बाड़मेर सांप-सीढी के सहारे होगी मातृ-शिशु स्वास्थ्य जागरुकता
बाड़मेर
सीमावर्ती बाड़मेर जिले में एक स्वयंसेवी संस्था ने सांप-सीढी के खेल के जरिये मातृ-शिशु स्वास्थ्य जागरुकता का अभिनव प्रयोग शुरु किया है। संस्था के लोग ग्रामीण इलाके की महिलाओं को इस खेल के जरिये बेहद आसान और रोचक तरीके से छोटी छोटी पर मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी महत्त्वपूर्ण जानकारिया दे रहे है। भाषण, गोष्ठी और प्रचार साहित्य जैसे परंपरागत तरीकों से उब चुकी ग्रामीण महिलाऐं भी इस नवीन तरीके से बेहद प्रभावित है।
संस्था का दावा है कि शरुआती स्तर पर ही इस नवीन प्रयोग के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे है। उन्होने ने बताया की गाव की कुछ महिलाऐं, जिन्होने संस्थान के सदस्यों के साथ संभवतः इस खेल को पहली बार खेला था, अब खेल सीखने के बाद गाव की दूसरी महिलाओं को भी खेल खेल में मातृ-शिशु स्वास्थ्य के बारे में जागरुक कर रही है।
स्वयंसेवी संस्थान केयर इण्डिया के परियोजना प्रबन्धक दिलीप सरवटे के मुताबिक जागरुकता के दूसरे तरीकों से हटकर खेल के जरिये जागरुकता का यह प्रयोग काफी सफल रहा है। इस विषय को साझा करते हुए सरवटे ने बताया की ग्रामीण महिलाओं को मातृ-शिशु स्वास्थ्य जागरुकता के बारे में शिक्षित करने के आसान तरीकों पर चर्चा के दौरान एक सहकर्मी ने यह सुझाव दिया। उसी सुझाव को आधार बनाकर 5 गुना 3 फीट आकार की साप-सीढी तैयार करवाई। जिस पर साप के काटने वाली जगह पर मातृृ-शिशु स्वास्थ्य के सम्बन्ध में बरतने वाली लापरवाही से होने वाले नुकसान एवं सीढी वाली जगह पर फायदों के बारे में जानकारी चित्रों एवं सन्देशों के साथ प्रदर्शित की गयी है।
दिलीप सरवटे ने बताया की जब संस्था के लोग पहली बार गाव की महिलाओं के बीच साप-सीढी का खेल लेकर पहुंचे तो शुरुआती दौर में संकोचवश महिलाऐं आगे नही आई। लेकिन शुरुआती कोशिशों और संस्था के सदस्यों के गाव की महिलाओं ने एक बार खेलना शुरु किया, तो एक के बाद एक अब कई गावों की सैकड़ों महिलाओं के लिये यह खेल, एक खेल से बढकर मातृ-शिशु स्वास्थ्य जागरुकता की पाठशाला बन गया है।
दिलीप सरवटे के अनुसार, अब यह एक श्रृखंला सी बन चुकी हैं। ग्रामीण महिलाऐं इस खेल के जरिये मातृ-शिशु स्वास्थ्य के बारे में जागरुक होने के साथ ही गाव की अन्य महिलाओं को भी जागरुक कर रही है।
केयर इण्डिया के परियोजना अधिकारी संजय कुमार ठाकर ने सांप-सीढी के खेल से मातृ-शिशु स्वास्थ्य जागरुकता का तरीका बताते हुए कि सांप-सीढी खेल में सांप के काटते ही खिलाड़ी सीधा नीचे पहुंच जाता है।
संजय ठाकर ने बताया कि इसी को ध्यान में रखकर सांप काटने वाली जगह पर समय पर बच्चों का टीकाकरण ने करवाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है। हम ग्रामीण महिलाओं को समझाते है कि बच्चों का समय पर पूर्ण टीकाकरण न करवाने से बच्चें गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो सकते है। ठीक इसी प्रकार सांप-सीढी के बोर्ड पर सीढी मिलने वाली जगह पर गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानिया और उससे होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी गई है।
संजय ठाकर ने बताया की हम गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवारजनों को समझाते है कि यदि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला का पूरा ध्यान रखा जाए, संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जाए तो मा और बच्चा दोनो सुरक्षित रहंगे।
इस बारे में बात करते हुए होडू गाव की लादू देवी ने बताया की यह एक अच्छा तरीका है। पहले तो जो लोग समझाने आते थे, वे गाड़ीयों में आते थे भाषण देकर चले जाते थे। उनमें से कई बाते हमारी समझ में आती थी और कुछ समझ में नही आती थी। लेकिन यह बड़ा ही रोचक तरीका है। खेल के साथ समय भी व्यतीत हो जाता है, और सीखने को बहुत सी जानकारिया भी मिल जाती है।
लादू देवी के अनुसार साप-सीढी अत्यन्त सुलभ विकल्प है जिससे कुछ महिलाऐं मिलकर अकसर खेलते है, ऐसे में मातृ-शिशु स्वास्थ्य के सम्बन्ध में बहुत सारी जानकारी भी अच्छे से समझ में आ गयी है। 

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