मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान ग्रामीण विकास के साथ जल संरक्षण की पहल
बाड़मेर।
जिले में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के जरिए ग्रामीण विकास के साथ जल संरक्षण की अनूठी पहल की गई है। पक्के तालाबांे से ग्रामीणांे को कई माह तक पेयजल उपलब्ध होगा, वहीं पहाड़ांेे से निकलकर व्यर्थ बहने वाले पानी को रोकने को बनाए गए एनिकट भूमिगत जल स्तर को ऊपर उठाने मंे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसकी बदौलत स्थानीय कुआंे के रिचार्ज होने से ग्रामीणांे को लंबे समय तक सिंचाई एवं पेयजल सुविधा मिल सकेगी।
बाड़मेर जिले की सिणधरी पंचायत समिति की डाबड़ ग्राम पंचायत मंे डाबड़ तालाब जीर्णाेद्वार कार्य से ग्रामीणांे के सपने साकार होने वाले है। यहां 50 लाख की लागत से तालाब की पाल को पक्का करने के साथ पानी की आवक के लिए विशेष प्रकार की नालियांे का निर्माण कराया गया है। सरपंच पुराराम चैधरी के मुताबिक इस तालाब के पानी का उपयोग आसपास के कई गांवांे के ग्रामीण पेयजल के लिए करते है। इस तालाब को पक्का करने एवं आगोर के विस्तार की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान मंे यह कार्य होने से इस तालाब मंे करीब एक साल की जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। ग्रामीण प्रेमसिंह भाटी का कहना है कि डाबड़ तालाब पक्का बन जाने से इसमंे ज्यादा मात्रा मंे पानी एकत्रित होगा, इससे ग्रामीणांे को खासी सहुलियत होगी। सहायक अभियंता सुमेरसिंह के मुताबिक इस तालाब का जीर्णाेद्वार इस तरह से कराया गया है कि आसपास मंे व्यर्थ बहने वाला पानी इसमंे एकत्रित हो। उनके मुताबिक इस तालाब मंे 300 लाख लीटर पानी एकत्रित होगा।
डाबड़ ग्राम पंचायत मंे मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान एवं महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत करीब 500 टांकांे का निर्माण हुआ है। इससे अब तक सिर पर मटकी उठाकर पानी लाने वाली महिलाआंे एवं अपनी गाढ़ी कमाई से पेयजल जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करने वाले ग्रामीणांे को खासी राहत मिलने की उम्मीद है। इनके खेतांे एवं घरांे के पास टांका का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। बस अब बारिश होने का इंतजार है। ऐसे ही ग्रामीण कानाराम पुत्र हनुमानराम निवासी डाबड़ के खेत मंे घर के पास 1.65 लाख की लागत से टांका बनाया गया है। कानाराम टांका निर्माण को लेकर बेहद उत्साहित है, उनका कहना है कि कई साल बाद अब पानी के लिए उनको भटकना नहीं पडे़गा। अब तक महिलाएं पानी लाती है, आधे से ज्यादा दिन तो पानी जुटाने की मशक्कत मंे लग जाता है। इसी तरह उदाराम खेत मंे बने टांके का जिक्र करते हुए बेहद खुश हो जाते है। वे बताते है कि उनका एक बड़ा सपना पूरा हो गया है। अब महिलाआंे को लंबी दूरी से सिर पर पानी की मटकी उठाकर लाने की जरूरत नहीं होगी। अब तक बारिश का पालर पानी उनकी प्यास बुझाएगा। 
जल संरक्षण से भूजल स्तर बढ़़ाने की कवायदः सिवाना पंचायत समिति की सैला ग्राम पंचायत मंे मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत बारिश के पानी को संग्रहित करके भूजल स्तर बढ़ाने की कवायद की गई है। कार्यकारी एजंेसी वन विभाग ने यहां एमपीटी हेमावास मिनी प्रकुलेशन ट्रीटमेंट का निर्माण कराया है। इस पर 4.83 लाख रूपए व्यय किए गए है। इसमंे 60 लाख क्यूबिक लीटर पानी एकत्रित होगा। इससे आसपास के गांवांे मंे भू जल का स्तर बढ़ने के साथ कुएं रिचार्ज हांेगे। इससे ग्रामीण एक वर्ष मंे दो फसलंे ले सकंेगे। इसी तरह 17.02 लाख की लागत से दातूरा एनिकट , 15.77 लाख की लागत से सुलिया भाखरी समेत कई एनिकटांे का निर्माण कराया गया है। इनकी मदद से अब तक व्यर्थ बहने वाले बारिश के पानी को रोकने की कवायद की गई है। इनका निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इसमंे बारिश होने के साथ पानी की आवक शुरू होगी, जो जगह-जगह एनिकट में एकत्रित होने के बाद आगे जाएगी। इससे भू जल स्तर मंे काफी सुधार होने की संभावना है। बहरहाल, बाड़मेर जिले मंे जिला कलक्टर सुधीर शर्मा, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम.एल.नेहरा, अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक सुरेश कुमार दाधीच, अधीक्षण अभियंता जल ग्रहण हीरालाल अहीर के निर्देशन में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत वृहद स्तर पर जल संरक्षण संरचनाआंे का निर्माण होने से अब तक व्यर्थ बहने वाले पानी के जरिए ग्रामीणांे के जीवन मंे आमूलचूल परिवर्तन आने की उम्मीद है।

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