कैश सब्सिडी स्कीम पर यूपीए को झटका
नई दिल्ली। महत्वाकांक्षी कैश फॉर सब्सिडी स्कीम को लेकर केन्द्र की यूपीए सरकार को तगड़ा झटका लगा है। चुनाव आयोग ने सरकार से कहा है कि जब तक गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न न हो जाए तब तक वहां इस योजना को लागू नहीं किया जाए। चुनाव आयोग ने भाजपा की शिकायत और सरकार के जवाब पर सुनवाई के बाद कहा कि सरकार गुजरात चुनाव तक इस स्कीम को टाल सकती थी। आयोग ने स्कीम की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए।
इसलिए भाजपा को ऎतराज
भाजपा ने चुनाव आयोग को शिकायत की थी कि गुजरात विधानसभा चुनाव में फायदा उठाने के मकसद से इस स्कीम को लागू करने की घोषणा की गई है। भाजपा ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया था।
लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा नेता मुख्य चुनाव आयुक्त से मिले थे। यह स्कीम देश के जिन 51 जिलों में लागू की जानी है उनमें गुजरात के चार जिले भी शामिल हैं। इनमें मेहसाणा,वलसाड,भावनगर और आणंद शामिल हैं। हिमाचल के दो जिलों में भी स्कीम लागू की जानी है।
चुनाव आयोग ने मांगा था जवाब
भाजपा की शिकायत पर चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव अजित सेठ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। चुनाव आयोग ने सरकार से पूछा था कि गुजरात चुनाव के समय कैश सब्सिडी योजना का एलान क्यों किया गया? क्या गुजरात चुनाव के खत्म होने तक इस योजना को नहीं टाला जा सकता था?
यह दिया सरकार ने जवाब
सरकार ने सोमवार को दिए जवाब में कहा था कि स्कीम की घोषणा गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले कर दी गई थी। योजना को लेकर पहली घोषणा एक मार्च 2012 को तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बजट भाषण के दौरान की थी। पीएओ की ओर से पहली प्रेस रिलीज 28 सितंबर को जारी की गई थी। गुजरात चुनाव की घोषणा 3 अक्टूबर को की गई थी। तब आदर्श आचार संहिता लागू हुई थी।
गौरतलब है कि सब्सिडी का पैसा सीधे लोगों के बैंक खातों में जमा करने की सरकार की योजना 1 जनवरी से शुरू हो रही है। सरकार ने कैश सब्सिडी योजना को गेम चेंजर बताते हुए आपका पैसा आपके हाथ का नारा दिया है। शुरूआत में देश के 51 जिलों को इसमें शामिल किया गया है।
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