"ओबामा की हत्या की रची थी साजिश"
वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की हत्या की साजिश रचने के आरोपी उज्बेक मूल के निवासी ने यहां की एक अदालत के समक्ष अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। उलूगबेग कादीरोव ने शुक्रवार को अमरीका के अलाबामा प्रांत के बìमघंम की एक अदालत के समक्ष अपना जुर्म कबूल किया। कादीरोव ने अभियोजन पक्ष के साथ एक समझौते के तहत अपना जुर्म कुबूल किया जिसके बाद उसे आजीवन कारावास की सजा नहीं सुनाए जाने की संभावना है।
कादीरोव ने अदालत में स्वीकार किया कि वह अपने देश के एक इस्लामी आतंकवादी संगठन के इशारे पर काम कर रहा है। कादीरोव को इस मामले में तीस वर्ष जेल की सजा सुनाई जा सकती है और आतंकवादी गतिविधियों को मदद देने व अवैध तरीके से हथियार हासिल करने और राष्ट्रपति को कत्ल करने की धमकी देने के तीन आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।
कादीरोव पर लगाये गये चार आरोप वापस ले लिए गए हैं। इस मामले में अदालत 17 मई को अपना फैसला सुना सकती है। उल्लेखनीय है कि कादीरोव वर्ष 2009 में मेडिकल की पढ़ाई करने अमेरिका आया था। जब वह किसी भी अमेरिकी विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं ले पाया तो वर्ष 2010 में उसका छात्र वीजा खत्म हो गया। इस दौरान वह इंटरनेट के जरिये आतंकवादी समूहों के प्रभाव में आया और ओबामा की साजिश रचने वाले एक व्यक्ति से उसका संपर्क हुआ।
वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की हत्या की साजिश रचने के आरोपी उज्बेक मूल के निवासी ने यहां की एक अदालत के समक्ष अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। उलूगबेग कादीरोव ने शुक्रवार को अमरीका के अलाबामा प्रांत के बìमघंम की एक अदालत के समक्ष अपना जुर्म कबूल किया। कादीरोव ने अभियोजन पक्ष के साथ एक समझौते के तहत अपना जुर्म कुबूल किया जिसके बाद उसे आजीवन कारावास की सजा नहीं सुनाए जाने की संभावना है।
कादीरोव ने अदालत में स्वीकार किया कि वह अपने देश के एक इस्लामी आतंकवादी संगठन के इशारे पर काम कर रहा है। कादीरोव को इस मामले में तीस वर्ष जेल की सजा सुनाई जा सकती है और आतंकवादी गतिविधियों को मदद देने व अवैध तरीके से हथियार हासिल करने और राष्ट्रपति को कत्ल करने की धमकी देने के तीन आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।
कादीरोव पर लगाये गये चार आरोप वापस ले लिए गए हैं। इस मामले में अदालत 17 मई को अपना फैसला सुना सकती है। उल्लेखनीय है कि कादीरोव वर्ष 2009 में मेडिकल की पढ़ाई करने अमेरिका आया था। जब वह किसी भी अमेरिकी विश्वविद्यालय में दाखिला नहीं ले पाया तो वर्ष 2010 में उसका छात्र वीजा खत्म हो गया। इस दौरान वह इंटरनेट के जरिये आतंकवादी समूहों के प्रभाव में आया और ओबामा की साजिश रचने वाले एक व्यक्ति से उसका संपर्क हुआ।

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