"मन" की परीक्षा, याद आई पुरानी टीम 
नई दिल्ली। 
वित्त मंत्री के रूप में आर्थिक उदारीकरण प्रारंभ करने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाकर उसे तीव्र गति देने के लिए अपने पुराने सहयोगियों को सक्रिय कर दिया है।
नब्बे के दशक में जब डा. सिंह ने वित्त मंत्री रूप के आर्थिक उदारीकरण की शुरूआत की थी उस दौर में उनके सहयोगी रहे अर्थशाçस्त्रयों को उन्होंने फिर से देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में मदद करने के लिए लगाया है। प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मनोनीत किए जाने की वजह से वित्त मंत्री के पद से उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री ने यह महत्वपूर्ण मंत्रालय एक बार फिर स्वयं संभाला है। 
डॉ. सिंह ने वित्त मंत्रालय का प्रभार लेने के पहले दिन योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलूवालिया, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन और प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पुलक चटर्जी के साथ आर्थिक स्थिति, रूपए में आ रही गिरावट बढ़ती महंगाई और निवेश धारणा मजबूत बनाने पर चर्चा की। 
इसके साथ ही उन्होंने वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु, वित्त सचिव आर एस गुजराल, आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव आर गोपालन, वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव डी के मित्तल, व्यय सचिव सुमित बोस और विनिवेश सचिव हलीम खान के साथ अर्थव्यवस्था पर विचार विमर्श किया। प्रधानमंत्री ने इन अधिकारियों ने कहा कि कुछ ऎसे मसले हैं जिनका यथाशीघ्र समाधान किए जाने की आवश्यकता है जबकि कुछ के दीर्घकालिक स्तर पर हल किया जाना है। 
उन्होंने कहा कि ऎसे संकेत तत्काल जाने चाहिए कि हम व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। हमे तत्काल पहल करने की जरूरत है। सब हमारी ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।

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