बाड़मेर जिंदगी से हार गई पाकिस्तान निवासी केसर
बाड़मेर 
पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान के सिंध सूबे की रहने वाली केसर ने बाड़मेर जिले के रामसर तहसील के एक छोटे से गांव बन्ने की बस्ती निवासी मन्नर खान से पाक में शादी कर भारत में घर बसाने का सपना संजोया था और वर्ष 1995 से लेकर दोनों मुल्कों के नियमों की अड़चनों के चलते वो 2013 तक ससुराल की देहरी तक नहीं पहुँच पाई थी उसके बाद केसर का पासपोर्ट बनने के बाद थार एक्सप्रेस से वर्ष 2011 में वो अपने पति के साथ पाक से भारत आ गई लेकिन यहाँ भी नियमों ने उसे बांध रखा करीब दो साल तक जोधपुर में ही रुकना पड़ा। जिसके बाद गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद पहली बार अपने ससुराल तो पहुँच गई लेकिन पाकिस्तान निवासी केसर का भारत में रहने का सपना तीन साल बाद टूट गया और शनिवार को प्रसव के दौरान उसने बाड़मेर के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। पाकिस्तान निवासी केसर ने बाड़मेर शहर स्थित एक निजी हॉस्पिटल में प्रसव पीड़ा के दौरान दम तोड़ दिया। पाकिस्तान निवासी केसर की कहानी बड़ी संघर्षमय है हुआ यूँ की 1995 में बाड़मेर जिले के बन्ने की बस्ती निवासी रसूल खान का बेटा मन्नर खान वाघा बॉर्डर के रास्ते पासपोर्ट के जरिए पाकिस्तान चला गया। पाकिस्तान में मन्नर खान ने वर्ष 1995 में केसर से निकाह कर लिया लेकिन क़ानूनी अड़चनों के चलते मन्नर खान केसर को भारत नहीं ला सका। धीरे धीरे वक्त के पहिए गुजरते गए और मन्नर खान अपनी बीवी केसर से मिलने के लिए एक दो बार और पाकिस्तान की यात्रा पर गया जिसके चलते केसर ने एक बच्चे को पाकिस्तान में ही जन्म दिया और वर्ष 2011 में भारत पाकिस्तान के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस के जरिए अपने पति के साथ केसर बच्चे को लेकर भारत आ गई और लेकिन भारत में आने के बाद भी अपने ससुराल बन्ने की बस्ती जा नहीं पाई इसका कारण यह था की बाड़मेर जिले से गुजरने वाले नेशनल हाइवे 15 पश्चिमी की तरफ गृहमंत्रालय की बिना अनुमति के कोई भी विदेशी नागरिक नहीं जा सकता है। इस नियमों की सख्ताई के चलते केसर को करीब दो साल तक अपने पति के साथ जोधपुर में किराए के मकान में रहना पड़ा। बाद में गृहमंत्रालय की अनुमति के बाद अपने ससुराल बन्ने की बस्ती तो पहुँच गई लेकिन तीन साल बाद दूसरी संतान के लिए प्रसव पीड़ा के दौरान शनिवार बाड़मेर के एक निजी अस्पताल में जिंदगी से केसर हार गई और उसने दम तोड़ दिया। पाकिस्तान की रहने वाली केसर को भारत में आने के बाद भी भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई। शनिवार को जब उसने प्रसव पीड़ा के दौरान दम तोडा तो परिजन भी बिना पोस्टमार्टम करवाए केसर के शव को लेकर वापस अपने गांव यानि बन्ने की बस्ती पहुँच गए लेकिन केसर के परिजनों को पता नहीं था की दोनों देशो का कानून मौत के बाद भी उनका पीछा नहीं छोड़ेगा और हुआ भी यही की केसर के ससुराल बन्ने की बस्ती रामसर पुलिस ने पहुंचकर केसर का अंतिम संस्कार करने से मना इसलिए किया की वो पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान की रहने वाली है इसलिए क़ानूनी तौर पर उसका पोस्टमार्टम करवाना जरुरी है उसके बाद परिजन एक बार फिर केसर के शव को लेकर बाड़मेर पहुंचे जंहा पर केसर के शव का डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम किया। पाकिस्तान की रहने वाली केसर करीब 15 साल तक अपने पति से दूर रही लेकिन फिर भी उसने हिम्म्त नहीं हारी और दोनों देशों के बीच कानून के उन नियमों को भी पार कर लिया जिसने केसर को ससुराल आने तक दूर कर रखा था। इतना सब कुछ सहन करने के बाद भी दो देशों के नियमों की खींचतान से जीतकर केसर जिंदगी से हार गई। 

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