शहर की सफाई व्यवस्था पर जनचेतना
आनंद एम वासु 
जैसलमेर। 
विधान सभा के चुनाव संपन्न हो गए । सरकार ने अपना काम-काज शुरू कर दिया । सब यथावत रूप से चलता रहेगा, नई योजनाएं आयेंगी, क्रियान्वित होंगी और जनता को इसका लाभ मिलेगा ।
हॉल में सम्पन्न हुए चुनावों में सबसे अहम मुद्दे थे, मंहगाई और भ्रष्टाचार के और जनता ने इसे गंभीरता से लेने के लिए ही सता परिवर्तन और सता में पुनः भरोसा किया है तो चुने हुए प्रतिनिधि भी इसे पूरा करने का भरसक प्रयास करेंगे । 
मंहगाई कम करने के लिए अभी भी सीधे तौर पर केंद्र सरकार का ही मुंह ताकना पड़ेगा । तेल और बिजली कंपनियों पर राज्यों का कंट्रोल तो दूर की बात है, केंद्र सरकार का भी कंट्रोल होता नहीं दिखाई पड़ता है तभी तो आए दिन उनकी मांगे पूरी होती जाती रहती है । सवाल है कि आखिर कौन इन पर नकेल डालेगा ?
चलो इस पर तो बहस भी होती रहती है और पूरा देश लगा है, नतीजे जरूर जनता के हक़ में आयेंगे । अभी लोकसभा के चुनाव बाकी हैं । फिलहाल हम बात करतें हैं हमारे शहर की और इस कोण से आप अपने शहर या गाँव को भी देख सकते हो । 
शहर की सफाई व्यवस्था अब कुछ कहने को मजबूर कर रही है । शहर की गलियों और सडकों पर पर पैदल चलना हुआ दु:सवार । गलियों में जहाँ पत्थर की डाबड़ी लगी हुई हैं उनकी टीपें उखड चुकी हैं और उन पर पैर आते ही, छपाक से गंदा पानी सफ़ेद झक कपड़ों को खराब कर देने की घटनाएं जनता की मुश्किलें बढ़ा रही है । तकरीबन हर गली और सड़क पर सड़क निर्माण कार्य, सीवरेज लाईन का कार्य, जलदाय विभाग का कार्य, टेलीफोन विभाग का कार्य अक्सर चलता रहता है जिससे आमजन की तकलीफें बढी ही हैं । पहले तो अलबत्ता काम वर्षों तक चलते है, उपरान्त काम ख़त्म होने के बाद ये गड्ढे और मलबा जैसा का तैसा छोड़ दिया जाता है, जनता की माथा-पच्ची के लिए । 
जैसलमेर शहर में इन दिनों टूरिस्ट सीजन बूम पर है । कई सैलानी शहर की गलियों और सडकों पर पैदल घुमाते है क्योंकि, एक तो हर जगह गाडी नहीं जाती और दूसरा पैदल घुमाना उनको पूरी जानकारी भी देता है । गाईड साथ में होता है तो पैदल वाक ही सही रहता है । इस दरम्यान उन्हें कई बार "सिट" कह कर अपने कपड़ों को देखना पड़ता है, कई टूरिस्ट झल्ला जाते है तो कई इसकी कहानियां भी लिख देते है, पता नहीं कौन पत्रकार है, कौन लेखक और कौन वीआईपी । 
हालांकि "आई लव जैसलमेर" ने जैसलमेर में सफाई का बीड़ा प्रशासन के सहयोग से ही आगे बढ़ाया है और इसमें काफी हद तक सफल भी हुए हैं । गडीसर पर पिछले एक वर्ष से होटल सूर्यागढ़ की तरफ से सफाई कर्मी लगा रखे है और वे ५-७ जनों की टीम सुबह से शाम तक झाडू लगाते रहते हैं । इन्होनें अपनी सेवाएं जिला अस्पताल में भी है, इसके लिए ये साधुवाद के पात्र हैं । लेकिन शहर तक अभी यह टीम नगर परिषद् के सहयोग के बिना अपना काम नहीं कर पायी है परन्तु योजना है उनके पास । 
जैसलमेर की साफ़ सफाई के लिए तकनीकि द्रष्टिकोण की कमी है । नालियां ओवरफ्लो हो जाती है, गंदा पानी गलियों और सडकों पर आ जाता है । यह समस्या जैसलमेर के प्रवेश द्वार गडीसर से लेकर ढेढ़ भीतर तक बुरा हाल है । एक बार नहीं बार-बार नगर परिषद् के चेयरमैन और आयुक्त शहर की गलियों और बाजार का चक्कर लगाए फिर कोई योजना अनुरूप कार्य करे तो बात बन सकती है । वरना यह तो ऐसे ही चलता रहेगा ? .......
इस समब्ध में एक बार पूर्व विधायक को पत्र लिखा था तो उनका जवाब था- "इस विषय में जनचेतना की आवश्यकता है", मैनें पुनः पत्र लिखकर मार्गदर्शन चाहा कि आखिर जनचेतना लाएगा कौन ? पत्रकार या नेतृत्व (नेता)(जनप्रतिनिधि) या फिर कोई जुनूनी ?

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
HAFTE KI BAAT © 2013-14. All Rights Reserved.
Top