उम्र पर 'जंग' में पीछे हटे जनरल, वापस ली अर्जी
नई दिल्ली. उम्र से जुड़े विवाद पर थल सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अर्जी वापस ले ली है। सेनाध्यक्ष की जन्मतिथि 1950 ही मानी जाएगी। जनरल सिंह ने कोर्ट के कहने पर अपनी अर्जी वापस लेने का फैसला किया। अदालत ने कहा कि जनरल की ओर से अर्जी वापस लेने के साथ ही अब यह मामला खत्म हो गया है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आज के फैसले का जनरल सिंह की वरिष्ठता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सेनाध्यक्ष के वकील ने इसे दोनों पक्षों की जीत करार दिया है। इससे पहले कोर्ट ने आज इस मामले पर सुनवाई करते हुए जनरल से पूछा था कि अगर यूपीएससी में रिकॉर्ड गलत दर्ज हो गया तो उसे उन्होंने सही क्यों नहीं करवाया। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि अगर वे अपनी अर्जी वापस नहीं लेते हैं तो अदालत फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने जनरल वीके सिंह की उम्र से जुड़े विवाद पर कोई फैसला सुनाने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में कोर्ट की तरफ से दखल देने का कोई तुक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और सेना प्रमुख आपस में बातचीत करके कोई फैसला लें। ऐसा नहीं हुआ तो अदालत फैसला सुनाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि न्यायिक पुनर्विचार में दिक्कतों को देखते हुए जनरल सिंह की उम्र पर सरकार का फैसला कायम रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, 'जनरल सिंह के खिलाफ किसी भी तरह का पूर्वाग्रह नहीं था और सरकार का उनमें पूरा भरोसा था।' सुप्रीम कोर्ट ने जनरल के वकील से यह भी कहा कि जनरल सिंह को साल 2008 और 2009 में दी गई चिट्ठियों का मान रखते हुए अपने वादे को निभाना चाहिए। इन चिट्ठियों में जनरल सिंह ने अपनी जन्मतिथि 10 मई, 1950 मानी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जनरल सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 माना जाना उनके साथ पूरी तरह से गलत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने सेनाध्यक्ष के वकील यू यू ललित से कहा, 'जन्मतिथि पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के दस्तावेज अंतिम माने जाने चाहिए। यूपीएससी के पास मौजूद दस्तावेज में जनरल वीके सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 दर्ज है।'
कोर्ट ने इससे पहले जनरल के वकील से कहा, 'जनरल सिंह की जन्मतिथि से जुड़ा प्राथमिक दस्तावेज यूपीएससी के पास था, जिसने उनकी जन्मतिथि कभी नहीं बदली। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो आप क्या करेंगे?'
नई दिल्ली. उम्र से जुड़े विवाद पर थल सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अर्जी वापस ले ली है। सेनाध्यक्ष की जन्मतिथि 1950 ही मानी जाएगी। जनरल सिंह ने कोर्ट के कहने पर अपनी अर्जी वापस लेने का फैसला किया। अदालत ने कहा कि जनरल की ओर से अर्जी वापस लेने के साथ ही अब यह मामला खत्म हो गया है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आज के फैसले का जनरल सिंह की वरिष्ठता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सेनाध्यक्ष के वकील ने इसे दोनों पक्षों की जीत करार दिया है। इससे पहले कोर्ट ने आज इस मामले पर सुनवाई करते हुए जनरल से पूछा था कि अगर यूपीएससी में रिकॉर्ड गलत दर्ज हो गया तो उसे उन्होंने सही क्यों नहीं करवाया। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि अगर वे अपनी अर्जी वापस नहीं लेते हैं तो अदालत फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने जनरल वीके सिंह की उम्र से जुड़े विवाद पर कोई फैसला सुनाने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में कोर्ट की तरफ से दखल देने का कोई तुक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार और सेना प्रमुख आपस में बातचीत करके कोई फैसला लें। ऐसा नहीं हुआ तो अदालत फैसला सुनाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि न्यायिक पुनर्विचार में दिक्कतों को देखते हुए जनरल सिंह की उम्र पर सरकार का फैसला कायम रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, 'जनरल सिंह के खिलाफ किसी भी तरह का पूर्वाग्रह नहीं था और सरकार का उनमें पूरा भरोसा था।' सुप्रीम कोर्ट ने जनरल के वकील से यह भी कहा कि जनरल सिंह को साल 2008 और 2009 में दी गई चिट्ठियों का मान रखते हुए अपने वादे को निभाना चाहिए। इन चिट्ठियों में जनरल सिंह ने अपनी जन्मतिथि 10 मई, 1950 मानी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जनरल सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 माना जाना उनके साथ पूरी तरह से गलत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने सेनाध्यक्ष के वकील यू यू ललित से कहा, 'जन्मतिथि पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के दस्तावेज अंतिम माने जाने चाहिए। यूपीएससी के पास मौजूद दस्तावेज में जनरल वीके सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 दर्ज है।'
कोर्ट ने इससे पहले जनरल के वकील से कहा, 'जनरल सिंह की जन्मतिथि से जुड़ा प्राथमिक दस्तावेज यूपीएससी के पास था, जिसने उनकी जन्मतिथि कभी नहीं बदली। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो आप क्या करेंगे?'
सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि वीके सिंह के आईएमए और एनडीए ज्वाइन करते समय के सभी रिकॉर्ड उनकी जन्मतिथि 10 मई, 1950 ही बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा है कि यूपीएससी के रिकॉर्ड अहम हैं और असल उम्र का बहुत ज़्यादा मतलब नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जनरल से यह भी पूछा है कि उन्होंने 10 मई, 1950 को अपनी जन्मतिथि मानते हुए प्रमोशन क्यों लिया? जनरल सिंह ने २००८ में सेना को दी गई अंडरटेकिंग में अपने जन्म का साल 1950 माना था। सुप्रीम कोर्ट ने वीके सिंह से कहा है, 'कोर्ट उनकी ईमानदारी पर शक नहीं कर रहा है। लेकिन इस मामले में हमारे लिए कोई स्कोप नहीं है।' इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश आरएम लोढ़ा और एचएल गोखले की खंडपीठ कर रही है।
इससे पहले थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की उम्र से जुड़े विवाद पर सरकार झुक गई। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल जी.ई. वाहनवती ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि सरकार ने 30 दिसंबर के उस फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें सरकार ने जनरल वीके सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जनरल ने अपनी जन्मतिथि 10, मई 1951 बताई थी।
उधर, पाकिस्तान की अदालत ने भी प्रधानमंत्री और सेना को करारा झटका दिया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर करार झटका दिया है
इससे पहले थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की उम्र से जुड़े विवाद पर सरकार झुक गई। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल जी.ई. वाहनवती ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि सरकार ने 30 दिसंबर के उस फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें सरकार ने जनरल वीके सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जनरल ने अपनी जन्मतिथि 10, मई 1951 बताई थी।
उधर, पाकिस्तान की अदालत ने भी प्रधानमंत्री और सेना को करारा झटका दिया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर करार झटका दिया है

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