जेएनवीयू से जुड़े तीन महाविद्यालयों के नाम से बनवाई फर्जी अंक तालिकाएं
जोधपुर।
fake degree case of JNVU जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) के नाम से बीएड की फर्जी अंक तालिकाएं व डिग्री देने वाले तीन प्राइवेट कॉलेजों के नाम सामने आए हैं। इनमें दो जोधपुर तथा एक बाड़मेर का है। विवि की प्रशासनिक स्तर पर की गई जांच में भी विश्वविद्यालय से जुड़े महाविद्यालयों के नाम से फर्जीवाड़ा होने की बात सामने आ चुकी है। शास्त्रीनगर थाना पुलिस जल्द ही इन महाविद्यालय के संचालकों से पूछताछ शुरू करेगी। 
थानाधिकारी सुरेन्द्र सिंह के अनुसार प्रकरण में विवि की जांच तथा उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल के छात्र-छात्राओं को मारवाड़ बीएड कॉलेज, महेश टीटी कॉलेज तथा शाह गोवर्द्धन लाल काबरा महाविद्यालय के नाम हैं। आरटीआई से जिन अभ्यर्थियों ने जानकारी मांगी है उन्हें जेएनवीयू से जुड़े इन महाविद्यालयों के नाम से डिग्री तथा एडमिट कार्ड जारी हुए हैं। 

इसमें महेश टीटी कॉलेज बाड़मेर  में है, जबकि शेष्ा दोनों जोधपुर में। आशंका है कि इन महाविद्यालयों के नाम स्कैन करके फर्जी अंक तालिका में काम लिए गए हैं। म ारवाड़ बीएड कॉलेज भाण्डू में कमल मेहता का है। जबकि दईजर में मण्डलनाथ सर्किल पर अन्य मारवाड़ बीएड कॉलेज है। जांच कर रहे उप निरीक्षक गणपतलाल ने बताया कि सोमवार को बीएड महाविद्यालय के संचालकों से पूछताछ की जाएगी। 
फर्जी अंक तालिका लेने वाले भी भ्रम में
करीब बीस आवेदकों ने जेएनवीयू से आरटीआई में अंक तालिकाएं वैरिफाई करवाई हैं। इनमें कई अभ्यर्थी ऎसे भी हैं जिन्हें फर्जी अंक तालिका मिली है। ऎसे में प्रथम दृष्टया ऎसा लगता है कि इनको भी भ्रमित या गुमराह किया गया है। 
मेहता जैसा हश्र न हो इसलिए पहुंचे थाने
जेएनवीयू के नाम से बीएड के फर्जी एडमिट कार्ड व पंजीयन प्रमाण पत्र जारी करने का प्रशासन को डेढ़ वष्ाü पहले ही पता लग चुका था। फिर उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर जांच करवाई तो विवि से जुड़े महाविद्यालयों की भूमिका सामने आई। उधर, फर्जी डिग्री मामले में जेएनयू क े चेयरमैन कमल मेहता के गिरफ्तार होने पर विवि ने आनन-फानन में मामला दर्ज कराया।
अभ्यर्थियों से मिलेगा फर्जीवाड़े का सुराग
पश्चिम बंगाल के अधिवक्ता ट्रॉय चक्रवती ने 13 अगस्त 2013 को प्रवेश पत्र व पंजीयन प्रमाण पत्र के वैरिफिकेशन संबंधी जानकारी आरटीआई के तहत मांगी थी। इसके बाद कई अभ्यर्थियों ने आरटीआई के तहत आवेदन किए और खुद की बीएड अंक तालिकाओं को वैरिफाई करवाया। इन आवेदनों में अभ्यर्थियों की पूरी जानकारी है। इनसे पूछताछ में ही यह सामने आ सकेगा कि इनको यह अंक तालिकाएं कहां से मिली।

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