में गणेश चतुर्थी धूम-धाम से मनाई जा रही है, प्रथम पूज्य गणेश जी के दर्शनों के लिए गणेश मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इसी श्रद्धा भाव के साथ छोटी काशी में बुधवार को मोती डूंगरी स्थित गणेश मंदिर में हजारों श्रद्धालु पहुंचे।
भक्तों में श्रद्धा का भाव इस कदर देखने को मिला की सुबह 3.15 से ही मंगला आरती के साथ ही गणेश मंदिर में दर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया। मदिंर 'जय गणेश देवा..' के जयकारों से गूंजने लगा। गणेशोत्सव शहर के प्रमुख मंदिर मोतीडूंगरी समेत अन्य मंदिरों में भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सुबह मंगला आरती हुई और विशेष पूजन का आयोजन हुआ। इसी के साथ श्रद्धालुओं ने गणेश दरबार में मत्था टेका। महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि आज दिनभर दर्शनों का सिलसिला जारी रहेगा। शाम को संध्या आरती और रात्रि में शयन आरती होगी।
खुशहाली की कामना
भक्तों ने गणपति को सिंदूर का चोला चढ़ाकर, गुड़धाणी व मोदक अर्पित कर खुशहाली की कामना की। भारी भीड़ के चलते दर्शनार्थियों के लिए मंदिर में आने-जाने के लिए लाइनें लगाइ गई है। श्रद्धालु को सैलाब गणेश मंदिर से लेकर रिजर्व बैंक, त्रिमूर्ति सर्कल और बिड़ला मंदिर तक देखने को मिला।
भगवान गजानन को मेहंदी अर्पित
शहर के मुख्य मोती डूंगरी गणेश मंदिर में मंगलवार शाम महंत कैलाश शर्मा के सान्निध्य में प्रभु को मेहंदी धारण करवाई गई। इससे पहले प्रभु के श्ृंगार के लिए सुबह 11 बजे से शाम 6.30 बजे तक पट मंगल रहे। प्रथम पूज्य को विशेष पोशाक धारण करवाई गई। प्रभु को स्वर्ण मुकुट धारण करवाकर चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया गया।
शाम को पट खुलते ही मंदिर परिसर भगवान गणेश के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। इस मौके पर भक्तों को मेहंदी का प्रसाद वितरित किया गया। भक्ति संध्या व जागरण सहित भव्य आतिशबाजी की छटा भी बिखरी। गढ़ गणेश मंदिर, चांदपोल स्थित परकोटे वाले गणेश मंदिर, ब्रह्मपुरी स्थित नहर के गणेश मंदिर, लाल डूंगरी गणेश मंदिर, श्वेत सिद्धि विनायक मंदिर, ध्वजाधीश गणेश मंदिर और बंगाली बाबा गणेश मंदिर में भी प्रथम पूज्य को मेहंदी अर्पित की गई।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर
अथर्ववेद के प्रथम श्लोक 'अथर्वशीर्ष' में की गई भगवान गणपति की व्याख्या के अनुसार 'एकदन्तं चतुर्हस्तं पाशमंकुश धारिणम्' के अनुरूप ही श्रीगणेशजी महाराज मोती डूंगरी मंदिर में विराजमान हैं। यहां श्रीगणेशजी महाराज एक दंत, चतुरहस्त, पाश और अकुंश धारण किए हुए मूषकध्वज के साथ विराजमान हैं। मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि भगवान का निज मंदिर रिद्धि-सिद्धि पत्नी स्वरूप और शुभ-लाभ पुत्र स्वरूप विराजमान हैं। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा को संवत 1818 में भाद्रपद शुक्ल गणेश चतुर्थी को मावली से यहां लाकर विराजमान किया गया था। यह आलेख मूषकजी के आसन के शिलालेख पर विद्यमान है।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर एक विशाल मंदिर का रूप ले चुका है। 10 साल बाद इस बार मंदिर के महराब को आधा किलो सोने से चमकाया गया है। अब तक मंदिर में सात किलो सोने का काम हो चुका है। मंदिर में हर 27वें दिन पुष्य नक्षत्र में गणेशजी के पंचामृत स्नान के बाद सिंदूरी चोला बदला जाता है और भगवान के वस्त्रस्वरूप चढ़ा हुआ रक्षा सूत्र भी भक्तों को वितरित किया जाता है।
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