आईईसी कार्यशाला जारी, आज होगा समापन
बाडमेर।
स्वास्थ्य सेवाओं का क्षेत्र बहुत विस्तृत है और इससे आमजन का प्रत्यक्ष जुड़ाव है इसलिए जरूरी है कि स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं का व्यापक प्रचारप्रसार हो। सही व स्तरीय संचार के जरिए ही हम जनमानस से बेहतरीन समन्वय एवं तालमेल बिठा सकते हैं। ये विचार बुधवार को जिलास्तर पर आयोजित की जा रही आईईसी कार्यशाला में वक्ताओं ने रखे। सोमवार से ाुरू हुई कार्यशाला का गुरूवार को समापन होगा। जिला आईईसी समन्वयक विनोद बिश्नोई ने बताया कि महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) की महता बताने तथा विभागीय गतिविधियों से रूबरू करवाने के लिए जिलास्तरीय आईईसी कार्यशाला का आयोजन करवाया जा रहा है। बुधवार को वरिश्ठ चिकित्सक डॉ. हनुमानाराम, आयुश अधिकारी डॉ. अनिल झा, आशा समन्वयक राकेश भाटी ने मौसमी बीमारियों एवं अन्य सेवाओं के प्रति सतर्क रहने के लिए निर्देश दिए। उन्हें बताया कि प्रत्येक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता को जिला कलेक्टर डॉ. वीणा प्रधान के निर्देशानुसार प्रत्येक माह एक नसबंदी केस अतिआवश्यक रूप से करवाना है। जबकि आगामी दिनों में इससे अधिक लोगों को प्रेरित करने की जिम्मेवारी स्वास्थ्य कर्मियों की रहेगी। आईईसी समन्वयक विनोद बिश्नोई ने कहा कि जिलास्तर एवं ब्लॉक से प्राप्त आईईसी सामग्री को सही तरीके से उप स्वास्थ्य केंद्र पर चस्पा करें और आमजन को वितरण की जाने वाली सामग्री को समय पर वितरित करें। ऐसा नहीं करने एवं लापरवाही पाए जाने पर सीएमएचओ कार्यालय से कार्रवाई होगी। कार्यशाला के दौरान सभी को आईईसी सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई।
अब हो सकेगी शुगर की जांच
एनसीडी (नॉन कम्यूनिकेबल डीजीज) सेल की ओर से जिलास्तर पर दिए जा रहे प्रिशक्षण के दौरान बुधवार को सिणधरी एवं सिवाणा ब्लॉक की समस्त महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ग्लूकोमीटर की जानकारी दी गई। इस दौरान उन्हें ग्लूकोमीटर उपलब्ध करवाते हुए जोधपुर से आए प्रिशक्षक सैयद शिफा अली ने कहा कि अब आप गांवों में जाकर लोगों का ग्लूकोज जांच सकेंगी, जिससे ाुगर जैसी गंभीर बीमारी का पता चलेगा। अली ने बताया कि यह जांच केवल रक्त के माध्यम से ही हो सकेगी। उन्होंने ग्लूकोमीटर की विस्तार से जानकारी दी तथा उसकी बारीकियों के बारे में बताया। इस अवसर पर सेल के सौरभ कुमार, मुकेश भाटी व तनुसिंह सो़ा मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि जिले में स्थापित एनसीडी सेल का यह पहला प्रिशक्षण है, जो महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा है। उन्हें इलेक्ट्रोनिक ग्लूकोमीटर के जरिए जांच का तरीका बताया जा रहा है।
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