अब ममता के फैसले का इंतजार 
नई दिल्ली। 
डीजल मूल्य वृद्धि,रसोई गैस के सिलेण्डरों पर दी जा रही सब्सिडी में कटौती और बहुब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर यूपीए की प्रमुख सहयोगी तृणमूल कांग्रेस की संसदीय दल की बैठक खत्म हो गई है। बैठक में लिए गए फैसले के बारे पार्टी नेता कुछ देर में बताएंगे। मालूम हो कि केन्द्र सरकार से महंगाई बढ़ाने वाला फैसला वापस लेने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया था जिसकी मियाद मंगलवार को खत्म हो गई। 
यूपीए सरकार ने पिछले सप्ताह बहुब्रांड खुदरा कारोबार में 51 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी थी। सरकार ने डीजल मूल्य भी प्रतिलीटर पांच रूपए बढ़ा दिया। इसके अलावा साल में रियायती दर पर रसोई गैस की संख्या घटाकर छह कर दी थी।

टीएमसी के पास तीन विकल्प

केन्द्रीय पर्यटन राज्यमंत्री सुल्तान अहमद ने कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ममता बनर्जी से लगातार संपर्क साधे हुए है। उन्होंने कहा कि पार्टी तीन विकल्पों पर विचार कर सकती है। पहला अपने मंत्रियों को वापस बुला ले और सरकार को बाहर से समर्थन दें। सरकार से समर्थन वापस ले लें। या मंत्री अपने दफ्तर न जाएं और काम का बहिष्कार करें। 

ममता की मुश्किल 

फिलहाल केंद्र के सामने तृणमूल के विकल्प के रूप में सपा और बसपा हैं। इनके पास ममता से अधिक सांसद हैं। ऎसे में ममता के यूपीए से बाहर होते ही दूसरे क्षेत्रीय दल यूपीए के कुनबे में शामिल हो सकते हैं। संभवत: असुरक्षा का यही भाव ममता को उनके "कठोर फैसला" लेने के मार्ग से डगमगा रहा है। ममता देश को यह संदेश देना चाहती हैं कि उनके दबाव से ही केन्द्र सरकार अपने फैसले को रोल बैक करती है। 

कुछ भी रोलबैक नहीं होगा

केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि सरकार डीजल मूल्य वृद्धि और बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के फैसले को वापस नहीं लेगी। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वामपंथी दल अपने-अपने सहयोगियों के साथ 20 सितम्बर को आहूत बंद की तैयारियों में लगे हुए हैं। इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी, केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम, केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के साथ पार्टी की रणनीति पर चर्चा की। 

सरकार पर कोई संकट नहीं

चिदम्बरम ने कहा है कि पिछले सप्ताह के फैसले से सरकार के सामने अस्तित्व का कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अपने सहयोगियों को यह समझाने में सफल होंगे कि जो हमने किया है, वह अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अच्छा है। 

हमारी मजबूरी को समझेंगे सहयोगी

कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि सरकार अपने सहयोगियों से वार्ता कर रही है और उम्मीद है कि दोनों पक्ष एक दूसरे की मजबूरियां समझेंगे। उन्होंने साफ संकेत दिया कि कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस को पटरी पर लाने के प्रयास में लगी हुई है। हम उनकी मजबूरियों 
की सराहना करते हैं।

ममता के सामने नहीं टेकेंगे घुटने

उधर, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने एफडीआई के मसले पर संप्रग सरकार तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के सामने घुटने नहीं टेकेगी। मोइली ने कहा कि यह किसी के घुटने टेकने या नहीं टेकने का सवाल नहीं रह गया है। हम लोकतंत्र के साथ जी रहे हैं और अब हमें कोई नहीं रोक सकता। एफडीआई का फैसला बहुत बड़ा फैसला है। यह देश की पूरी आर्थिक स्थिति को बदल देगा।

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