ठग को साथियों ने ठग लिया
जयपुर। ठग भी ठगी का शिकार हो गया और वह भी अपने ही साथियों के हाथों। सुनने में भले ही अटपटा लगे लेकिन गोल्ड सुख ठगी मामले के मुख्य आरोपियों में से एक नरेंद्र सिंह के साथ यही हुआ। तीन सौ करोड़ रूपए से भी ज्यादा की ठगी कर फरार हुए गोल्ड सुख के डायरेक्टरों के साथ नरेंद्र का बैंकॉक में मिलना तय हुआ था। नरेंद्र तो पहुंच गया लेकिन उसके बाकी तीन साथी नहीं पहुंचे।
नरेंद्र के पास उस समय महज ढाई लाख रूपए थे। उसके रूपए खत्म हो गए, तो उसे पत्नी के साथ वापस जयपुर लौटना पड़ा और वह धर लिया गया। जयपुर पहुंचने के बाद पुलिस की गिरफ्त में आए गोल्ड सुख के फरार एमडी नरेंद्र और उसकी पत्नी सरोज ने जयपुर आने के बाद इस राज से पर्दा उठाया। नरेंद्र की मानें, तो उसके साथियों ने "माल" भी ठिकाने लगा दिया और उसे गच्चा भी दे दिया।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस के हत्थे चढ़ने से पहले ही सभी डायरेक्टरों ने बैंकाक जाने की तैयारी कर ली थी। पूरा पैसा भी समेट लिया गया था। सभी लोग अलग-अलग फ्लाइट से जाने को थे। मानवेंद्र प्रताप, महेंद्र और प्रमोद शर्मा भी अपने परिवार के साथ ही फरार हुए थे। सभी की बैंकाक में मिलने की प्लानिंग थी और वहीं पैसे को ठिकाने लगाने के बारे में बातचीत होनी थी लेकिन नरेंद्र और सरोज को बैंकाक रवाना करने के बाद अन्य साथी उनसे नहीं मिले। नरेंद्र मोबाइल फोन भी यहीं छोड़ गया था। नया सिम इसलिए नहीं ले रहा था कि कहीं पुलिस उसे ट्रेस न कर ले।
बैंकॉक से भी निकलने की थी प्लानिंग
नरेंद्र ने पुलिस को जानकारी दी कि तमाम लोगों के बैंकाक में मिलने के बाद नेपाल या कहीं और जाने की पूरी प्लानिंग थी। इसी वजह से सबने बैंकॉक में मिलना तय गिया था लेकिन मानवेंद्र और अन्य लोगों ने नरेंद्र को ही गच्चा दे दिया।

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