टला यूपीए का संकट,सपा करेगी सपोर्ट 
नई दिल्ली। 
तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद संकट में घिरी यूपीए सरकार को उस वक्त बड़ी राहत मिली जब समाजवादी पार्टी ने ऎलान कर दिया कि वह सरकार का समर्थन करती रहेगी। 
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने कहा कि साम्प्रदायिक ताकतों को सत्ता में आने से रोकने के लिए उनकी पार्टी यूपीए का समर्थन करती रहेगी। गौरतलब है कि 2008 में जब अमरीका से परमाणु करार के मुद्दे पर वाम दलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था तो सपा ने सरकार की बाकी ढ़ाई साल के लिए नैया पार लगा दी थी। 

साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए समर्थन

सपा यूपीए सरकार को फिलहाल बाहर से समर्थन दे रही है। गौरतलब है कि सपा भी डीजल के दाम में बढ़ोतरी और रिटेल में एफडीआई के खिलाफ है। गुरूवार को बुलाए गए भारत बंद में सपा भी शामिल हुई थी। मुलायम ने कहा कि हमारा समर्थन साफ है। हम साम्प्रदायिक ताकतों को सत्ता में नहीं आने देना चाहते। हम सरकार में शामिल नहीं हैं।हम इसलिए समर्थन दे रहे हैं ताकि साम्प्रदायिक ताकतें मजबूत न हों। 

मुलायम ने कहा कि हम एफडीआई और डीजल की कीमत में वृद्धि का विरोध करना जारी रखेंगे। हम लोकसभा में भी इसका विरोध करेंगे क्योंकि इससे पांच करोड़ लोग प्रभावित होंगे। मध्यावधि चुनाव की संभावनाओं के बारे में पूछने पर यादव ने कहा कि मध्यावधि चुनाव का प्रश्न ही कहां उठता है। कांग्रेस से जाकर पूछो कि वे क्या चाहते हैं और वे सरकार चलाना चाहते हैं या नहीं। मुलायम ने कहा कि तीसरे मोर्चे का गठन अगले चुनाव के बाद ही होगा। 

ये है आंकड़ों का खेल

तृणमूल कांग्रेस के यूपीए से समर्थन वापस लेने के बाद लोकसभा में यूपीए की संख्या 273 से घटकर 254 रह गई थी। सपा और बसपा के बाहर से समर्थन देने के कारण 545 में से यूपीए की संख्या 300 से ज्यादा हो गई है। सपा के 22 और बसपा के 21 सांसद हैं। सामान्य बहुतम के लिए सरकार को 272 सांसदों की जरूरत होती है। 


दूसरी बार मुलायम की पलटी

राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जब तृणमूल कांग्रेस ने जब यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन करने से इनकार कर दिया था तो मुलायम भी ममता के साथ हो गए थे। बाद में वह अपने वादे से मुकर गए और प्रणब को समर्थन का ऎलान कर दिया। मुलामय के पलट जाने से ममता को तगड़ा झटका लगा था। इसके बाद मजबूरी में ममता को भी प्रणब का समर्थन करना पड़ा था।

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