आयुश चिकित्सकों को दिया मलेरिया नियंत्रण प्रिशक्षण, मरीजों को मिलेगी राहत
बाडमेर।
जिला आईईसी समन्वयक विनोद बिश्नोई ने बताया कि आयुश चिकित्सकों को मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मलेरिया संबंधी दवाएं लिखने के लिए अधिकृत किया गया है। अब आयुश चिकित्सक भी मलेरिया नियंत्रण में अपनी भूमिका अदा करेंगे, जिस कारण मरीजों को खासी राहत मिलेगी और सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों का भार कम होगा। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. गहलोत ने प्रिशक्षण के दौरान चिकित्सकों को सलाह दी कि वे इंजेक्शन की बजाए टेबलेट पर जो दें, क्योंकि टेबलेट अधिक असरदार होती हैं और उससे मरीज को फायदा पहुंचता है। हालांकि अधिकांश ग्रामीण इलाकों में मरीज ही इंजेक्शन की जिद्द करते हैं, लेकिन उन्हें समझाने की और टेबलेट के प्रति विश्वास पैदा करने की जिम्मेवारी चिकित्सक की ही बनती है। उन्होंने मरीजों को अनावश्यक दवा न लिखने तथा मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत की जा रही सप्लाई वाली दवा ही लिखने के निर्देश चिकित्सकों को दिए। आयुश अधिकारी डॉ. झा ने मलेरिया कैसे फैलता है, उसके कारण क्या हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है पर विस्तार से जानकारी दी। प्रिशक्षण मे जान पदिप रोग विशोशज्ञ डॉ. मुकेश गर्ग, आशा समन्वयक राकेश भाटी, डॉ. विशाल धिमान, आईईसी समन्वयक विनोद बिश्नोई मौजूद थे।
नबसंदी शिविरों में भी भागीदारी निभाएं आयुश
राश्ट्रीय कार्यक्रम परिवार कल्याण के प्रति ध्यान देने और प्रत्येक नसबंदी शिविरों में भागीदारी निभाने के लिए आयुश चिकित्सकों को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हेमराज सोनी ने पाबंद किया। उन्होंने कहा कि सभी के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं इसलिए जरूरी है कि वे उनके प्रति सजग और सतर्क रहें तथा लोगों को नसबंदी के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि एक राश्ट्रीय समस्या है, जिसे सबको मिलजुलकर ही समाप्त किया जा सकता है।
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