पगड़ी बांध बदली परम्परा 
बूंदी।
भारतीय परम्परानुसार पिता की मौत के बाद पुत्र को ही पगड़ी बांधी जाती है, लेकिन रविवार को हिण्डोली के अशोक नगर के पास बीचड़ी फार्म में बेटी त्रिशला ने परम्परा को बदल दिया। उसने पिता की मृत्यु के बाद स्वयं पगड़ी बांधने की रस्म अदा की। सम्भवत: यह पहला मामला है, जिसमें बेटी के पगड़ी बांधी गई है।
jaipurत्रिशला बेंगलूरू की फ्रोस्ट एंड सालेवन में रिसर्च एनालिस्ट हैं। पिता रामसिंह धाभाई की मौत के बाद उसने ही मुखाग्नि देने के साथ 12 दिनों के क्रियाकर्म भी किए। रविवार को 12वें के दिन त्रिशला ने पगड़ी बांधकर पिता के उत्तराघिकारी का जिम्मा लिया। बेटी को पगड़ी बांधने की रस्म का दस्तूर मां अमृता सिंह ने निभाया। शुरूआत में इस निर्णय का समाज और रिश्तेदारों ने विरोध किया, लेकिन न मां अपने निर्णय से बदली और न ही बेटियां। नई शुरूआत के लिए उन्होंने पुलिस और प्रशासन की भी मदद ली। प्रशासन ने बाद में रिश्तेदारों को पाबंद कराया।
त्रिशला की मां अमृता सिंह का कहना है कि बेटा और बेटी को बराबर समझने की बात करते हैं तो बेटा नहीं होने पर रस्म बेटी को ही निभाना था। समाज और रिश्तेदारों ने भले ही इसका विरोध किया, शुरूआत कहीं से तो होनी हैं। लड़कियां देश चला सकती है तो पिता की जिम्मेदारी बेटी को क्यों नहीं संभाल सकती?

खेती करने आए बूंदी
मृतक रामसिंह की पत्नी अमृता सिंह गोवा की एक होटल में मैनेजर हैं। रामसिंह भी गोवा की एक होटल में मैनेजर थे। जब तीनों भाइयों के बीच जमीन का बंटवारा हुआ तो रामसिंह खेती के लिए गांव आकर रहने लगे। दूसरी बेटी तशीना कम्प्यूटर इंजीनियर व प्रोफेशनल फोटोग्राफर है। तीसरी बेटी तारिनी जर्मनी से पीएचडी कर रही है।

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