ग्रामीण स्थिति सुखद नहीं मृदुरेखा चौधरी
बाड़मेर
डॉ. मृदुरेखा चौधरी ने बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र का पांच दिवसीय दौरा करने के पश्चात प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र के गांवों सुरा, भादरेस, नांद, भाड़खा, मू़ों की ़ाणी, शिवकर, परो, मीठड़ी, खारा, भुरटिया, चवा, महाबार, मीठड़ा, जसाई, हाथीतला आदि गांवों का सघन दौरा करते हुए कई समाजिक व राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हुए क्षेत्र के लोगों से रूबरू हुए, सभी की समस्याये सुनी। लोगों ने अपना दर्द बताते हुए वर्तमान सरकार को कोसा क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपनी पानी, चारा व स्कूलों की अव्यवस्थाओं की शिकायत की। बड़ी संख्या में महिलाओं का कहना था कि भारत को आजाद हुए 65 वार हो गये है बड़ी बड़ी बातें कांग्रेस सरकार ने की है। करोड़ो की योजनाओं के नाम पर पैसों की फिजूल खर्ची करके लाइने डालते है हौदिया बनाते है लेकिन पानी कहीं देखने को नहीं है। आज भी ऐसी बहुत सी ़ाणियां है जिनमें पानी नहीं है न हीं कोई हैण्डपम्प व अन्य स्त्रोत है न ही कोई सुनवाई करने वाला है। इस भीाण गर्मी में महंगे हो रहे पानी को लाना हर व्यक्ति के बस में नहीं है। यहां पर तो 1 बून्द पानी भी नहीं आया है। पुशधन पानी के लिए तरस रहा है और दूसरी तरफ सरकार हिमालय का पानी बाड़मेर में पहुंचाने का ढ़ॢोरा लगातार पीट रही है। बडे बडे विज्ञाप्न, हॉर्डिंग लगाकर महंगे उद्घाटन करवाकर वाहवाही लूट रही है जबकि क्षेत्र की वास्तविकता बहुत ही भयावह है। सुरा गांव की महिला सामाजिक कार्यकर्ता भवरी देवी का तो यहा तक कहना है कि कई बार तो फोन करने के बाद भी टंकी नहीं आती है। एक एक मटका पानी उधार लाकर काम चलाना पड़ता है। ऐसी लचर व्यवस्था से प्र्रतीत होता है कि व्यवस्थाओं के लिए ॔॔नौ दिन चले अ़ाई कोस’’ लोकोक्ति सिद्ध हो रही है।
दूसरी तरफ चारे की व्यवस्था सीमित है। सुकाल नहीं होने पर चारे का अभाव है पशुधन को महंगा चारा पशु पालक नहीं खिला पा रहे है। महंगा चारा भी उपलब्ध नहीं है। वसुन्धरा जी के ासन काल में हर राजस्व गांव पर पशु शिविरों की व्यवस्था हो जाती थी, जिसमें चारा, आहार दोनो पशुओं को मिल जाते थे। कोई भी भेदभाव नहीं था लेकिन इस सरकार में मनुय, पशु, पक्षी तक त्रस्त है। कल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित है इसको सिर्फ प्रचारित किया जाता है व्यवहारिकता बहुत दूर की कौड़ी है ये सरकार पशुधन के सरंक्षण में कोई उपयोगी कदम नहीं उठा रही है।
चौधरी ने बताया कि बिजली की फाईले भरी हुई है डिमाण्ड निकाले हुए है लेकिन कनेक्शन देने से सम्बंधित किसी को कोई लेना देना नहीं है। आधी अधूरी योजनाओं का केवल बार दिखावा करते है और उसके बाद राज्य सरकार का कोई लेना देना होता है। सरकार को गरीब, मजदूर, किसान, विद्यार्थी व गृहणियों के दुःख से कोई वास्ता नहीं है ऐसा लगता है जैसे सरकार को केवल घोाणाऐं करना ही आता है अमल करना नहीं आता है। सबकी स्थिति दुःखद है विकास के मापदण्ड यहां कहीं दिखते नहीं है। आखिर कब तक ये लोग चारे पानी के लिए तरसते रहेंगे। जनता इस सरकार से अपना हिसाब किताब पूरा करने की स्थिति में कमर कस रखी है।
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