"न चुनाव लडूंगा,न किसी पार्टी का प्रचार"
नई दिल्ली।
नई पार्टी बनाने को लेकर अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों के बीच मतभेद गहराने के बाद शनिवार को अरविंद केजरीवाल अन्ना से मिलने रालेगण सिद्धि पहुंचे। माना जा रहा है कि केजरीवाल ने एक राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की जरूरत से अवगत कराया। पर अन्ना ने फिर दो टूक कहा है कि न तो वे खुद चुनाव लड़ेंगे न ही किसी पार्टी का प्रचार करेंगे।
अगर कोई पार्टी बनाना चाहे तो उन्हें एतराज नहीं है। अन्ना से मुलाकात के बाद केजरीवाल के तेवर भी राजनीतिक पार्टी बनाने के मामले में ढीले नजर आए। केजरीवाल ने कहा कि वे एक बार फिर राजनीतिक पार्टी बनाने या न बनाने की बात को लेकर जनता के बीच जाएंगे। जनता की राय के अनुरूप ही आगे की योजना तय की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि अन्ना हजारे अरविंज केजरीवाल के पार्टी बनाने के विकल्प के खिलाफ हैं। अन्ना ने कहा कि अरविंद और उनके सहयोगी अगर चुनाव लड़ते हैं तो वो उनके लिए प्रचार नहीं करेंगे। अन्ना आंदोलन के जरिए सिर्फ जनता को जगाने के पक्ष में हैं,जिससे जनता योग्य उम्मीदवारों को चुनकर संसद और विधानसभाओं में भेज सके।
अन्ना ने माना,अरविंद-बेदी में मतभेद
दरअसल जंतर-मंतर का आंदोलन खत्म होने के बाद से ही अन्ना विरोधाभासी बयान देते रहे हैं। गुरूवार को जारी अपने बयान में अन्ना ने साफ तौर पर पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने का विरोध किया। कोयला आवंटन पर अरविंद के घेराव आंदोलन पर किरण और अरविंद के बीच मतभेद उभर कर सामने भी आ गए। अन्ना ने भी माना कि दोनों में इस बात पर मतभेद है, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि इस मतभेद को मिल बैठ कर सुलझा लिया जाएगा।
90 फीसदी मतदान करने की अपील
अन्ना ने युवाओं से चुनावों में 90 फीसदी से ज्यादा मतदान सुनिश्चित करने की भी अपील की। खासतौर पर महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ताओं को लक्ष्य करके की गई अपील में हजारे ने कहा, "कोई पार्टी बनाने या चुनाव लड़ने की जरूरत नहीं है बल्कि लोगों को एक विकल्प देने की आवश्यकता है।" "केवल जनता के पास बदलाव लाने की शक्ति है और हमें उन्हें जागरूक करने का काम अपने हाथों में लेना है। मतदाताओं को विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में सही उम्मीदवारों को चुनना चाहिए।" उन्होंने कहा कि देशभर से करीब 4,000 कार्यकर्ता इसके लिए आगे आए हैं और महाराष्ट्र से भी राष्ट्रीय और सामाजिक दृष्टि रखने वाले कार्यकर्ताओं की जरूरत है।
नई रणनीति में छह बिंदु शामिल
हजारे ने कहा, "एक बात जिसे बड़ी शिद्दत से महसूस किया गया, वह यह है कि यदि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन शिकायतों के अध्ययन तक सीमित रहा और कुछेक लोगों को ही न्याय मिलता रहा तो इस आंदोलन और एक शिकायत निवारण केंद्र में कोई फर्क नहीं रह जाएगा।"बदलाव के छह बिंदु अपनी नई रणनीति में हजारे ने छह बिंदुओं पर काम करने का प्रस्ताव रखा है। पहला "साफ-सुथरी" छवि के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करना, दूसरा-उम्मीदवार को खारिज करने का अधिकार प्राप्त करने के लिए दबाव बनाना, तीसरा- ग्राम सभाओं के लिए और अधिकारों की मांग करना, चौथा- सिटीजन चार्टर, पांचवां- सरकारी कामकाज में लेटलतीफी खत्म करना और छठा- पुलिस को लोकपाल या लोकायुक्त के मातहत लाना।
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