आयकर वकील राठौड़ का स्वर्गवास
बाड़मेर
आयकर, बिक्रीकर एवं सम्पति कर के सुविख्यात वकील एवं ‘‘काॅमर्शियल टैक्सेज व्यू’’ मासिक पत्रिका के सम्पादक वकील रावतसिंह राठौड़ का शुक्रवार को लम्बी बिमारी के बाद स्वर्गवास हो गया हैं। आपका राजपूत श्मशान घाट में अन्तिम दाह संस्कार किया गया। जिसमें नगर के कई गणमान्य राजनैतिज्ञ, नागरिक, वकील, डाॅक्टर, व्यवसायी, पत्रकार, साहित्यकार आदि के साथ सैकड़ो लोग सम्मिलित हुए। आपकी देह को आपके पुत्र हरीसिंह राठौड़, राजेन्द्रसिंह राठौड़ सहित कई परिजनों में मुखग्नी दी।
स्वर्गीय रावतसिंह राठौड़ बाड़मेर के सुविख्यात आयकर वकील होने के साथ-साथ कई समाज सेवी संस्थाओं के सलाहकार भी रहे हैं। आपका जन्म नागौर जिले के आजवा गाँव में 13 मार्च 1933 को हुआ और आपने प्रारम्भिक एवं बी काॅम तक की शिक्षा जोधपुर में प्राप्त की। सन् 1959 में विख्यात वकील जेठानन्द शारदा के साथ अपना वकालात का जीवन बाड़मेर से आरम्भ किया और सन् 1960 में स्वतंत्र आयकर वकील के रूप में अपनी पहचान बनाई। आपने सन् 1984 में आयकर, बिक्रीकर, सम्पति कर आदि से सम्बन्धित ‘‘काॅमर्शियल टैक्सेज व्यू’’ (हिन्दी मासिक) पत्रिका आरम्भ की जो पूरे देश में सर्वाधिक लोकप्रिय हैं।
वकील रावतसिंह के स्वर्गवास पर बाड़मेर नगर की विभिन्न संस्थाओं ने श्रंद्धाजलि सभाएँ आयोजित कर आपको श्रंद्धा सुमन अर्पित किये। आपका बारहवां 28 जनवरी 2014 मंगलवार को आपके निवास स्थान राय कोलोनी में होगा।
वकील रावतसिंह राठौड़
बाड़मेर की थार नगरी के सुविख्यात आयकर वकील श्री रावतसिंह राठौड़ का नाम बाड़मेर नगर के इतिहास में प्रख्यात आयकर वकील, स्पष्टवादी, निर्भिक एवं निडर समाज सेवी के रूप में सदैव स्मरण रहेगा। नगर की विभिन्न प्रकार की समाज सेवी संस्थाओं को समय-समय पर सलाह एवं मार्गदर्शन देकर उन्हें सक्रिय बनाने में आपकी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं। आयकर, बिक्रीकर एवं सम्पति कर के कुशल वकील होने के कारण इनसे सम्बन्धित अधिकारी आपके वाकतर्क से सदैव प्रभावित रहते थे। जिसके कारण बाड़मेर नगर एवं जिले के कई व्यवसायी आपको अपना वकील बनाने का गौरव समझते थे। देश के व्यापारियों को कर सम्बन्धी सलाह एवं मार्ग दर्शन देने के लिये आपने देश के सबसे पिछड़े सीमावर्ती बाड़मेर नगर से सन् 1984 में हिन्दी मासिक पत्रिका ‘‘काॅमर्शियल टैक्सेज व्यू’’ का शुम्भारम्भ कर न केवल व्यवसायियों को राहत पहुँचाई अपितु आयकर आदि से सम्बन्धित बनने वाले नये वकीलों को मार्गदर्शन दिया।
