फिल्म समीक्षा: कुछ कमी सी है ‘एजेंट विनोद’ में
इस हफ्ते सैफ अली खान और करीना कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘एजेंट विनोद’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दी है।निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म ‘एजेंट विनोद’ में कुछ एक्शन दृश्य वाकई में बेहद दमदार लगते हैं, लेकिन एक जासूसी फिल्म का रोमांच पूरी तरह पैदा करने में फिल्म नाकाम ही रह जाती है।एक सूटकेस बम के गलत हाथों में पड़ जाने के खतरे को दूर करने की जिम्मेदारी एजेंट विनोद को सौंपी जाती है। ऐसी अफवाह है कि इस सूटकेस में जो सामग्री है, उसके जरिए हिरोशिमा जैसे किसी बड़े परमाणु हमले को अंजाम दिया जा सकता है। विनोद इसे रोकने के लिए खूंखार काज़न (प्रेम चोपड़ा) और उसके साथ काम कर रही रहस्यमय डॉ रुबी (करीना कपूर) तक पहुंचता है। लेकिन ऐसे समय डॉ रुबी पर लंदन धमाकों में शामिल होने का आरोप लगता है। रुबी मुश्किल घड़ी में एजेंट विनोद को मदद करने की इच्छा जाहिर करती है। लेकिन क्या वह सच में विनोद को मदद करना चाहती है? एजेंट विनोद का मिशन इन दोनों को रूस, मोरोक्को, पाकिस्तान से होते हुए आखिर में भारत तक लाता है। हर कदम पर धोखे, झूठ और पल-पल पर मिल रहे खतरे को देखते हुए एजेंट विनोद को बस सिर्फ अपने आप पर, अपनी क्षमताओं और अपने जमीर पर भरोसा करना उचित लगता है।
इसमें कोई शक नहीं है कि सैफ अली खान ने इस फिल्म में किसी भी खान (खासकर शाहरुख खान) से बेहतर काम किया है। आइटम गर्ल मल्लिका हेडन ने रूस के नाइटक्लब में दमदार आइटम नंबर किया है, जो कि प्लेयर्स की बिपाशा से बेहतर है। सच कहें तो करीना कपूर का मुजरा ‘दिल मेरा मुफ्त का’ से भी मल्लिका का आइटम नंबर सेक्सी लगा है।संवाद फिल्म को मजबूती प्रदान करने में नाकाम रहते हैं और फिल्म का गंभीर पक्ष कई बार दब जाता है। वैसे बम धमाके के एक दृश्य के दौरान इस समीक्षक को तो अपनी हंसी रोक पाना भी मुश्किल हो गया था।फिल्म एजेंट विनोद देखी जा सकती है, लेकिन जेम्स बॉन्ड जैसी हॉलीवुड फिल्म के एक्शन, कहानी, गति की अपेक्षा इस फिल्म से ना ही करें तो अच्छा है। फिल्म में कुछ दमदार दृश्य हैं, लेकिन यह फिल्म खतरनाक और सनसनीखेज कम लगती है, बल्कि भावनात्मक और रोमांटिक ज्यादा लगती है।

फिल्म: एजेंट विनोद
कलाकार: सैफ अली खान, करीना कपूर, प्रेम चोपड़ा, मल्लिका हेडन
निर्देशक: श्रीराम राघवन 

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