फांसी से माफी की कसाब की याचिका खारिज 

नई दिल्ली।
 मुंबई हमलों के दोषी आतंकी अजमल आमिर कसाब को फांसी की सजा को सुप्रीमकोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए फांसी से माफी की कसाब की याचिका खारिज कर दी। उल्लेखनीय है कि 26 नवम्बर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमलों में कसाब को बम्बई हाईकोर्ट पहले ही फांसी की सजा सुना चुका है और अब सुप्रीमकोर्ट ने भी अपने फैसले में सजा बरकरार रखा है। कसाब की फांसी के स्थान पर उम्रकैद की याचिका पर यह फैसला न्यायाधीश आफताब आलम और न्यायाधीश चंद्रमौली कुमार प्रसाद की खंडपीठ ने सुनाया। 
उल्लेखनीय है कि मुंबई हमलों में जीवित पकडे गए एक मात्र आतंकी कसाब ने इस मामले में दोषी ठहराए जाने और फांसी की सजा सुनाए जाने के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मुंबई की एक विशेष अदालत ने छह मई 2010 को 24 वर्षीय कसाब को मृत्युदंड सुनाया था, जिसे बम्बई हाईकोर्ट ने गत वर्ष 10 अक्टूबर को बरकरार रखा था। 
इस मामले में न्याय मित्र बनाए गए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने सुप्रीमकोर्ट में दलील दी थी,कि कसाब भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसी साजिश में एक प्यादा है न कि वजीर और बादशाह। हालांकि महाराष्ट्र सरकार की दलील थी कि कसाब को फांसी पर लटकाया जाना चाहिए, क्योंकि वह भारत के खिलाफ साजिश का हिस्सा रहा है। मुंबई पर हुए आतंकी हमलों में 166 लोग मारे गए थे और अनेक घायल हुए थे। कसाब एक मात्र आतंकी है जिसे जिंदा पकड़ा गया है, जबकि अन्य नौ पाकिस्तानी आतंकी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे।

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