वरघोड़े का जगह-जगह पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, परमात्मा की प्रतिष्ठा आज
बाड़मेर
थार नगरी के कल्याणपुरा स्थित महावीर चैक में प्राचीन पाष्र्वनाथ जिन मन्दिर जीर्णोद्वार कारित अंजनषंलका प्रतिष्ठा महोत्सव के पचम दिवस एवं दीक्षा कल्याणक शोभायात्रा में श्रृद्धा का जन सैलाब उमड़ पड़ा। 
प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के संयोजक मांगीलाल वडेरा ने बताया कि आज प्रातः 9 बजे वाराणसी नगरी महावीर चैक से उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभ सागर जी म.सा. आदि ढाणा की पावन विश्रा एवं गुरूवर्या श्री सुरंजना श्री दाव डाॅ. विद्युत प्रभा श्री आदि ढाणा के पावन सानिध्य में दीक्षा कल्याणक वरघोड़े का आयोजन हुआ।
वरघोड़े को जैन ध्वज दिखाकर रवाना करने का लाभ लुणकरण ताराचंद बोथरा बिषाला वालो ने लिया। वरघोड़े को लाभार्थी परिवार के साथ बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन, नगरपरिषद् सभापति उषा जैन तथा संयोजक मांगीलाल वडेरा, अध्यक्ष बाबुलाल सेठिया, महामंत्री सम्पतराज बोथरा, कुषलवाटिका के अध्यक्ष भंवरलाल छाजेड़, सहसंयोजक सज्जनराज मेहता, बाबुलाल टी बोथरा, हस्तीमल बोथरा इत्यादि समाज के प्रबुद्ध जनो ने जैन ध्वज दिखाकर उपाध्याय प्रवर के मंगलाचरण से शोभायात्रा का आगाज हुआ। 
ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल सेठिया ने बताया शोभायात्रा में प्रतिष्ठा के शोभायात्रा बैनर का विमोचन किया गया। शोभायात्रा के सर्वप्रथम रंगोली जगह-जगह शोभायात्रा से आगे हुई बाद में हेलीकाॅप्टर से जगह-जगह शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा, प्रतिष्ठा का बैनर, शहनाई वादक, इन्द्रध्वजा, ढोल नगाड़ा, घुड़सवार दाव ऊॅट पर सवार जैन ध्वज लिये युवक चल रहे थे। बाद में सनावड़ा की गैर नृत्य जगह-जगह नृत्य करता हुआ चल रहा था बाद में पाष्र्वनाथ जिनालय का माडल मन्दिर की झांकी परमात्मा की तस्वीर वाला वाहन शहर का सुप्रसिद्ध बैन्ड, अष्ट मंगल का गाडा, जोकर (लाला-लाली) रेडिषनल का नृत्य गु्रप जगह-जगह अलग-अलग मुदाओं में नृत्य करता हुआ, हाथी के ओहदे पर सवार लाभार्थी परिवार बाबुलाल भगवानदास सेठिया परिवार चैहटन चल रहा था पाष्र्वनाथ भगवान की झाकीयों के अलावा परमात्मा के माता-पिता इन्द्र-इन्द्राणी इत्यादिा पूरा राज दरबार बैठा हुआ था तथा परमात्मा के माता-पिता द्वारा वर्षादान हो रहा था। 
सहसंयोजक सज्जनराज महेता ने बताया कि बाद में इन्द्रध्वज स्थित रथ, मंजीरा गु्रप बाद में विभिनन मुद्राओं मे नृत्य करता चल रहा था, बाद भटिण्डा का सुप्रसिद्ध बैन्ड का नृत्य बहुत अनोखा था बाद में उपाध्यायप्रवर अपनी धवल सेना के सााि उनके पिछे साफो एवं दुपटो से सुसज्जित पुरूष वर्ग जयकारों के साथ चल रहा था। उनके पीछे तोप से पुष्प् वर्षा करता हुआ चल रहा था। बाद में साध्वीवर्या अपनी धवल सेना के साथ नगरपरिषद् सभापति उषाजैन भी साथ था। उनके बाद बालिकाओं के अलग-अलग मण्डल तथा महिला मण्डल द्वारा सिर पर मंगल कलष धारण कर मंगल गीत गाते हुए चल रहे थे। 
ट्रस्ट के महामंत्री सम्पतराज बोथरा ने बताया कि बाड़मेर शहर का सुप्रसिद्ध बैड परमात्मा का फूलो से सुसज्जित रथ शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहा था बाद में अलग-अलग झाकीया जिसमें पाष्र्वनाथ भगवान की एवं धरन्द्रेण पदमावती सहित कई प्रकार की अलग-अलग झाकिया शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रही थी। 
स्मिति के प्रचार संयोजक खेतमल तातेड़ ने बताया कि शोभायात्रा महावीर चैक से कल्याणपुरा होते हुए अमृतलाल जैन की गली, जोगमाया का मन्दिर, रीबखदास ठेकेदार की गली, कल्याणपुरा, आराधना भवन, प्रतापजी की पोल, करमूजी की गली, महाबार रोड़, चैहटन फाटक, विद्यापीठ, सम्पतराज बोथरा की गली, लक्ष्मी बाजार, पीपली चैक, जवाहर चैक, सब्जी मंडी, स्टेषन रोड़, रेल्वे स्टेषन, सुभाष चैक, होते हुए महावीर चैक पहुॅची जहां पर धर्मसभा में परिवर्तित हुई। 
