ग्रीन राजस्थान अभियान में युवा पीढ़ी अग्रणी बने - राज्यपाल 
जयपुर, 
राज्यपाल श्रीमती मागेर््रट आल्वा ने राज्य में पर्यावरण की रक्षा तथा स्थाई विकास को सुनिश्चित करने े लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरण अभियान चलाने की आवश्यकता बताई और कहा कि ‘‘ग्रीन राजस्थान‘‘ हमारा नारा हो और युवा पीढ़ी इस अभियान े अग्रणी बनें। 
राज्यपाल गुरुवार को प्रातः महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय े नवनिर्मित पर्यावरण विभाग े चरक भवन तथा स्वास्थ्य ेन्द्र े रूप में धन्वंतरि आरोग्य भवन े लोकार्पण करने े पश्चात आयोजित समारोह को सम्बोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कार्बन उत्सर्जन े क्षेत्र में कमी लाने े व्यापक प्रयास किये हैं और अब तक 1.97 लाख सर्टीफाइड ऐमिशन रिडेक्शन अर्जित किये हैं। 
उन्होंने राजस्थान की वर्तमान स्थिति की तरफ सभी का ध्यान दिलाते हुए कहा कि एक ओर इंदिरा गांधी नहर े बनने े पश्चात आस-पास े रेतीले क्षेत्र में आई हरियाली, उन्नत कृषि तथा जल स्तर में हुआ विकास जग जाहिर है, वहीं दूसरी ओर अनेक प्रयास करने े बावजूद 12 जिलों से गुजर रही अरावली पर्वत श्रंृखला अंधाधुन्ध खनन से सूनी नजर आ रही है, जो जलवायु और रहवासी बस्तियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। यह राजस्थान े उत्तरी पूर्वी क्षेत्र की स्थिति है। इससे भूमिगत जल स्तर नीचे जा रहा है और अब छोटे पहाड़ नजर आने लगे हैं। क्या हम इस विपदा को चुपचाप देख सकते हैं ? 
राज्यपाल ने कृषि उत्पादन े संबंध में चर्चा करते हुए कृषि प्रयोगशाला और खेतों में हो रहे उत्पादन े परिणामों े बीच की दूरियों को तत्काल कम करने की आवश्यकता बताई और कहा कि यह आधुनिकतम तकनीक, कुशल, श्रम और सफल मॉडल्स े माध्यम से प्रभावी एक्सटेंशन कार्यक्रमों से ही संभव है। उन्होंने सुझाव दिया कि कृषि छात्रों को डिग्री से पूर्व एक वर्ष तक खेतों पर कृषि विस्तार सेवाओं पर अनिवार्य रूप से काम करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि काश्तकार कृषि उत्पादन को बढ़ाने े लिए नवीन तकनीक का सही तरीे से उपयोग करें तथा इस संबंध में अनुसंधान भी करें। 
उन्होंने 5 जून से प्रारम्भ हुए पर्यावरण पखवाड़े में इस विश्वविद्यालय में पर्यावरण भवन े लोकार्पण े प्रति प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण ही विश्व और जीवन को शास्वत रखने का स्त्रोत है और हमें भोजन, वस्त्र, छाया तथा जीवन े अन्य जरूरतमंद तत्व पानी, हवा और रोशनी उपलब्ध कराती है। औद्योगिकीकरण व शहरीकरण से प्राकृतिक पर्यावरण संतुलन बाधित होता है और इससे अस्थाई विकास में वृद्घि होती है। हमें विकास े लिए हर स्तर पर पर्यावरण की सुरक्षा करना जरूरी है। स्वयं सेवी संस्थाओं एवं नागरिकों को पर्यावरण मित्र े रूप में कार्य करते हुए इसी पर आधारित अपनी कार्यशैली और तकनीक को विकसित करना चाहिए। कोई भी शिक्षा तब तक अधूरी है जब तक वे आम नागरिक तक नही पहुंचे और पर्यावरण शिक्षा सबसे अहम है। सवोर्च्च न्यायालय ने स्कूल और महाविद्यालयों में पर्यावरण शिक्षा को विषय े रूप में सिम्मलित करने े आदेश दिये हैं। अब सभी संस्थाओं, होटल, चिकित्सालय, उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एवं सभी संगठन को आई.एस.ओ. प्रमाण पत्र लेना जरूरी हो गया है। राजमार्ग और रेल्वे को भी अपनी प्रमुख योजना शुरू करने से पूर्व उसे पर्यावरण प्रभाव को देखना जरूरी है। 
