फिल्म रिव्यू : हेट स्टोरी 
इस फिल्म का प्रोमो या ट्रेलर टीवी पर नहीं दिखाया जा सकता। वजह यह कि वह काफी बोल्ड है। दरअसल फिल्म ‘हेट स्टोरी’ एक इरॉटिक फिल्म है, इसीलिए यह फिल्म केवल वयस्कों के लिए है।ऐसी कुछ बातों के साथ इस फिल्म को पिछले काफी समय से प्रमोट किया जा रहा था, लेकिन फिल्म देख ऐसा लगता है कि निर्माता इस बात से बच भी सकते थे, क्योंकि जिस हिसाब से इस फिल्म में सेक्स दिखाया गया है, उस पर फिल्म की कहानी कहीं ज्यादा हावी दिखाई देती है। सेक्स इस फिल्म का एक अहम पहलू हो सकता है, लेकिन ऐसी जरूरत नहीं, जिसके बिना गुजारा ही न चल सके। विक्रम भट्ट द्वारा निर्मित और निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘हेट स्टोरी’ सत्तर और अस्सी के दशक की फिल्मों की याद दिलाती है। बदला लेने के लिए इच्छुक एक हसीना.., बेदर्द धोखेबाज और इन सब बातों के बीच एक असहाय प्रेमी..
बावजूद इसके ‘हेट स्टोरी’ की स्टोरी में एक ग्रिप है, जो फिल्म को अंत तक बांधे रखती है। फिल्म की कहानी एक रिपोर्टर काव्या (पाओली डाम) और उसके साथी विक्की (निखिल द्विवेदी) के स्टिंग ऑपरेशन से शुरु होती है। ये दोनों मिल कर इंफ्रा सीमेंट कंपनी की पोल खोल देते हैं, जिससे इस कंपनी का काफी नुकसान होता है। इस बात से इंफ्रा का एमडी सिद्धार्थ (गुलशन देवइया) काव्या से खिन्न हो उठता है और उसे मजा चखाने की सोचता है। वह उसे अपनी कंपनी में नौकरी देता है और उसके जिस्म का फायदा भी उठाता है। एक दिन वह काव्या को नौकरी से निकलवा देता है।
यही नहीं जब काव्या उसे बताती है कि वह उसके बच्चे की मां बनने वाली है तो वह उसका जबरदस्ती अबॉर्शन करवा देता है। बाद में काव्या को पता चलता है कि वह अब कभी मां नहीं बन सकेगी। काव्या अब अपना बदला लेने के लिए निकल पड़ती है। वह सबसे पहले खुद को एक पेशेवर कॉलगर्ल के रूप में स्थापित करने के लिए एक मशहूर कॉलगर्ल से ट्रेनिंग लेती है। इसके बाद वह इंफ्रा सीमेंट के एक आला अधिकारी पर अपने हुस्न का जादू चलाती है और उससे काफी राज उगलवा लेती है।
इससे सिद्धार्थ की कंपनी को काफी नुकसान होता है। वह पागल हो जाता है और गुस्से में अपने अधिकारी को मरवा देता है और इल्जाम काव्या पर डाल देता है। लेकिन काव्या इस मामले में एक मंत्री को भी घसीट लेती है और इंफ्रा सीमेंट की बैंकर बन जाती है। बेशक इस फिल्म की कहानी में कोई खास दम न दिखे, लेकिन निर्देशक ने सेक्स के एंगल को फिल्म में बखूबी इस्तेमाल किया है। खासतौर से इंटरवल के बाद।
फिल्म में सस्पेंस की वजह से एक गति- सी बनी रहती है। पूरी फिल्म काव्या और सिद्धार्थ के इर्द-गिर्द ही घूमती है। इस वजह से कहीं और दिमाग लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। फिल्म का एक प्लस प्वॉइंट गुलशन देवइया की एक्टिंग भी है। पाओली डाम ने अभिनय से ज्यादा एक्सपोज करने पर ध्यान दिया है, जिसमें उन्हें पूरे नंबर दिए जाने चाहिए। निखिल द्विवेदी पूरी फिल्म में एक असहाय प्रेमी की तरह दिखाई पड़ते हैं। उनके खाते में सिर्फ डायलॉगबाजी ही आती है, जो उन पर फबती भी नहीं।कुल मिला कर ‘हेट स्टोरी’ टाइम पास से थोड़ी अच्छी फिल्म है। थ्रिलर और सेक्स का संगम पसंद करने वालों को ही यह फिल्म पसंद आएगी, ऐसी उम्मीद बॉक्स ऑफिस के दिग्गजों ने जताई है। बाकी ये उम्मीदें कितनी पूरी होती हैं, यह तो वक्त ही बताएगा।

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