दागियों को बचाने वाला अध्यादेश वापस लेगी सरकार!
नई दिल्ली।
यूपीए सरकार दागी नेताओं को बचाने वाले विवादित अध्यादेश को वापस ले सकती है। एक समाचार चैनल ने बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक के नोट से यह जानकारी दी है।
नोट में न केवल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कैबिनेट के फैसला का बचाव किया गया है बल्कि यह भी कहा गया है कि अध्यादेश के संबंध में जनता की धारणा सही नहीं है। अध्यादेश का मकसद अपराधियों को बचाने का नहीं है। नोट में सरकार को संशोधन वापस लेने के लिए दो विकल्प भी दिए गए हैं।
नोट में कहा गया है कि फैसला सार्वजनिक होने के बाद अध्यादेश के प्रावधानों की कड़ी आलोचना हुई। इससे यह धारणा बनी कि सरकार कोर्ट के फैसले को पलट कर दोषी करार दिए गए नेताओं को बचाना चाहती है। अध्यादेश को तार्किक तरीके से पढ़ने पर ऎसा निष्कर्ष नहीं निकलता है।
यही लाइन प्रधानमंत्री और कैबिनेट के फैसले का बचाव करती है। गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अध्यादेश को बकवास करार देते हुए उसे फाड़ देने की बात कही थी। कैबिनेट नोट में पीआरए एक्ट 2013 को राज्यसभा के सभापति की ओर से स्थायी समिति के पास भेजे जाने का भी जिक्र है।
नोट में अध्यादेश पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की चुप्पी का भी संज्ञान लिया गया है। इसमें लिखा है कि राष्ट्रपति ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ऎसे में इस मसले पर कैबिनेट में चर्चा होनी चाहिए और आगे की रणनीति तय हो। या तो सरकार अध्यादेश पर राष्ट्रपति के आखिरी फैसले का इंतजार करे या फिर इसे वापस लेकर स्थायी समिति की सिफारिशों का इंतजार किया जाए।
कैबिनेट नोट से साफ है कि सरकार अब इस मसले पर और फजीहत से बचना चाहती है और कैबिनेट की गरिमा को भी बनाए रखना चाहती है। अध्यादेश को लेकर बुधवार शाम कैबिनेट की बैठक होगी। इससे पहले कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हो सकती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकते हैं।
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