"दोषी होने पर संन्यास नहीं, जेल जाएं पीएम" 

नई दिल्ली।
कोयला घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा खुद को बेगुनाह बताने और टीम अन्ना के आरोपों को बेबुनियाद तथा गैरजिम्मेदाराना करार दिए जाने के बाद टीम अन्ना खुलकर पीएम के सामने आ गई है। टीम अन्ना के मनीष सिसोदिया ने कहा कि पीएम दोषी साबित होने पर संन्यास लेने की बात की बजाय यह क्यों नहीं कहते ही जेल जाएंगे। प्रधानमंत्री इस मामले में जांच कराने से क्यों बच रहें हैं। क्या वे चाहते हैं कि घोटाला करने वाले राजनेता कानून के शिकंजे में आने की बजाय ता उम्र ऎशो आराम की जिंदगी जीते रहें।
पीएम को नींद कैसे आ जाती है
उधर, टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने पीएम पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए सवाल उठाया कि क्या पीएम और मंत्रियों द्वारा खुद यह कह देने की हम बेकसूर हैं आरोप मिट जाते हैं। केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी हम आपसे पूछना चाहते हैं कि देश के करोड़ों भूखे बच्चों के पिता होने के नाते आपको नींद कैसे आती है?
माना की प्रधानमंत्री ने खुद यह घोटाला नहीं किया पर जो कुछ हुआ उसके लिए वे जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं। क्या खुद प्रधानमंत्री सीएजी की रिपोर्ट को गलत कह सकते हैं? उन्होंने बगैर नीलामी के कोयला ब्लॉकस का आवंटन करा इससे 1.80 लाख करोड़ रूपए की हानी हुई। वे यह सब देखते रहे आखिर उन्होंने रॉयल्टी क्यों नहीं बढ़ाई ताकि इसे रोका जा सकता था। खदानों की नीलामी की सिफारिश खारिज क्यों की गई? इस सबके पीछे मंशा क्या थी?
आरोपी मंत्री तय करेंगे जांच हो या नहीं?
टीम अन्ना ने कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कानून मंत्री को क्या पता नहीं है सीएज कभी एफआईआर दर्ज नहीं करती, इसके लिए तो कानून हैं, कोर्ट है। अलग धाराएं हैं। क्या बिना मामला दर्ज कराए खुद को बेकसुर कह देने से सब मुक्त हो जाएंगे। देश में हालत यह हो गई है कि खुद आरोपी मंत्री ही तय करते हैं कि उनके खिलाफ जांच हो या नहीं। आखिर ऎसे मंत्रियों के खिलाफ कहां रिपोर्ट दर्ज कराएं। अगर लोकपाल कानून बन गया होता तो ये हालात नहीं होते।
पीएमओ की सफाई
टीम अन्ना के आरोपों पर बुधवार को सफाई देते हुए पीएमओ ने कहा है कि विकास के लिए कोयला आवंटन जरूरी है। 1993 से निजी कंपनियों को इसका आवंटन होता आ रहा है। इसे कभी राजस्व के जरिए के तौर पर नहीं माना गया। पहली बार 2004 में कोयला आवंटन नीलामी के जरिए किए जाने का प्रस्ताव आया तथा 2005 में कोयला आवंटन पर संशोधन प्रस्ताव रखा गया।

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