छात्रा को पीटता रहा छात्र और शिक्षक मुंह देखते रहे
ग्वालियर.
शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं के साथ मारपीट की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी के बाद बुधवार को माधव कॉलेज में बीकॉम अंतिम सेमेस्टर की एक छात्रा को छात्र ने जमकर पीटा।इस दौरान शिक्षक छात्रा को पिटता देखते रहे, लेकिन उसे बचाने नहीं आए। मारपीट की घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन ने आरोपी के खिलाफ यह कहकर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि छात्रा ने कोई शिकायत नहीं की है। मारपीट से छात्राएं दहशत में हैं।
माधव कॉलेज में सुबह 11 बजे बीकॉम अंतिम सेमेस्टर के छात्र प्रोजेक्ट फाइल जमा करने आए थे। इस बीच एक छात्र ने खाली क्लास रूम में एक छात्रा को पीटना शुरू कर दिया। छात्र को इस बात पर आपत्ति थी कि उसने किसी अन्य छात्र से दोस्ती क्यों की? छात्रा बचने के लिए क्लास रूम से बाहर भागी। छात्र भी उसके पीछे-पीछे दौड़ा और बाहर आकर फिर हाथ उठाने लगा।
इस बार छात्रा ने विरोध करते हुए कहा, ‘मैं किसी से भी दोस्ती करूं, तुम कौन होते हो मुझे रोकने वाले, मैं तुम्हारी गिरवी नहीं हूं।’ इस पर छात्र ने गुस्से में आकर उसे फिर पीटना शुरू किया। छात्रा लगातार विरोध करती रही लेकिन कमजोर होने के कारण खुद को नहीं बचा पा रही थी।
इस दौरान शिक्षक कमरों में बैठे-बैठे छात्रा को पिटता देखते रहे, लेकिन कोई बचाने नहीं आया। इस बीच कुछ छात्रों ने छात्र को दबोच लिया और उन्होंने छात्रा से प्राचार्य के पास चलकर शिकायत करने को कहा तो वह रोते हुए कॉलेज परिसर से बाहर निकल गई। इसके बाद आरोपी छात्र भी मौका पाकर भाग निकला। कॉलेज प्राचार्य डॉ. केके माहेश्वरी का कहना है कि मारपीट की कोई शिकायत नहीं आई है। छात्रा से शिकायत मिलने पर छात्र के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डरने के बजाय शिकायत करें
छात्र-छात्राओं में संस्कारों की कमी आई है। इस कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। ऐसी घटना होने पर छात्राओं को डरने के बजाय संबंधित संस्था के जिम्मेदार अधिकारी से शिकायत करनी चाहिए। यदि संस्था से उसे न्याय नहीं मिलता तो, वे महिला आयोग का दरवाजा खटखटाने के साथ पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत करें। तभी इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सकेगी।
अनुशासन समिति की है जिम्मेदारी
कॉलेज कैंपस में मारपीट करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार अनुशासन समिति के पास रहता है। माधव कॉलेज में छात्रा के साथ हुई मारपीट के मामले में छात्रों का कहना है कि अनुशासन समिति को शिकायत आने का इंतजार करने के बजाय खुद अपनी ओर से कार्रवाई करनी चाहिए।

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