महामहिम के खुलेपन और लोकस्पर्शी व्यवहार ने लुभाया जैसलमेरवासियों को

- डॉ. दीपक आचार्य
जैसलमेर, 26 फरवरी/राज्यपाल श्रीमती मार्गे्रट आल्वा की चार दिवसीय जैसलमेर यात्रा लोकजीवन में नई स्फूर्ति और उत्साह का संचार करने वाली रही।
अपनी यात्रा के हर पड़ाव में सरल, सहज और सौम्य छवि ने जैसलमेरवासियों को गहरे तक प्रभावित किया वहीं चार दिनों में उनके हर कार्यक्रम में महामहिम की आम जन के प्रति संवेदनशीलता भी इतनी झलकी कि हर कहीं आम लोगों ने उनसे बेहिचक मुलाकात भी की और अपने दिल की पीड़ाओं को भी बयाँ किया।
राज्यपाल की जैसलमेर यात्रा आम लोगों से लेकर फौजियों और राजनेताओं, कलाकारों,ग्रामीणों, राज्यकर्मियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों तक सभी को गहरी आत्मीयता और सुकून का अहसास भी करा गई।
राज्यपाल के माधुर्य भरे व्यवहार और लोकस्पर्शी व्यक्तित्व का ही कमाल था कि वे जहाँ कहीं पहुंंची वहाँ श्रद्धा और आदर का दरिया तो उमड़ ही आया, आम लोगों के दिलों दिमाग में भी महामहिम की जो छवि स्थापित हुई वह इस अर्थ में अमिट है कि राज्यपाल की परंपरागत छवि से हटकर आम जन से सीधे मुखातिब होकर संवाद स्थापित करने और आत्मीयता के साथ हर बात सुनने की उनकी शैली अपने आप में विशिष्ट है।

शहीद पूनमसिंह स्टेडियम में अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि वाले मरु महोत्सव के उद्घाटन समारोह में करतल ध्वनि से प्रतिस्पर्धियों की हौसला अफजाही हो या फिर साफा बांध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत करने मंच पर पहुंचने की बात, महामहिम के जनस्पर्शी स्वभाव और प्रतिभाओं के प्रति विशेष आत्मीयता भाव ने वहां मौजूद हजारों देशी-विदेशी सैलानियों और प्रतिस्पर्धियों को भी मुग्ध कर दिया।

इसी स्टेडियम में दूसरे दिन कैमल टैटू शो के दौरान् फौजियों द्वारा अपने रोजमर्रा के बर्तनों और संसाधनों का इस्तेमाल कर किए गए आकर्षक आर्केस्ट्रा ने राज्यपाल को खूब अभिभूत कर दिया।

फौजियों के उत्साहवद्र्धन के लिए वे मंच पर पहुंची तथा वहाँ शाबाशी दी। फौजियों ने भी राज्यपाल के साथ फोटो खिंचवा कर प्रसन्नता का इज़हार किया। आम जन में राज्यपाल की जनोन्मुखी छवि का ही परिणाम था कि राज्यपाल अपने दौरे में जहां कहीं पहुंची, लोगों ने दिल खोलकर उनका स्वागत किया और शॉल, तस्वीरों, उपहारों से उनका अभिनंदन करने का मौका पाया।

मिस्टर डेजर्ट बने रंगकर्मी एवं अभिनेता श्री विजय बल्लाणी जब उनका शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन करने सर्किट हाउस पहुंचे तो राज्यपाल श्रीमती मार्गेट आल्वा ने अपनी ओर से उनका अभिनंदन किया और बधाई दी। राज्यपाल ने मिस्टर डेजर्ट से उनके योगदान की जानकारी तो ली ही,मिस्टर डेजर्ट श्री बल्लाणी से उनके आभूषणों तथा परिधानों के बारे में भी जानकारी ली।

जैसलमेर यात्रा के दौरान् ग्रामीणों में राज्यपाल की झलक पाने और उनसे मिलने का जज्बा देखने लायक रहा। मोहनगढ़ में ग्राम्य महिलाओं ने उनका अभिनंदन किया वहीं इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के अवलोकन के दौरान् वन विभाग की महिला कार्मिकों ने उनसे बेहिचक बात की और फोटो खिंचवाया।

जैसलमेर के दर्शनीय स्थल गड़ीसर झील के अवलोकन के दौरान शेरगढ़ (जोधपुर) से आए स्कूली बच्चों से शिक्षा-दीक्षा के बारे में चर्चा की और बच्चों की इच्छा पर फोटो भी खिंचवाया। इसी प्रकार पटवा हवेली और अन्य स्थलों पर भी स्थानीय पार्षदों व निवासियों से राज्यपाल घुल मिल गई और पारिवारिक टच दिया।

राज्यपाल से यहीं पर वन विभागीय महिला अधिकारियों ने चर्चा की और फोटो खिंचवाया। काणोद में महानरेगा की महिला श्रमिकों से श्रीमती आल्वा ने चर्चा की और महानरेगा व विभिन्न योजनाओं के बारे में पूछा।

इन महिलाओं के साथ ही वहां के ग्रामीणों ने भी गांव की समस्याओं तथा जरूरतों के बारे में उनसे बात की। अपनी यात्रा के दौरान वे जहां-जहां पहुंची वहां लोगों ने उनका स्वागत तो किया ही,खुलकर बातें भी की।

भारत-पाक सीमा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान उन्होंने फौजियों तथा सैन्य अधिकारियों से बातचीत के दौरान् उनका हौसला बढ़ाया और विजिट बुक में फौजियों के योगदान को लेकर उत्साहवर्धक टिप्पणी भी दर्ज की।

महामहिम की पूरी यात्रा के दौरान् हर कहीं पारिवारिक आत्मीयता भरा माहौल इस कदर पसरा रहा कि हर किसी को राज्यपाल में अपने कुटुम्ब के मुखिया की छवि के दर्शन हुए। राज्यपाल की यात्रा ने उम्मीदों को पंख लगाने के साथ ही हर तरफ उत्साह का दिग्दर्शन भी कराया।

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