प्रतिबंध के बाद निकली सूचियां 
जयपुर। 
state newsतबादलों पर प्रतिबंध लगने के बाद शुक्रवार को शिक्षा, चिकित्सा सहित कई विभागों ने बैक डेट में हजारों की संख्या में सूचियां जारी कीं। सबसे बड़े स्तर पर चिकित्सा विभाग में 6000 से अधिक तथा शिक्षा विभाग में 4500 से अधिक कर्मचारियों को इधर-उधर किया। शिक्षा में करीब आधे आदेश ऎन वक्त पर रोके गए। सूचियों में सैकड़ों वे कर्मचारी भी शामिल हैं जिनके लिए डिजायर नहीं की थी। ऎसे कर्मचारियों के तबादले प्रशासनिक से आदेश हुए हैं, इससे सरकार पर करोड़ों का बोझ पड़ेगा।
प्रतिबंध के बावजूद कर्मचारियों में तबादलों को लेकर हलचल रही। दिनभर प्रतिबंध अवघि बढ़ाने की भी चर्चाएं रहीं, लेकिन ऎसे कोई आदेश नहीं आए। तबादलों की जानकारी के लिए शुक्रवार को कर्मचारी संबंधित विभागों व निदेशालयों से सम्पर्क में रहे। शिक्षा विभाग में करीब 4500 शिक्षकों (माध्यमिक) के तबादले हुए। सूत्रों ने बताया कि शिक्षकों के लगभग आधे तय तबादले फिलहाल रूक गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग के 332 व्याख्याताओं, 504 प्रधानाध्यापक व 270 प्रधानाचार्य की तबादला सूचियां जारी हुई।
इधर, चिकित्सा विभाग में शुक्रवार तक लगभग 5200 नर्स-कम्पाउंडर व अन्य चिकित्सा कर्मियों और 952 चिकित्सकों के तबादले हो गए। इनमें करीब 3 हजार तबादले प्रशासनिक आदेश से हुए हैं, जिन्हें नए पदस्थापन के लिए भत्ते व सुविधाएं मिलेंगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 25 मेडिकल शिक्षकों की सूची जारी की। राजस्व मंडल ने 278 पटवारियों को इधर-उधर किया। वन विभाग में 37 तकनीकी कर्मचारियों के साथ 40 से अधिक कर्मचारियों के तबादले किए।
संतुलित रहे हैं शिक्षकों के तबादले
शिक्षा विभाग का दावा है कि शिक्षकों के तबादले संतुलित ढंग से किए गए हैं। इस बात का ध्यान रखा गया है कि किसी स्कूल में किसी भी विषय विशेष के शिक्षक का पद खाली नहीं रहे। किसी स्कूल से किसी विषय के अध्यापक ने उचित कारणों से भी तबादला चाहा, तब भी उसका तबादला नहीं किया गया है क्योंकि स्कूल में उस विषय का पद खाली नहीं करना है। कुछ शिक्षकों के तबादले इसलिए भी रोक दिए गए, क्योंकि विकल्प सही नहीं थे।
...और यहां दिखी खींचतान
जयपुर. पीएचक्यू व कमिश्नरेट की खींचतान अब साफ दिखने लगी है। इसकी झलक एक दिन पहले जारी हुई तबादला सूची में दिखी। एक साथ इतने तबादले और उनमें भी जिन अधिकारियों को शामिल किया है वह चर्चा का विषय है। कमिश्नरेट से 45 निरीक्षकों को हटाया है। इसमें वर्ग विशेष के आधा दर्जन से अधिक हैं, सूची आने से पहले ये निरीक्षक अपने मुताबिक थाना पाने की कोशिश में लगे थे। कार्यालयों में लगे निरीक्षकों को भी बाहर कर दिया गया। इसके पीछे मुख्यालय व कमिश्नरेट की खींचतान बताई जा रही है। यहां आने वाले निरीक्षकों को देखते हुए भी ऎसा ही महसूस हो रहा है। सीआईडी से एक साथ इतने निरीक्षक संभवत: पहली बार शहर में तैनात किए जा रहे हैं। शहर में जिन्हें तैनात किया गया है, उनमें ऎसे अधिकारियों की संख्या अधिक है, जो पहली बार जयपुर आए हैं।
दागी निरीक्षकों की संख्या ज्यादा!
तबादला सूची में इस बार विशेष टिप्पणी की गई है कि जिनकी 16 सीसीए की जांच विचाराधीन है उन्हें फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जाएगी। इस टिप्पणी से लगता है लिस्ट में ऎसे अधिकारियों की संख्या अधिक है।
खान विभाग में तबादले 14 जून से
खान विभाग में 14 से 30 जून तक तबादले होंगे। हालांकि राज्य सरकार की ओर से सभी विभागों के लिए तबादले की अंतिम तिथि 31 मई थी। लेकिन अवैध खनन के खिलाफ पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे अभियान के मद्देनजर खान विभाग में तबादले के लिए राज्य सरकार ने अलग समयावघि तय की है। ताकि बीच में अघिकारी-कर्मचारियों के तबादले से अभियान प्रभावित नहीं हों। यह अभियान 23 अप्रेल से शुरू हुआ था जो कि 15 जून तक चलेगा।
हमसे पूछा ही नहीं-नागर
पंचायत राज विभाग के तहत हस्तांतरित किए गए किसी भी विभाग ने तबादले (खासकर नर्सिग कर्मियों के) पंचायत समितियों या जिला परिषदों को पूछ कर नहीं किए। यहां तक कि खुद पंचायत राज विभाग ने भी तबादले जिला प्रमुखों या मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से बिना इजाजत या बिना सूचना दिए ही कर दिए। जयपुर के जिला प्रमुख हजारी लाल नागर का कहना है कि पंचायत राज की मजबूती के लिहाज से अगर तबादले जिला परिषदों से इजाजत लेकर किए जाते तो ज्यादा बेहतर रहता।
अवधि बढ़ाई तो आदेश जारी करेंगे
तबादलों की अवधि बढ़ाने या नहीं बढ़ाने का निर्णय करने के लिए जो फाइल राज्य सरकार के पास भेजी गई थी, वह बिना किसी निर्देश के शुक्रवार को वापस आ गई है। अगर तबादलों की अवधि बढ़ाई जाएगी, तो इस बारे में आदेश जारी किए जाएंगे।' 
आर. पी. जैन, प्रमुख सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग

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