बैशाखियों के सहारे जल वितरण

राजस्थान के बाड़मेर जिले के बालोतरा उपखड में बैशाखियों के सहारे चल रही शहर की जल वितरण व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश दूर की कौड़ी बन गई है। वस्त्र नगरी बालोतरा का शायद ही ऎसा कोई वार्ड है,जो इस समस्या से अछूता नहीं रहा हों। तमाम वार्डो में पानी को लेकर हाय तौबा मची हुई है। कुबेर नगरी कहे जाने वाले बालोतरा की सड़काें पर मीठा पानी सरेआम बिकता है। समस्या से बेहाल लोगों की मजबूरी है कि उन्हें पानी खरीद कर दैनिक जरूरते पूरी करनी पड़ती है। हालात यह है कि शहर में कहीं सप्ताह में एक बार तो कहीं दस दिन में या पखवाड़े में एकबार जलापूर्ति की जा रही है। कर्मचारियों की कमी और संसाधनों के टोटे का राग अलाप रहे जलदाय विभाग के लिए हालात बेलगाम हो गए हैं। नहरी पानी का कार्य हालांकि प्रगति पर है। इसके पूर्ण होने से पहले पानी की तंगी बीच गर्मियां गुजार पाना शहरवासियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। 
लगभग एक लाख से ज्यादा की आबादी वाले बालोतरा शहर में पेयजल की समस्या वर्षो से चल रही है। शहर की आबादी व विस्तार कई गुना बढ़ गया है। जलदाय विभाग की योजनाओं की संख्या में गुणात्मक बढ़ोतरी हो गई है,लेकिन आपूर्ति तंत्र के बिगड़े ढांचे में सुधार को लेकर अब तक कारगर प्रयास नहीं हो पाए हैं। अनियिमित व कम प्रेशर से जलापूर्ति की समस्या आम है। गर्मी की सीजन शुरू होते ही शहर में पेयजल संकट को लेकर कूक बढ़ने लगी है। लोगों को ट्रैक्टर टंकियों व जरीकेन मोल मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है।
जलदाय विभाग का दावा है कि हर चौथे दिन जलापूर्ति हो रही है,लेकिन जमीनी हकीकत इसे झूठला रही है। कहीं सप्ताह दस दिन में तो कहीं पखवाड़े में एक बार पानी पहुंच रहा है। मीठा पानी तो मिलेगा तब मिलेगा, फिलहाल हालात यह है कि खारा पानी भी समय पर नहीं मिल रहा है। नहरी पानी की योजना के जून माह तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। 
ये हैं हालात
बालोतरा के शहरी क्षेत्र में जल वितरण व्यवस्था के लिए बिठूजा में तेरह तथा किटनोद में दो टयूबवैल है। इनमें टीडीएस की मात्रा 4500 से 5000 हजार पीपीएम है। डिवीजन में 400 कार्मिकों के मुकाबले मात्र 95 कर्मचारी ही कार्यरत है। दशकों से नई भर्ती नहीं हुई है। शहरी क्षेत्र में ऎसे कई इलाके हैं जहां टेलेण्ड तक पानी नहीं पहुंच रहा है। 
मीठा पानी स्थाई हल
जलदाय विभाग द्वारा आपूर्त किया जा रहा पानी अधिक खारा व कसैला है। नहरी पानी योजना से जलापूर्ति ही समस्या का स्थाई हल है।
-श्रीमती सुमन छाजेड़, गृहणी
बदहाल है स्थिति
शहर में पानी की विकट समस्या चल रही है। एक तरफ गर्मी तथा दूसरी ओर पानी का टोटा मुसीबत से कम नहीं है। नहरी मीठा पानी तो दूर लोगों को समय पर खारा पानी मिल जाए तो गनीमत है।
-श्रीमती प्रभा सिंघवी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष 
कोढ़ में खाज है संकट
पानी की समस्या से जसोल की कई बस्तियों में लोगों का जीवन दुश्वार कर रखा है। खारा पानी भी समय पर नहीं मिल रहा। कम प्रेशर के कारण दैनिक जरूरतों योग्य पानी भी नहीं मिल पाता।
-ईश्वरसिंह चौहान, पूर्व सरपंच जसोल
सुनवाई नहीं हो रही
नगरपालिका की बैठकों मे कई बार आवाज उठाई। जलदाय विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करवाया,लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। शहर के वार्डो में पेयजल का संकट बड़ी परेशानी बना हुआ है।
-पुष्पराज चौपड़ा, पार्षद
बैठको में कागजी खानापूर्ति
सरकारी बैठकों में अधिकारी कागजी खानापूर्ति ही कर रहे हैं। गत माह बैठक में हुए निर्णय पर आज दिन तक अमल नहीं हो पाया है।
-नरेश ढेलडिया, उद्यमी

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
HAFTE KI BAAT © 2013-14. All Rights Reserved.
Top