पीएम बोले,पैसा पेड़ों पर नहीं उगता 
नई दिल्ली। 
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा हाल में आर्थिक सुधारों पर लिए गए निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि देश-विदेश में निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने के लिए कड़े निर्णय लेने जरूरी थे। डॉ. सिंह ने सख्त अंदाज में कहा कि पैसा पेड़ों पर नहीं लगता। समय पर डीजल के दाम नहीं बढ़ाते तो सब्सिडी का बोझ बढ़कर दो लाख करोड़ रूपए हो जाता। इतना पैसा कहां से लाते।

17 रूपए बढ़ाने थे 5 ही बढ़ाए
वित्तीय घटा कम करने के लिए डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी थी। यह बढ़ोतरी 17 रूपए प्रति लीटर तक बढ़ना चाहिए थी। लेकिन सरकार ने सिर्फ पांच रूपए ही बढ़ाए। भारी मात्रा में डीजल का उपयोग बड़ी कारों और स्पोट्üस यूटिलिटी वाहनों द्वारा किया जाता है, जो अमीर लोग या कम्पनियों के पास होता है। क्या सरकार को उन्हें रियायत देकर भारी वित्तीय घाटा वहन करना चाहिए।

विपक्ष पर बरगलाने का आरोप
शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार से समर्थन वापसी का पत्र राष्ट्रपति को सौंपने के बाद उन्होंने देशवासियों को सम्बोधित करते हुए विपक्ष पर देश को बरगलाने का आरोप लगाया और लोगों से अनुरोध किया कि उन्हें उनके नेतृत्व में विश्वास रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि कड़े निर्णयों का समय आ चुका है। इसके लिए मुझे आपके भरोसे, आपकी समझ एवं आपके सहयोग की जरूरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के लिए कड़े फैसले लेना जरूरी हो गया था। 

दिलाई 1991 की याद
प्रधानमंत्री ने वर्तमान परिस्थितियों की तुलना 1991 से की, जब देश ने आर्थिक सुधार शुरू किए थे। हम ऎसी जगह पर हैं, जब अपनी विकास दर के धीमापन को उलट सकते हैं। हाल ही में लिए गए निर्णय इसके लिए बहुत ही जरूरी थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1991 में कोई भी भारत को ऋण देना नहीं चाहता था। आज हम उस दौर से नहीं गुजर रहे हैं। लेकिन लोगों का भरोसा हमारी अर्थव्यवस्था में खत्म हो, इससे पहले हमें अवश्य कार्रवाई करनी चाहिए।

एफडीआई की वकालत
प्रधानमंत्री ने उस आशंका को खारिज कर दिया कि मल्टीब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि संगठित रीटेल चेन पहले से ही हमारे देश में मौजूद हैं। छोटे व्यापारियों के सफाए की आशंका पूरी तरह आधारहीन है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

डीजल-रसोई गैस अन्य देशों से सस्ता
मनमोहन सिंह ने कहा कि डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हाल की वृद्धि के बाद भी देश में इसकी कीमत पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों से कम है। पेट्रोलियम उत्पादों पर कुल रियायत अब भी 160 हजार करोड़ रूपए होगा। यह स्वास्थ्य और शिक्षा पर संयुक्त रूप से होने वाले खर्च से अधिक है। हमने कीमतों को और इसलिए नहीं बढ़ाया, क्योंकि मुझे उम्मीद है कि तेल की कीमत घटेंगी।

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
HAFTE KI BAAT © 2013-14. All Rights Reserved.
Top