धर्मसभा में उपाध्याय प्रवर ने दीक्षा कल्याणक व केवल ज्ञान के बारे में बताया कि अद्भूत त्याग के धारक परमात्मा शुद्धमति श्रुत और अविधज्ञान के स्वामी होने से स्वंय के दीक्षा का समय जानते है फिर परम्परा मर्यादा के कारण नवलोकान्ति देवो की प्रार्थना के पश्चात् ही भगवान एक वर्ष तक प्रतिदिन एक करोड़ आठ लाख स्वर्ण मुद्रा का दान देकर जगत को जीवों की द्ररिता दूर करते हुए है सर्व विरतिधर्म (संयम) को स्वीकार करते हुै इसे दीक्षा कल्याणक कहते है। 
केवल ज्ञान - भौतिक ऐष्वर्य का त्यागकर अरिहंत परमात्मा इस पावन भूमि पर भारड़ पक्षि की तरह अप्रमत बनकर विचरण करते सयंम पालन करते समय कर्म सता के सामने धातीकर्मो को क्षय कह आत्मा के अन्तत गुण रूप् केवल ज्ञान को प्राप्त करते इसे केवल ज्ञान कहतेे इस समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उपस्थित थी। 
दीक्षा कल्याण व केवल ज्ञान नरेन्द्र वाणी गोता के निर्देषन में सम्पन्न हुआ। ट्रस्ट के उपाध्याक्ष रतनाल वडेरा ने बताया कि मणिधारी कुषल नगर में वैदी पूजन पचपरमेष्ठी पूजन का आयोजन विद्यीकारक जसंवत भाई के निर्देषन में वैदिक मगौचार द्वारा सम्पन्न करवाई गई बाद में दोपहर को नवकारजी का आयोजन विद्यापीठ के पास किया। जिसका लाभ गजीदेवी भूरचंद महेता परिवार द्वारा लिया जिसका एवं अन्य लाभार्थियों का ट्रस्ट मण्डल एवं महोत्सव समिति द्वारा तिलक, माला, साफा-चूनड़ी श्रीफल मोमेन्टो से बहुमान किया गया। रात्रि में भक्ति सध्या का आयोजन नरेन्द्रवाणी गौता द्वारा एवं टीवी कलाकारों द्वारा संगीत की जोरदार रमझर जमायी जिसमें श्रद्धालुओं ने झूमने का आनंद लिया। 
शोभायात्रा सम्पूर्ण व्यवस्था एवं ऐतिहासिक एवं भव्याातिभव्य बनाने का सम्पतराज बोथरा एडवोकेट का रहा उनके साथ मदनलाल बोथरा, भूरचंद बोहरा, मुकेष बोहरा सहित जैन समाज व जैन समाज के सम्पूर्ण संस्थाओं का सहयोग रहा। 
शोभायात्रा के संयोजक सम्पतराज बोथरा ने बतायाकि शोभायात्रा का जगह-जगह तोरणद्वारों, अक्षत की गहलूहीयों, पुष्पवर्षा एवं रंगोली तथा जगह-जगह शीतल पेयजल से श्रद्धालुओं ने स्वागत किया तथा शोभायात्रा में श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह नृत्य किया। 
इस अवसर पर बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन, नगरपरिषद् सभापति उषा जैन, कुषलवाटिका ट्रस्ट के अध्यक्ष भंवरलाल छाजेड़, नाकोड़ा ट्रस्ट के अध्यक्ष अमृतलाल जैन, उप्रपधान मोतीलाल मालू, ब्रहमसर ट्रस्ट के अध्यक्ष दानमल डूगरवाल, गांधीधाम के केवलचंद नाहटा, नवसारी के बाबुलाल छाजेड़, कुषल वाटिका के महामंत्री मांगीलाल मालू, नाकोड़ा ट्रस्टी रतलाल संखलेचा, वीरचंद वडेरा, हंसराज कोटड़िया एवं ट्रस्ट मण्डल तथा महोत्सव समिति के सदस्यों सहित चैहटन, भादरेष, बिषाला, सियाणी, बालोतरा, जोधपुर सूरत, भिवण्डी, मालेगांव, सांचैर, धोरीमन्ना, डागरी, तमिलनाडु सहित देष के अलग-अलग कोनो से हजारो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। 
आज के कार्यक्रम परमात्मा की प्रतिष्ठा आज
संयोजक मांगीलाल वडेरा ने बताया कि आज प्रातः माणक स्तम्भ आरोपण तोरण विधान के बाद प्रातः 9 बजे शुभ मोहुर्त में पाष्र्वनाथ परमात्मा की प्रतिष्ठा सम्पन्न होगी। बाद में दस बजे नूतन साध्वी दर्षनाश्री जी की बड़ी दीक्षा कार्यक्रम बाद में अष्टोतरी शांति स्नातर महापूजन दोपहर में फलेचुन्दरी का आयोजन विद्यापीठ पर किया गया जिसका लाभ मांगीलाल रतनलाल पुत्र रिखबदास वडेरा ठेकेदार परिवार की ओर से होगा। 

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