राज्यपाल ने कहा कि हाल ही में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। 1972 में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी एक मात्र राष्ट्र की प्रधानमंत्री थी, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को पर्यावरण जन-जागरण े लिए सम्बोधित किया। हमें पर्यावरण रिस्क व इसे संतुलन में आने वाली बाधाओं को कम करने े प्रयास करने चाहिए। विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना भी आज हमारे लिए चुनौती और समस्या बन चुकी है। विश्व े कुछ क्षेत्र में भूखमरी और कुपोषण जैसी स्थिति है। कृषि क्षेत्र में वृद्घि बगैर देश की आर्थिक वृद्घि संभव नही है। आगामी वर्ष 2020 तक भारत को अपनी जनसंख्या को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने े लिए वर्तमान उत्पादन को दुगुना करना होगा। हमें काश्तकारों को अच्छा जीवन और उने उत्पादन की अच्छी कीमत देने े लिए चुनौतियों को पूरा करना होगा। उन्होंने काश्तकारों की बढ़ती हुई कृषि कीमत, पानी और भूमि े जल स्तर े कम होने पर भी चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि इस देश की 70 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और उनमें से 70 प्रतिशत गांवों में निवास करते हैं। कृषि का भविष्य हमारी युवा पीढ़ी को कृषि क्षेत्र से जोड़ने पर ही निर्भर रहेगा। कृषि की योजनाएं बनानी होंगी। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भी मुख्य भूमिका है। इसलिए नीतियों े निर्धारण में महिलाओं े हाथ मजबूत करने की आवश्यकता है। 
श्रीमती आल्वा ने कहा कि अजमेर प्रारम्भ से ही शिक्षा का ेन्द्र रहा है। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय इस परम्परा को कायम रखेगा और शिक्षा व अनुसंधान े क्षेत्र में अच्छे परिणाम देगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल का पदभार सम्भालने े पश्चात कुलाधिपति े रूप में यह पहला विश्वविद्यालय है जिसका उन्होंने अवलोकन किया । उन्होंने विश्वविद्यालय े 25 वर्ष पूर्ण हो जाने पर विश्वविद्यालय े सभी कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने मां सरस्वती े चित्र े सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारम्भ किया। 
समारोह की अध्यक्षता करते हुए महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय े कुलपति प्रोफेसर रूपसिंह बारहठ ने विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण े क्षेत्र में किये जा रहे अनूठे कार्य और अनुष्ठान े बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना हुए 25 वर्ष हो चुे हैं। विश्वविद्यालय इस वर्ष सिल्वर जुबली वर्ष मना रहा है। उन्होंने बताया कि यहां समाज की आवश्यकता को ध्यान में रखकर विभिन्न पाठ्यक्रम प्रारम्भ किये गये हैं, जिससे विश्वविद्यालय की एक अलग पहचान बनी है। उन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती े आदर्श और शिक्षा े क्षेत्र में किये गये अभूतपूर्व कार्यों की चर्चा की । 
उन्होंने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह शॉल व श्रीफल भी भेंट किया। कुल सचिव श्री किशोर कुमार ने आभार प्रकट किया। 
समारोह में मेयर श्री कमल बाकोलिया, नगर सुधार न्यास े अध्यक्ष श्री नरेन शाहनी भगत, विधायक श्री वासुदेव देवनानी व श्रीमती अनिता भदेल, राजस्थान लोक सेवा आयोग े अध्यक्ष प्रो. बी.एम.शर्मा, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोडर े अध्यक्ष डॉ. सुभाष गर्ग, संभागीय आयुक्त श्री अतुल शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक श्री अनिल पालीवाल, जिला कलक्टर श्रीमती मंजू राजपाल, पुलिस अधीक्षक श्री राजेश मीणा सहित विभिन्न शिक्षाविद मौजूद थे। 
राज्यपाल का अजमेर पहुंचने पर स्वागत 
राज्यपाल का इससे पहले अजमेर सकिर्ट हाउस पहुंचने पर स्वागत व अभिनन्दन किया गया। पुलिस की टुकड़ी ने उने सम्मान में गाडर ऑफ ऑनर दिया । श्रीमती आल्वा े साथ उने पति श्री निरंजन आल्वा भी यहां पहुंचे। 
राज्यपाल से सकिर्ट हाउस में राजस्थान लोक सेवा आयोग े अध्यक्ष प्रो. बी.एम.शर्मा तथा सभी सदस्यों ने मुलाकात की । सभी ने राज्यपाल का स्वागत किया। 
चुनरी ओढ़ाई और दस्तारबंदी की 
राज्यपाल श्रीमती मागेर््रट आल्वा को खादिम श्री मुकद्दस मोईनी ने ख्वाजा साहब की मजार से लाई चुनरी ओढ़ाई तथा उने पति श्री निरंजन आल्वा की दस्तारबंदी कर तबुरूर्ख भेंट किया। 

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