विभिन्न करों के सम्बन्ध में विशेष ज्ञान हासिल करने वाले वकील रावतसिंह राठौड़ का राजस्थान प्रदेश के नागौर जिले के आजवा गाँव में श्री दुर्जनसिंह राठौड़ के यहाँ 13 मार्च 1933 को जन्म हुआ। आपकी माता का नाम श्रीमती गुलाब कंवर था। बचपन में आजवा की ग्रामीण पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने के बाद आगे की पढ़ाई जोधपुर में बी-काॅम तक की। परिवार की इच्छा थी कि आप अधिकारी बनकर समाज को नई दिशा दे, लेकिन आपने स्वतंत्र रहकर समाज सेवा करने का बीड़ा उठाया और बाड़मेर नगर में आयकर प्रख्यात वकील श्री जेठानन्द शारदा जी के साथ कर सलाहकार के रूप में सन् 1957 में वकालात आरम्भ की। शारदाजी के जोधपुर में व्यस्त रहने के बाद आपने स्वतंत्र रूप से बाड़मेर में सन् 1960 में कर सलाहकार के रूप में कार्य करना आरम्भ किया जो जीवन के अन्तिम पड़ाव तक जारी रहा। बाड़मेर के ख्यातिनाम कर सलाहकार के रूप में आपकी पहचान बनी रही। करीबन 55 वर्षो तक आयकर वकील रहते आपने किसी भी संस्था अथवा बार एसोसियेशन आदि में पदाधिकारी बनने की इच्छा नहीं रखते हुए उन्हें हर प्रकार से मदद देने में आपकी सक्रिय भूमिका रही।
बाड़मेर नगर के नामी वकीलों में आपका नाम लोग बड़ी श्रद्धा से लेते रहे हैं। आपकी राजनीति में तनिक भी रूचि नहीं थी लेकिन राजनैतिक विशलेषण करने में आप माहिर थे। इस कारण आपके बड़े पुत्र श्री हरीसिंह राठौड़ को आयकर सलाहकार बनाने के बाद राजनैतिक मैदान में उतारने में आपकी दूरदर्शिता ही रही। छोटे पुत्र श्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ को बिक्रीकर सलाहाकर बनाने के साथ कुशल पत्रकार के रूप में ‘‘काॅमर्शियल टैक्सेज व्यू’’ का सम्पादन का कार्य सौंपा। आपके परिजन परिवार को बाड़मेर में बसाते हुए आपके साला श्री भवानीसिंह शेखावत ‘‘मामा’’ को न केवल समाज सेवी बनाया अपितु उन्हें कुशल राजनीति में बना दिया।
वकील रावतसिंह राठौड़ ने अपनी जन्म भूमि आजवा (नागौर) में अपने परिवार की इच्छानुसार वहां श्रीमाताजी का मन्दिर बना कर अपनी जन्म भूमि का कर्ज भी अदा किया हैं। वहाॅं आजवा गांव की शिक्षण, चिकित्सालय आदि संस्थाओं में समय-समय पर आर्थिक आदि सहयोग देकर अपनी मातृभूमि के प्रेम को बरकरार रखने में कदापि पीछे नहीं रहें। अपनी जन्म भूमि के कई लोगों को किसी न किसी प्रकार की सेवा करने का आपने अवसर भी नहीं गंवाया। इस कारण आजवा गांव वासी आपसे सदैव स्नेह प्यार, दुलार देते रहे हैं।
वकील रावतसिंह राठौड़ को बचपन से पढ़ने लिखने का अधिक चाव रहने के कारण आप और आपकी धर्मपत्नी श्रीमती उम्मेद कंवर व अपने पुत्रों, पुत्रियों, पोते, पोतियों आदि को उच्च शिक्षा दिला कर योग्य बनाया अपितु सबके पारिवारिक सम्बन्ध भी अच्छे घरानों में कर उन्हें सुखी जीवन व्यतीत करने की पहल की। पारिवारिक, सामाजिक, व्यवसायिक, राजनैतिक सुख सम्पति के धनी वकील रावतसिंह राठौड़ के स्वर्गवास होने पर बाड़मेर थार नगरी ने न केवल एक कर्मठ, कुशल, निर्भिक, निडर आयकर सलाहकार का हंसमुख चेहरा खोया हैं अपितु, कई मित्रों ने अपना घनिष्ठ मित्र, परिजनों ने अपना संमधि और हितेषियों ने अपना हमदर्दी ही खोया हैं।
(भूरचन्द जैन)
स्वतंत्र पत्रकार
बाड़मेर
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