गोडसे को पकड़ने वाले का परिवार  मुफलिसी में जी रहा 
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को पकड़ने वाले सार्जेट देव राज सिंह ठाकुर का परिवार मुफलिसी में जी रहा है। ठाकुर का परिवार हिमाचल प्रदेश के एक कस्बे में पिछले छह दशक से गुमनामी की जिंदगी जी रहा है। ठाकुर के परिवार में कोई भी कमाने वाला नहीं है। गोडसे को पकड़ने वाले ठाकुर को 1952 में पहले राष्ट्रपति ने गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
ठाकुर की बहू सुमित्रा ठाकुर का कहना है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था लेकिन वह अपने वादे से मुकर गई। सुमित्रा ने बताया कि 2010 में राज्य के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने दो बच्चों में से एक को नौकरी देने की बात कही थी। धूमल ने विशेष मामला मानते हुए बड़े पुत्र को सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था। पांच माह पहले सचिवालय से जानकारी मिली की बड़े पुत्र को नौकरी देने का कोई स्कोप नहीं है। ठाकुर के तीन पुत्र हैं। इनमें से एक की 2010 में मौत हो गई थी जबकि अन्य दो पुत्र हिमाचल प्रदेश में नहीं रहते हैं।
सुमित्रा ने बताया कि देव राज सिंह ठाकुर को 1987 में अशोक चक्र (ग्रेड दि्वतीय)से सम्मानित किया गया था। 1987 में उनकी मौत हो गई थी। भारतीय वायु सेना में नौकरी के दौरन ठाकुर का मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। इस कारण उनको रिटायर कर दिया गया। इसके बाद उनको पंजाब के अमृतसर स्थित पागलखाने भेज दिया गया। वहां उनको 14 साल रखा गया। ठाकुर की मृत्यु तक केन्द्र सरकार मासिक पेंशन देती थी लेकिन उसके बाद कोई मदद नहीं मिली।

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