कर्नल सोनाराम के हलफनामे में दिए गलत तथ्य की आयोग को शिकायत
बाड़मेर जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्यासी कर्नल सोनाराम द्वारा नामांकन पत्र के साथ रिटर्निंग अधिकारी को पेश हलफनामे में गलत तथ्य पेश कर चुनाव आयोग को गुमराह किया हें। इस आशय कि शिकायत कैलाश मेहता ने जिला निर्वाचन अधिकारी बाड़मेर को पेश कि। मेहता ने बताया कि भाजपा प्रत्यासी कर्नल सोनाराम द्वारा जो हलफनामा पेश किया गया उसमे कर्नल सोनाराम ने चल सम्पति जो कि एक करोड़ पचपन लाख सौलह हज़ार आठ सौ इकतालीस हें उसे एक करोड़ बावन लाख सौलह हज़ार आठ सौ इकतालीस लिखा गया हें। इस तरह से उन्होंने अपनी चल सम्पति तीन लाख कम बता कर चुनाव आयोग के दिशा निर्देशो कि धजिया उड़ाई हें। उन्होंने बताया कि कि उन्होंने अपने हलपनामे में अपनी और पत्नी कि अचल सम्पति का जो कि सीरियल नंबर 8 (v 1 ) नहीं बताया गया। जनता उनकी और उनकी पत्नी कि समस्त सम्पतियो का योग जानने में असमर्थ रही हेह। मेहता के अनुसार हलपनामे के पार्ट b में अचल सम्पति को दो भागो में विभाजित करना था स्व अर्जित और दूसरी विरासत में मिली सम्पति ,मगर उन्होंने कालम के आगे नील लिखा हें। मेहता के अनुसार एक जगह उन्होंने अपनी और अपनी पत्नी कि अचल सम्पति बताई हें जिसमे खुद कि अचल सम्पति उन्तीस लाख नब्बे हज़ार बताई हें जबकि वास्तविक योग दो करोड़ निन्यानवे लाख होता हें। इसी तरह अपनी पत्नी कि अचल सम्पति बरानवे लाख दस हज़ार बताई हें जबकि वास्तविक योग नौ करोड़ इक्कीस लाख होता हें। मेहता ने बताया कि भाजपा प्रत्यासी और उनकी पत्नी पर दिल्ली के पुलिस थाना में दर्ज मामले में भी गलत तथ्य नामाकन में दाखिल किये। उन्होंने बताया कि इनके हलपनामे को चौहटन के ऑथ कमिसनर द्वारा प्रमाणित किया गया हें। जबकि हलपनामा बाड़मेर में दस्तखत किया बताया गया हें। चौहटन का ऑथ कमिश्नर उसी क्षेत्र में दस्तखत किये हैल्पनामे को प्रमाणित कर सकता हें। मेहता ने बताया कि इसी तरह हलपनामे के हेड शीर्ष पे जिस सदन के लिए चुनाव लड़ रहे हें उस पर पार्लियामेंट भरा हें जबकि लोकसभा भरा जाना चाहिए था ,कैलाश मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर जो कि निर्वाचन अधिकारी भी हें ने हलपनामे में दर्ज गलतियों को सुधर करने का कम करना चाहिए था जो कि छबीस मार्च को तीन बजे तक प्रत्यासी को अवसर देकर हैल्पनामा कि गलतियों को सुधारा जाना चाहिए था ,मगर राज्य सरकार के दबाव में निर्वाचन अधिकारी ने न तो हलपनामे कि जांच नहीं कि। इस तरह कि चूक और छिपाये तथ्यो का निस्तारण नहीं किया। मेहता ने हलपनामा में पेश किये गलत तथ्यो कि जानकारी देने वाले भाजपा प्रत्यासी के खिलाफ कार्यवाही कर नामांकन निरस्त किया जाए ,
बाड़मेर
बाड़मेर जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्यासी कर्नल सोनाराम द्वारा नामांकन पत्र के साथ रिटर्निंग अधिकारी को पेश हलफनामे में गलत तथ्य पेश कर चुनाव आयोग को गुमराह किया हें। इस आशय कि शिकायत कैलाश मेहता ने जिला निर्वाचन अधिकारी बाड़मेर को पेश कि। मेहता ने बताया कि भाजपा प्रत्यासी कर्नल सोनाराम द्वारा जो हलफनामा पेश किया गया उसमे कर्नल सोनाराम ने चल सम्पति जो कि एक करोड़ पचपन लाख सौलह हज़ार आठ सौ इकतालीस हें उसे एक करोड़ बावन लाख सौलह हज़ार आठ सौ इकतालीस लिखा गया हें। इस तरह से उन्होंने अपनी चल सम्पति तीन लाख कम बता कर चुनाव आयोग के दिशा निर्देशो कि धजिया उड़ाई हें। उन्होंने बताया कि कि उन्होंने अपने हलपनामे में अपनी और पत्नी कि अचल सम्पति का जो कि सीरियल नंबर 8 (v 1 ) नहीं बताया गया। जनता उनकी और उनकी पत्नी कि समस्त सम्पतियो का योग जानने में असमर्थ रही हेह। मेहता के अनुसार हलपनामे के पार्ट b में अचल सम्पति को दो भागो में विभाजित करना था स्व अर्जित और दूसरी विरासत में मिली सम्पति ,मगर उन्होंने कालम के आगे नील लिखा हें। मेहता के अनुसार एक जगह उन्होंने अपनी और अपनी पत्नी कि अचल सम्पति बताई हें जिसमे खुद कि अचल सम्पति उन्तीस लाख नब्बे हज़ार बताई हें जबकि वास्तविक योग दो करोड़ निन्यानवे लाख होता हें। इसी तरह अपनी पत्नी कि अचल सम्पति बरानवे लाख दस हज़ार बताई हें जबकि वास्तविक योग नौ करोड़ इक्कीस लाख होता हें। मेहता ने बताया कि भाजपा प्रत्यासी और उनकी पत्नी पर दिल्ली के पुलिस थाना में दर्ज मामले में भी गलत तथ्य नामाकन में दाखिल किये। उन्होंने बताया कि इनके हलपनामे को चौहटन के ऑथ कमिसनर द्वारा प्रमाणित किया गया हें। जबकि हलपनामा बाड़मेर में दस्तखत किया बताया गया हें। चौहटन का ऑथ कमिश्नर उसी क्षेत्र में दस्तखत किये हैल्पनामे को प्रमाणित कर सकता हें। मेहता ने बताया कि इसी तरह हलपनामे के हेड शीर्ष पे जिस सदन के लिए चुनाव लड़ रहे हें उस पर पार्लियामेंट भरा हें जबकि लोकसभा भरा जाना चाहिए था ,कैलाश मेहता ने यह भी आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर जो कि निर्वाचन अधिकारी भी हें ने हलपनामे में दर्ज गलतियों को सुधर करने का कम करना चाहिए था जो कि छबीस मार्च को तीन बजे तक प्रत्यासी को अवसर देकर हैल्पनामा कि गलतियों को सुधारा जाना चाहिए था ,मगर राज्य सरकार के दबाव में निर्वाचन अधिकारी ने न तो हलपनामे कि जांच नहीं कि। इस तरह कि चूक और छिपाये तथ्यो का निस्तारण नहीं किया। मेहता ने हलपनामा में पेश किये गलत तथ्यो कि जानकारी देने वाले भाजपा प्रत्यासी के खिलाफ कार्यवाही कर नामांकन निरस्त किया जाए ,
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