एफडीआई के विरोध में 20 को भारत बंद 
नई दिल्ली। 
बहु खुदरा कारोबार में विदेशी कंपनियों को इजाजत देने तथा डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में व्यापारियों ने 20 सितम्बर को भारत बंद का आह्वान किया है। अखिल भारतीय व्यापार परिसंघ (कैट) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन खंडेलवाल और भारत उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्रा ने शनिवार को यहां कहा कि देशभर में फैले करीब पांच करोड़ व्यापारी और इनसे जुडे दस हजार से अधिक व्यापारिक संगठन शामिल होंगे। पहले 18 सितंबर को बंद का आह्वान किया गया था।दोनों नेताओं ने दावा किया कि 20 सितम्बर को देश में कारोबार पूरी तरह बंद रहेगा। नेशनल हार्क्स फैडरेशन समेत अन्य संगठनों ने भी बंद को समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार ने व्यापारियों सहित खुदरा कारोबार से जुडे अन्य वर्गो से कतई चर्चा नहीं की जबकि संसद के पिछले सत्र में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आश्वासन दिया था कि इस मुद्दे परआम सहमति बनाने के बाद ही कोई निर्णय किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले से देश के छोटे व्यापारी, किसान और उपभोक्ताओं को कोई फायदा नहीं होने वाला है। विदेशी कंपनियां मुनाफा कमाने के उद्देश्य से भारत आएंगी और एक बार अपना अधिकार जमा लेने के बाद उपभोक्ताओं एवं किसानों का शोषण करेंगी। गौरतलब है कि सरकार ने देश के छह लाख करोड़ रूपए के खुदरा कारोबार में विदेशी व्यापारियों की हिस्सेदारी का शुक्रवार को फैसला किया। इस फैसले का सरकार को सहयोग दे रही तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दल, एवं कई अन्य दलों ने बड़ा विरोध किया है।
व्यापारी नेताओं ने कहा कि सरकार ने संसद की स्थायी समिति की सर्वसम्मत सिफारिशों को भी पूरी तरह से नजरदांज किया है। सरकार का यह फैसला देश की अर्थव्यवस्था और खुदरा कारोबार पर विपरीत असर डालेगा। इससे न केवल व्यापारी बल्कि किसान,ट्रांसपोर्टर,मजदूर और खुदरा कारोबार से जुड़े अन्य वर्ग भी बुरी तरह प्रभावित होंगे और बेरोजगारी, महंगाई बढ़ेगी। बहुराष्ट्रीय कंपनियां खुदरा कारोबार पर कब्जा जमाने का कोई भी मौका नहीं छोडेंगी जैसा कि उन्होंने अमरीका,आस्ट्रेलिया तथा कई यूरोपीय देशों सहित अन्य देशों में किया है।
खंडेलवाल ने कहा कि देशभर के प्रमुख व्यापारी नेताओं का उत्तरप्रदेश के वृन्दावन में 21 सितंबर को सम्मेलन आहूत किया गया है और इसमें एफडीआई के खिलाफ आगे की लड़ाई की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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