पैटर्न सीबीएसई, पैसा आरबीएसई
जयपुर। 
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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राज्य के हजारों शिक्षकों का हक मार रहा है। बोर्ड की नीतियों के चलते इस साल भी बोर्ड से जुड़े अध्यापकों को हजारों रूपयों की चपत लगने को है। दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाएं खत्म होने के बाद राजस्थान बोर्ड से ताल्लुक रखने वाले अध्यापकों ने कॉपियों तो चैक कर दी हैं, लेकिन सीबीएसई बोर्ड से ताल्लुक रखने वाले अध्यापकों की तुलना में मिलने वाले कम मेहनताने को लेकर शिक्षक परेशान हैं। इस बारे में शिक्षक संगठनों ने बोर्ड को लिखा भी है, लेकिन बोर्ड इस पर विचार करने के मूड़ में नहीं दिख रहा है। जबकि इस बार माध्यमिक शिक्षा विभाग अपनी कक्षाओं में सीबीएसई पैटर्न की पुस्तकें और परीक्षा पैटर्न भी सीबीएसई की तरह ही करने पर तैयारी कर रहा है।
दसवीं और बारहवीं के पैसे की पूरी गणित: इस समय राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दसवीं बोर्ड की कॉपियां चैक करने पर प्रति कॉपी नौ रूपए देता है और बारहवीं बोर्ड की कॉपियां चैक करने पर प्रति कॉपी दस रूपए देता है। इस साल राजस्थान बोर्ड की परीक्षाओं में 17 लाख से भी ज्यादा स्टूडेंट बैठे हैं। इनमें दसवीं और बारहवीं के छात्र शामिल हैं। 17 लाख से भी ज्यादा कॉपियां चैक करने का मेहनताना राजस्थान बोर्ड के अनुसार करीब साढ़े सोलह करोड़ रूपए बनता है। जबकि सीबीएसई बोर्ड से ताल्लुक रखने वाले अध्यापकों को राजस्थान बोर्ड की तुलना में दसवीं कक्षा की कॉपियां चैक करने की एवज में 12 रूपए मेहनताना और बारहवीं बोर्ड की कॉपियां चैक करने की एवज में 16 रूपए मेहनताना दिया जाता है। जो करीब आधे से भी ज्यादा है। 

शिक्षक संगठनों ने लिखा शिक्षा मंत्री और बोर्ड को

राजस्थान बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड में इतने बडे फर्क के बारे में राजस्थान बोर्ड से ताल्लुक रखने वाले शिक्षक संगठनों ने इस बार बोर्ड के अघिकारियों को लिखा है। साथ ही शिक्षा मंत्री से भी इस बारे में चर्चा की है, लेकिन इसके बाद भी संगठन के पदाघिकारियों को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं।

शिक्षा मंत्री को लिखा है
शिक्षा मंत्री और बोर्ड के अघिकारियों से इस बारे में कई बार चर्चा की है। मांग पत्र में इस बार भी फिर से शिक्षा मंत्री और बोर्ड के अघिकारियों को लिखा है। दोनों बोर्ड में कॉपी चैक करने के मेहनताने को लेकर काफी फर्क है। जो सरकार को कम करना चाहिए। यह शिक्षकों के हित के साथ ही छात्रों के हित में भी अच्छा कदम होगा। 
-रामकृष्ण अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षक संगठन, अरस्तू

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