महात्मा गांधी नरेगा से महिला सशक्तिकरण
ग्रामीण महिलाओं को महात्मा गांधी नरेगा योजना की बदौलत खासी राहत मिलने के साथ महिला सशक्तिकरण को ब़ावा मिला है। महात्मा गांधी नरेगा योजना में महिलाओं ने वर्ष 201112 में 95.30 लाख एवं वर्ष 201213 में 24 अगस्त 2012 तक 58.15 लाख मानव दिवस पूर्ण कर इतिहास रचा है।
बाड़मेर। सरहदी इलाकों में सालाना अधिकतर परिवारों के मुखिया के रोजगार की तलाश में पलायन करने के बाद उनके परिवार की जिम्मेदारी महिलाओं पर आ जाती थी। उनकी वापसी तक महिलाओं के लिए परिवार का गुजारा चलाना एवं पेयजल जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता। सरहदी इलाकों में कई किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पेयजल उपलब्ध हो पाता। परिवार के मुखिया के रोजगार के लिए पलायन के बाद दोहरी भूमिका निभाने वाली महिलाओं को महात्मा गांधी नरेगा योजना की बदौलत खासी राहत मिली है।
बाड़मेर जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत महिलाओं ने वर्ष 201112 में 95.30 लाख एवं वर्ष 201213 में 24 अगस्त 2012 तक 58.15 लाख मानव दिवस पूर्ण कर इतिहास रचा है। महात्मा गांधी नरेगा योजना शुरू होने से महिलाएं नजदीक में रोजगार नहीं होने से घरेलू कार्य संपादित करने तक सीमित थी। हालांकि महिलाओं को अकाल राहत पर नियोजित किया जाता था। लेकिन यह कार्य कुछ माह तक ही चलते थे। महात्मा गांधी नरेगा योजना में मांग के अनुसार कार्य एवं घर के समीप कार्य मिलने से महिलाओं ने इसको लेकर विशोष उत्साह दिखाया है। इसका नतीजा है कि अधिकतर कार्यों पर नियोजित होने वाले पुरूष श्रमिकों की तुलना में महिलाओं की तादाद अधिक दिखाई देती है। बाड़मेर जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजना में भारी तादाद में महिला श्रमिक नियोजित होने से उनके आर्थिक स्तर में सुधार हुआ है। महिलाएं अब अपने परिवार का गुजारा चलाने के साथ आत्मनिर्भर हो गई है। जिले में महिला सशक्तिकरण की लिहाज से महात्मा गांधी नरेगा योजना वरदान साबित हुई है। अब तक महिलाओं का पूरा दिन पेयजल जुटाने एवं अन्य घरेलू काम काज संपादित करने में व्यतीत होता था। महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अधिकतर ाणियों के समीप पेयजल संग्रहण के लिए टांका निर्माण हो चुका है। ऐसे में महिलाएं अब आसानी से महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों पर मजदूरी कर रही है।

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