मीडिया एवं शिक्षा जगत प्रभावी भूमिका निभा सकता है - पीएमओ डॉ. खिंची

जैसलमेर, 31 अक्टूम्बर/
श्रीजवाहिर चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.डी. खिंची ने कहा है कि जन साधारण को स्वैच्छिक रक्तदान के लिये प्रेरित करने में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के साथ ही शिक्षण संस्थानों की अहम् भूमिका है। उन्होंने कहा कि जिले के गर््रामीण अंचलों के साथ ही नगरीय क्षेत्रों में रक्तदान के प्रति लोगों के मन में व्याप्त भं्रातियों को मिटाए जाने की आवश्यकता है।
डॉ. खिंची श्रीजवाहिर चिकित्सालय के तत्वावधान में राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी जयपुर की ओर से स्थानीय रेस्टोरेंट में मीडिया एवं शिक्षण संस्थानों के पदाधिकारियों के लिये आयोजित एक दिवसीय रक्तदान प्रोत्साहन कार्यशाला में उपस्थित संभागियों को सम्बोधित कर रहे थे। चिकित्सा अधिकारी प्रभारी रक्त कोष डॉ. दामोदर खत्री के साथ ही विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधि, अधिकारीगण,मीडियाप्रतिनिधिगण आदि इस अवसर पर उपस्थित थे।
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. खिंची ने इस अवसर पर रक्त की संरचना पर बिन्दुवार जानकारी देते हुए बताया कि सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 4.5 से 5 लीटर तक खून रहता है। उन्होंने बताया कि रक्तदान के कारण जहां पीड़ित व्यक्तियों को नवजीवन मिलता है वहीं रक्तदान करने वाले व्यक्ति के शरीर में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा कम रहती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मानव को जीवन में रक्तदान अवश्य करना चाहिए इसके कारण पीड़ित व्यक्ति को नव जीवन मिलने पर जो खुशी होती हैं वह सचमुच में अविस्मरणीय रहती है।
डॉ. दामोदर खत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दान की विशेष महत्ता है, किन्तु रक्तदान सभी प्रकार के दानों में सर्वश्रेष्ठ दान है। उन्होंने बताया कि देश में अनेक ऎसे व्यक्ति है जिन्होंने अपने जीवन में100 बार से रक्तदान कर लोगों का जीवन बचाया हैं। डॉ.खत्री के अनुसार जैसलमेर निवासी संजय खत्री 29बार रक्तदान कर युवाओं के सामने एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि रक्तदान करने वाले व्यक्ति सामान्यतया दीर्घायु एवं निरोग होते हैं।
कार्यशाला में पूर्व सूचना एवं जन सम्पर्क अधिकारी शम्भूदान रतनू , मां दुर्गा शिक्षण संस्थान दामोदरा के प्रतापचंद्र व्यास, लॉयन्स क्लब के चन्द्रशेखर पुरोहित, एसबीके महाविद्यालय के डॉ. गणपतलाल सुथार, डाईट के जयकिशन आचार्य, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के सतीश पुरोहित, वरिष्ठ पत्रकार दीनदयाल तंवर आदि ने स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति वातावरण निर्माण के लिये ग्रामीणांचलों में कार्यशालाओं एवं रक्तदान शिविरों का आयोजन करने, विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन करने पर बल दिया।
इस अवसर पर महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी डॉ. सुथार ने बताया कि शीघ्र ही महाविद्यालय स्तर पर रक्तदान शिविर के आयोजन की योजना है। इसी प्रकार प्रतापचंन्द्र व्यास ने विश्वास दिलाया कि महाविद्यालय स्तर पर दीपावली के पश्चात रक्तदान शिविर के आयोजतन की कार्ययोजना तैयार की गई है।
कार्यशाला में डॉ. खत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मानव रक्त के प्रमुख घटक यथा प्लाजमा,लाल रक्त कोशिकाएं ,श्वैत रक्त कोशिकाऍं एवं प्लेटलेट्स कोशिकाएँ निर्धारित समयावधि के बाद स्वतः नष्ट हो जाती हैं, अतः यदि समय रहते रक्तदान किया जाए तो जरूरतमंद लोगों को मानव जीवन के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण रक्त घटकों का लाभ मिल सकेगा। 
उन्होंने बताया कि कोई भी स्वस्थ स्त्री व पुरुष जिसका वजन 45 किलो या उससे अधिक हो तथा जिसकी आयु 18 से 60 वर्ष के बीच हो एवं जिसके रक्त में हिमोग्लोबिन का का प्रतिशत 12.5 ग्राम या उससे अधिक हो, वह हर तीन माह पश्चात रक्तदान कर सकता है।

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